
औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले का कुटुंबा थाना क्षेत्र इन दिनों एक ऐसी सनसनीखेज वारदात से थर्राया हुआ है, जो मानवीय संवेदनाओं और कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती देती नजर आती है। यह कहानी प्रेम, प्रतिशोध और सुपारी किलिंग के उस खतरनाक त्रिकोण की है, जहाँ एक सिरफिरे आशिक ने अपनी प्रेमिका की शादी रुकवाने के लिए किसी भी हद तक जाने का फैसला कर लिया। जब शहनाइयों की गूंज सुनाई देने वाली थी, तब वहां गोलियों की तड़तड़ाहट ने खुशियों के आंगन को मातम और डर के साए में धकेल दिया। कुटुंबा थाना क्षेत्र के चिंतावन बिगहा गांव में बारात निकलने की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन एक तरफ एक प्रेमी अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय खूनी खेल खेलने की योजना बना रहा था। इस पूरी साजिश का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने एक पेशेवर शूटर को धर दबोचा और जो सच सामने आया, उसने समाज के सभ्य होने के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर ‘साजिशी’ प्रहार
इस खूनी पटकथा का सबसे काला अध्याय 27 अप्रैल 2026 की उस सुबह लिखा गया, जब चिंतावन बिगहा गांव के निवासी और दूल्हे के पिता सुनील पांडेय उर्फ अरुण पांडेय अपने चचेरे भाई प्रमोद पांडेय के साथ अंबा बाजार से शादी का सामान खरीदकर घर लौट रहे थे। वे स्कूटी पर सवार थे और शायद मन ही मन अपने बेटे की शादी की तैयारियों और आने वाली खुशियों का हिसाब लगा रहे थे। लेकिन उन्हें इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर रसोईया गांव के पास मौत उनका पीछा कर रही है।
अपराधियों ने घात लगाकर एक सफेद रंग की डिजायर कार से स्कूटी का पीछा किया। जैसे ही मौका मिला, अपराधियों ने पहले अपनी कार से स्कूटी में जोरदार टक्कर मारी। इस टक्कर का मकसद केवल डराना नहीं, बल्कि संतुलन बिगाड़कर उन्हें मौत के करीब ले जाना था। स्कूटी गिरने के बाद जब तक सुनील पांडेय संभल पाते, अपराधियों ने सीधे उनके चेहरे को निशाना बनाकर गोली चला दी। गोली उनकी बाईं आंख के ठीक नीचे लगी, जिससे वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। हमलावरों को लगा कि उनका काम पूरा हो गया और वे धूल उड़ाते हुए वहां से फरार हो गए।
डेढ़ लाख का ‘डेथ कॉन्ट्रैक्ट’ और सनकी प्रेमी
पुलिस की तफ्तीश में जो खुलासा हुआ, वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है। इस पूरी वारदात के पीछे दुल्हन का प्रेमी दिलीप कुमार था। दिलीप किसी भी कीमत पर उस शादी को रुकवाना चाहता था। उसने इसके लिए पेशेवर अपराधियों से संपर्क साधा और एक खूनी सौदा तय किया। जानकारी के अनुसार, दूल्हे या उसके पिता की हत्या करने के लिए डेढ़ लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। हत्यारे का काम केवल एक ही था—शादी वाले घर में लाश गिराना ताकि शादी का उत्सव हमेशा के लिए रुक जाए।
इस सौदे के लिए प्रेमी दिलीप कुमार ने 50 हजार रुपये एडवांस के तौर पर शूटर को दिए थे। उसका मानना था कि यदि दूल्हा मर गया तो शादी तो टूटेगी ही, लेकिन यदि दूल्हे के पिता की भी हत्या हो जाती है, तो घर में मातम पसर जाएगा और बारात नहीं निकल पाएगी। अपराधी प्रवृत्ति का दिलीप कुमार कानून के लंबे हाथों से बेखौफ होकर अपनी सनक को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था। पुलिस की जांच ने अब उसके इस ‘खूनी प्रेम’ की पोल खोल दी है।
दूल्हा नहीं मिला तो पिता को बनाया निशाना
