आरा में खाकी को गहरा जख्म: रिटायरमेंट से मात्र एक साल पहले SI विजय राम की मौत; दूल्हे की कार ने ड्यूटी के दौरान मारी थी टक्कर

आरा। बिहार के भोजपुर जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने न केवल पुलिस महकमे को शोक संतप्त कर दिया है, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को भी हमेशा के लिए छीन लिया है। जिले के तरारी थाना क्षेत्र के विपिनडीह गांव के समीप एक सड़क हादसे में घायल बिहार पुलिस के सब-इंस्पेक्टर (SI) विजय कुमार राम की शुक्रवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। यह दुखद घटना उस समय हुई जब विजय कुमार राम अपने कर्तव्य पथ पर थे और एक केस के अनुसंधान के सिलसिले में ड्यूटी पर तैनात थे। विडंबना यह है कि विजय कुमार राम अपनी सेवा के अंतिम पड़ाव पर थे और वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। उनकी असामयिक मृत्यु से उनके परिवार के पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है, जिससे पूरे गांव और पुलिस विभाग में सन्नाटा पसरा हुआ है।

ड्यूटी के दौरान हुआ था जानलेवा हादसा

​घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजय कुमार राम (58 वर्ष) वर्तमान में भोजपुर जिले के तरारी थाना में एसआई के पद पर कार्यरत थे। बुधवार की दोपहर वह एक आपराधिक मामले के अनुसंधान (केस इन्वेस्टिगेशन) के लिए विपिनडीह गांव गए हुए थे। जांच पूरी करने के बाद जब वह अपनी बाइक से वापस तरारी थाना लौट रहे थे, तभी सेदाह-तरारी मुख्य मार्ग पर विपिनडीह गांव के समीप काल बनकर आई एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

​बताया जाता है कि वह कार एक दूल्हे की थी और काफी अनियंत्रित गति से चलाई जा रही थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एसआई विजय कुमार राम बाइक समेत सड़क किनारे दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। इस भीषण हादसे में उनका पैर बुरी तरह टूट गया था। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस कर्मियों और ग्रामीणों की सहायता से उन्हें तरारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक स्थिति और पैर की हड्डी टूटने के कारण बेहतर इलाज के लिए उन्हें आरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अचानक बिगड़ी तबीयत और मौत की दस्तक

​निजी अस्पताल में उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उनके टूटे हुए पैर पर प्लास्टर चढ़ाया था। डॉक्टरों की सलाह और स्थिति में आंशिक सुधार को देखते हुए उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और वह अपने घर लौट आए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शुक्रवार की दोपहर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने बताया कि उन्हें अचानक पेट फूलने और बेचैनी की शिकायत होने लगी थी।

​उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजन उन्हें आनन-फानन में आरा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने उनका गहन परीक्षण किया। हालांकि, अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं और चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर ने उनके साथ आए परिजनों और पुलिस कर्मियों के पैरों तले जमीन खिसका दी। कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की इस तरह मौत होने की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी सदर अस्पताल पहुंचे, जहाँ कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

34 वर्षों का सेवाकाल और रिटायरमेंट का इंतजार

​विजय कुमार राम बिहार पुलिस के एक अनुभवी और निष्ठावान अधिकारी थे। उन्होंने 23 फरवरी 1993 को बिहार पुलिस में अपना योगदान दिया था। पिछले 34 वर्षों से वह राज्य की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे। वह मूल रूप से बड़हरा थाना क्षेत्र के लौहर फरना गांव के रहने वाले थे। अपने लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं दीं और उनकी छवि एक मृदुभाषी और मिलनसार अधिकारी की रही है।

​विजय कुमार राम के लिए साल 2027 खुशियों का साल होने वाला था, क्योंकि इसी वर्ष वह अपनी लंबी सेवा के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने वाले थे। रिटायरमेंट में अब केवल एक साल का समय बचा था, और वह अपने परिवार के साथ सेवानिवृत्ति के बाद के समय की योजनाएं बना रहे थे। लेकिन एक अनियंत्रित वाहन की रफ्तार ने उनके और उनके परिवार के सभी सपनों को एक ही पल में चकनाचूर कर दिया।

शोक में डूबा परिवार: पांच बच्चों के भविष्य पर सवाल

​एसआई विजय कुमार राम की मौत के बाद उनके पैतृक गांव लौहर फरना और वर्तमान पदस्थापना वाले तरारी थाना में मातम का माहौल है। उनके परिवार में उनकी पत्नी कौशल्या देवी और पांच बच्चे हैं। उनके तीन पुत्रियां हैं—सरिता कुमारी, प्रियंका कुमारी और स्नेहा कुमारी। साथ ही उनके दो पुत्र राकेश कुमार और विकास कुमार हैं। पिता की मौत की खबर सुनते ही पत्नी कौशल्या देवी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।

​परिजनों के चीत्कार से पूरा सदर अस्पताल परिसर दहल उठा। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं, क्योंकि विजय कुमार राम केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं थे, बल्कि अपने गांव के लिए एक आदर्श भी थे। परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है, क्योंकि विजय कुमार राम ही घर के मुख्य आर्थिक आधार थे। उनकी मौत से पांचों बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

पुलिस महकमे में शोक की लहर

​विजय कुमार राम के निधन पर भोजपुर पुलिस के आला अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। तरारी थाने के उनके साथी पुलिस कर्मियों ने बताया कि वह एक अत्यंत अनुशासित अधिकारी थे और अपने केस डायरी के निपटारे में कभी देरी नहीं करते थे। जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन भी वह चिलचिलाती धूप में केस की गुत्थी सुलझाने के लिए गांव निकले थे। पुलिस विभाग ने उनके निधन को एक समर्पित योद्धा का खोना बताया है।

​पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतक के परिवार को हर संभव सरकारी सहायता और लाभ जल्द से जल्द दिलाने की मांग की है। ड्यूटी के दौरान हुई इस मौत ने एक बार फिर पुलिस कर्मियों के लिए सड़कों पर बढ़ते खतरों और यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के कारण होने वाले नुकसान को रेखांकित किया है।

​विजय कुमार राम का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके गांव पहुँचा, वहां लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई उस जांबाज अधिकारी के अंतिम दर्शन करना चाहता था जिसने समाज की सेवा करते-करते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की तैयारी की गई है। आरा का यह हादसा उन तमाम परिवारों के लिए एक कड़वी याद छोड़ गया है जो अपने सदस्यों की सुरक्षित वापसी की राह देखते हैं।

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