
पटना/भागलपुर। बिहार के प्रशासनिक और कृषि परिदृश्य में गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 का दिन भागलपुर जिले के लिए स्वर्णिम उपलब्धियों का साक्षी बना। राजधानी पटना में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यशाला के दौरान भागलपुर जिले को कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने और किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने संयुक्त रूप से भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान जिले के उन हजारों किसानों और कृषि विभाग के कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना AgriStack को धरातल पर उतारने में मिसाल कायम की है। भागलपुर अब बिहार का वह मॉडल जिला बन गया है, जहाँ किसानों का डेटा न केवल डिजिटल है, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी और तीव्र हो गई है।
पटना में सम्मान समारोह: प्रशासनिक मेधा का प्रदर्शन
पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित इस गरिमामय कार्यशाला में राज्य के तमाम जिलों के वरीय अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक नवाचार और तकनीकी समावेश के जरिए सुशासन को सुदृढ़ करना था। जैसे ही भागलपुर का नाम ‘AgriStack’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुकारा गया, पूरा सभागार तालियों की गूँज से भर उठा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने प्रशस्ति पत्र सौंपते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के नेतृत्व की सराहना की।
मुख्य सचिव ने कहा कि डेटा का सही संकलन ही बेहतर भविष्य की नींव रखता है और भागलपुर ने किसानों के डेटा डिजिटलीकरण में जो तत्परता दिखाई है, वह अन्य जिलों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। वहीं, डीजीपी विनय कुमार ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को योजनाओं से सीधे जोड़ना न केवल उनके उत्थान के लिए जरूरी है, बल्कि यह व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर सुरक्षा और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करता है।
क्या है AgriStack? किसानों के लिए ‘डिजिटल आधार’
AgriStack (agristack.gov.in) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक क्रांतिकारी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है। इसे सरल भाषा में किसानों का ‘डिजिटल पहचान पत्र’ या ‘कृषि आधार’ कहा जा सकता है। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य किसानों की जमीन के रिकॉर्ड, उनके द्वारा उगाई जाने वाली फसलों, उनके द्वारा लिए गए ऋण और उन्हें मिलने वाली सब्सिडी का एक एकीकृत डेटाबेस तैयार करना है।
इस पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique ID) दी जाती है। इससे सरकार को यह पता चलता है कि किस किसान के पास कितनी जमीन है और उसने किस मौसम में कौन सी फसल लगाई है। भागलपुर जिले ने इस पोर्टल पर डेटा एंट्री और किसानों के पंजीकरण में राज्य के औसत से कहीं अधिक तेजी और सटीकता के साथ कार्य किया। डिजिटलीकरण की इस प्रक्रिया से अब जिले के किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक और बीमा की राशि सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में बिना किसी तकनीकी बाधा के मिल सकेगी।
भागलपुर की सफलता के पीछे की रणनीति
भागलपुर जिले को यह सम्मान मिलना कोई संयोग नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों की सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने पदभार संभालते ही कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी थी। जिले के सभी प्रखंडों में कृषि समन्वयकों, किसान सलाहकारों और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था।
जिला प्रशासन ने ‘कैंप मोड’ में काम करते हुए सुदूर गांवों तक किसानों तक पहुँच बनाई। जहाँ इंटरनेट की समस्या थी, वहां ऑफलाइन डेटा संकलित कर उसे बाद में पोर्टल पर अपलोड किया गया। भागलपुर जिले ने न केवल किसानों का पंजीकरण किया, बल्कि उनके आधार नंबर और बैंक खातों को भी सफलतापूर्वक मैप किया। इस सूक्ष्म निगरानी और फीडबैक सिस्टम के कारण भागलपुर ने AgriStack पोर्टल पर उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। आज भागलपुर के पास अपने जिले के एक-एक किसान की वास्तविक स्थिति का डेटा उपलब्ध है, जिससे किसी भी प्राकृतिक आपदा या सूखा राहत के समय सहायता पहुँचाना अब बेहद आसान हो गया है।
किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ
AgriStack से जुड़ने के बाद भागलपुर के किसानों के लिए भविष्य की राह काफी आसान हो गई है। इस सम्मान के पीछे उन लाभों की बड़ी भूमिका है जो अब किसानों को सीधे मिलेंगे:
- पारदर्शी ऋण व्यवस्था: बैंकों को अब किसानों के जमीन रिकॉर्ड की जांच के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डिजिटल डेटा के आधार पर किसानों को ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) और अन्य कृषि ऋण तुरंत मिल सकेंगे।
- फसल बीमा का त्वरित भुगतान: ओलावृष्टि या बाढ़ के कारण फसल नुकसान होने पर जिओ-टैगिंग के जरिए नुकसान का आकलन होगा और मुआवजे की राशि सीधे किसानों के खाते में जाएगी।
- सटीक सलाह: डेटा के आधार पर कृषि विभाग अब किसानों को उनके मिट्टी के प्रकार और मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार सटीक जानकारी एसएमएस के जरिए भेज पाएगा।
- बाजार से सीधा जुड़ाव: डिजिटल पहचान होने से किसान अपनी उपज को ई-नाम (e-NAM) जैसे पोर्टलों पर सीधे बेच सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलेगा।
प्रशासनिक टीम और किसान समुदाय में खुशी की लहर
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस सम्मान को पूरी टीम को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रशस्ति पत्र भागलपुर के जिला कृषि पदाधिकारी, सभी बीओ, कृषि समन्वयक और धरातल पर काम करने वाले किसान सलाहकारों की मेहनत का प्रतीक है। भागलपुर में सूचना मिलते ही कृषि विभाग के कार्यालयों में उत्सव जैसा माहौल देखा गया।
स्थानीय किसान संगठनों ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जाहिर की है। किसानों का मानना है कि पहले सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब AgriStack पोर्टल के माध्यम से सब कुछ पारदर्शी हो गया है। भागलपुर का यह सम्मान केवल कागजी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सिल्क सिटी अब ‘स्मार्ट फार्मिंग’ की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।
भविष्य का रोडमैप: स्मार्ट कृषि की ओर भागलपुर
AgriStack पर मिली इस सफलता के बाद भागलपुर जिला प्रशासन अब ‘एग्री-टेक’ के अगले चरण पर काम करने की योजना बना रहा है। इसमें ड्रोन तकनीक के जरिए फसलों की निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कीट प्रबंधन शामिल है। जिलाधिकारी का विजन है कि भागलपुर का प्रत्येक किसान डिजिटल रूप से इतना साक्षर हो कि वह अपने स्मार्टफोन के जरिए ही बीज के ऑर्डर से लेकर फसल बेचने तक का काम कर सके।

पटना में मिले इस सम्मान ने भागलपुर के प्रशासनिक अधिकारियों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। मुख्य सचिव ने कार्यशाला में भागलपुर के मॉडल को अन्य जिलों के जिलाधिकारियों के सामने केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करने का भी सुझाव दिया। भागलपुर अब बिहार के कृषि मानचित्र पर एक चमकते सितारे के रूप में उभरा है, जहाँ परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।