अपराधियों की योजना काफी सूक्ष्म थी। घटना को अंजाम देने के लिए तीन अपराधी एक डिजायर कार में सवार होकर पहले ही चिंतावन बिगहा गांव पहुँच गए थे। उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक शातिर तरीका अपनाया—गाड़ी की नंबर प्लेट पर गीली मिट्टी लगा दी गई थी ताकि कोई सीसीटीवी या चश्मदीद गाड़ी का नंबर न पढ़ सके। अपराधियों ने गांव में घुसकर दूल्हे की तलाश में रेकी भी की। उनकी प्राथमिकता दूल्हे को मारना था ताकि शादी का मूल आधार ही खत्म हो जाए।
लेकिन जब गांव के भीतर दूल्हा नहीं मिला और उन्हें लगा कि गांव में पकड़े जाने का खतरा है, तो उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी। वे गांव से बाहर निकलकर बाजार वाले रास्ते पर खड़े हो गए। वहां उन्हें पता चला कि दूल्हे के पिता सामान लेने बाजार गए हैं। रसोईया गांव के पास जैसे ही सुनील पांडेय नजर आए, अपराधियों ने उन पर हमला कर दिया। यह हमला इतना सुनियोजित था कि सुनील पांडेय को बचने का कोई मौका नहीं मिला। गनीमत यह रही कि गोली सीधे सिर के बजाय आंख के नीचे लगी, जिससे उनकी जान बच गई, हालांकि उनकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और वे पटना एम्स में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
पुलिसिया चक्रव्यूह और बिहटा से शूटर की गिरफ्तारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक अंबरीश राहुल ने तुरंत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इस टीम में कुटुंबा थानाध्यक्ष इमरान आलम, एसआई प्रशांत त्रिवेदी और उमेश कुमार सहित कई तेजतर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय मुखबिरों ने शूटर की पहचान करने में बड़ी मदद की। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह पाया कि हमलावर बिहटा इलाके के रहने वाले हो सकते हैं।
महज चार दिनों के भीतर, पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी लोकेशन के आधार पर बिहटा थाना क्षेत्र के बिहटा गांव में छापेमारी की। वहां से पेशेवर शूटर जितेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जब जितेंद्र से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और बताया कि कैसे डेढ़ लाख की सुपारी लेकर उसने इस घटना को अंजाम दिया। जितेंद्र का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिसने पुलिस के संदेह को और पुख्ता कर दिया। उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जो कुटुंबा पुलिस के लिए एक बड़ी प्रशासनिक कामयाबी मानी जा रही है।
फरार आरोपियों की घेराबंदी और न्याय की तलाश
भले ही शूटर जितेंद्र कुमार सलाखों के पीछे पहुँच गया हो, लेकिन इस पूरी खूनी साजिश का असली मास्टरमाइंड यानी दुल्हन का प्रेमी दिलीप कुमार अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। दिलीप के साथ दो अन्य अपराधी भी फरार हैं, जो उस दिन कार में सवार थे। कुटुंबा थानाध्यक्ष इमरान आलम ने स्पष्ट किया है कि अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और उन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
शादी वाले घर में अब खुशियों की जगह सन्नाटा और खौफ का मंजर है। ग्रामीण इस बात से हैरान हैं कि एक युवक की सनक ने एक हंसते-खेलते परिवार को अस्पताल की दहलीज पर पहुँचा दिया। पुलिस की एसआईटी टीम अब फरार दिलीप कुमार की गिरफ्तारी के लिए डिजिटल फुटप्रिंट्स का सहारा ले रही है। औरंगाबाद पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और ट्रायल के जरिए उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी ताकि भविष्य में कोई दूसरा प्रेमी ऐसी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।


