मंडप में लड़खड़ाता पहुँचा शराबी दूल्हा, तो दुल्हन ने जयमाला फेंक शादी से किया इनकार; घोसी के गंधार मठ गाँव में नेहा के साहस की चर्चा

घोसी/मोदनगंज। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद नशे की लत सामाजिक उत्सवों में किस तरह खलल डाल रही है और परिवारों की खुशियों को ग्रहण लगा रही है, इसकी एक बानगी मोदनगंज प्रखंड के गंधार मठ गांव में देखने को मिली। रविवार, 26 अप्रैल 2026 की रात एक वैवाहिक समारोह उस समय चर्चा का केंद्र बन गया जब एक साहसी दुल्हन ने नशे में धुत दूल्हे के गले में जयमाला डालने से साफ इनकार कर दिया। दूल्हे की लड़खड़ाती चाल और नशे की गंध ने शादी के पवित्र मंडप की गरिमा को धूमिल किया, जिसके विरोध में दुल्हन ने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगाकर समाज को एक कड़ा संदेश दिया है। इस घटना के बाद न केवल बारात को बिना दुल्हन के वापस लौटना पड़ा, बल्कि गाँव की इस बेटी ने नशे के खिलाफ चल रही सामाजिक लड़ाई में खुद को एक मिसाल के रूप में स्थापित कर दिया है।

उत्सव का माहौल और दूल्हे की ‘लड़खड़ाती’ एंट्री: क्या है पूरी घटना?

​मोदनगंज प्रखंड अंतर्गत गंधार मठ गांव निवासी वीरेंद्र राम की तीसरी बेटी नेहा कुमारी की शादी पटना के पुनाइचक निवासी छोटू कुमार के साथ तय हुई थी। रविवार की रात गांव में उत्सव का माहौल था, शहनाइयां गूँज रही थीं और कन्या पक्ष के लोग बारात के स्वागत में पलक-पावड़े बिछाए खड़े थे। नियत समय पर बारात दरवाजे पर पहुँची और द्वार पूजा की रस्में शुरू हुईं।

​घटनाक्रम में मोड़ तब आया जब दूल्हा छोटू कुमार ‘देव पूजा’ की रस्म के लिए आगे बढ़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूल्हा इस कदर शराब के नशे में था कि वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और चलते समय उसके पैर बुरी तरह लड़खड़ा रहे थे। पूजा के दौरान उसकी इस हालत को देखकर वहां मौजूद लोग कानाफूसी करने लगे, लेकिन रस्मों को निभाने के लिए उसे जयमाला के स्टेज तक ले जाया गया।

स्टेज पर दुल्हन का ‘रणचंडी’ रूप: “शराबी से शादी मंजूर नहीं”

​जैसे ही दूल्हा जयमाला के स्टेज पर चढ़ा, दुल्हन नेहा कुमारी हाथ में वरमाला लिए वहां पहुँची। स्टेज पर दूल्हे की आँखों में छाई नशे की लाली और उसके शरीर से आ रही शराब की गंध को नेहा ने तुरंत भांप लिया। दूल्हे के व्यवहार और उसकी शारीरिक स्थिति को देख नेहा का सब्र जवाब दे गया। उसने सार्वजनिक रूप से जयमाला डालने से मना कर दिया और घोषणा की कि वह एक ऐसे व्यक्ति के साथ अपनी जिंदगी नहीं बिता सकती जो अपने जीवन के सबसे बड़े दिन पर भी नशे पर काबू नहीं रख सका।

​नेहा के इस अचानक और कड़े फैसले से वहां मौजूद बाराती और सराती दोनों पक्ष सन्न रह गए। परिजनों ने लोक-लाज का हवाला देकर नेहा को मनाने की कोशिश की, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रही। नेहा का कहना था कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बर्बाद करती है, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को अंधकार में धकेल देती है। दुल्हन के इस साहस को देखकर ग्रामीणों ने भी उसका समर्थन करना शुरू कर दिया।

बारातियों का पलायन और दूल्हे की ‘हिरासत’

​दुल्हन द्वारा शादी से इनकार किए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। अपनी फजीहत होते देख और ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को भांपते हुए बाराती पक्ष के अधिकांश लोग धीरे-धीरे मौके से भाग निकले। हालांकि, ग्रामीणों ने नशे में धुत दूल्हे छोटू कुमार को अपने कब्जे में ले लिया और इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करने लगे।

​विवाह की रस्में अधूरी रह गईं और खुशियों वाला घर बहस और पंचायती का केंद्र बन गया। ग्रामीणों का तर्क था कि अगर आज इस तरह के व्यवहार को स्वीकार कर लिया गया, तो समाज में गलत संदेश जाएगा। काफी हंगामे और मान-मनौव्वल के बाद, अंततः बिना शादी के ही दूल्हा को वापस लौटना पड़ा। दुल्हन के पिता वीरेंद्र राम ने भी अपनी बेटी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि वे अपनी बेटी को किसी नरक में नहीं धकेल सकते।

समाज के लिए एक मिसाल: गंधार मठ में नेहा को मिली शाबाशी

​इस घटना के बाद गंधार मठ और आसपास के गांवों में नेहा कुमारी के साहस की जमकर चर्चा हो रही है। लोग काफी संख्या में वीरेंद्र राम के घर पहुँच रहे हैं और नेहा को शाबाशी दे रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि नेहा ने जो साहस दिखाया है, वह गांव की बाकी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है। अक्सर ग्रामीण समाज में लड़कियां सामाजिक दबाव और लोक-लाज के भय से ऐसे मुद्दों पर चुप रह जाती हैं, जिसका खामियाजा उन्हें पूरी उम्र भुगतना पड़ता है।

घटना के मुख्य बिंदु:

  • दिनांक: 26 अप्रैल 2026, रविवार की रात्रि।
  • स्थान: गंधार मठ गांव, मोदनगंज प्रखंड, घोसी।
  • दुल्हन: नेहा कुमारी, पिता वीरेंद्र राम।
  • दूल्हा: छोटू कुमार, निवासी पुनाइचक, पटना।
  • कारण: दूल्हे का शराब के नशे में मंडप तक पहुँचना।

शराबबंदी और सामाजिक चेतना: वॉयस ऑफ बिहार (VOB) का विश्लेषण

​बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि केवल कानून बना देने से सामाजिक बुराइयां खत्म नहीं होतीं, इसके लिए नेहा जैसी बेटियों की जागरूकता और साहस की अधिक आवश्यकता है। जब तक समाज नशेड़ी व्यक्तियों को इस तरह से बहिष्कृत नहीं करेगा, तब तक यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी। नेहा कुमारी ने जयमाला फेंककर न केवल अपनी गरिमा की रक्षा की, बल्कि उन तमाम लड़कियों को आवाज दी है जो घरेलू हिंसा और नशेड़ी पतियों के आतंक को सहने के लिए मजबूर हैं।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क इस साहसी कदम की सराहना करता है। यह घटना शासन-प्रशासन के लिए भी एक संकेत है कि शराब की उपलब्धता पर और कड़ाई से लगाम लगाने की जरूरत है, ताकि किसी और बेटी की खुशियां इस तरह मंडप में न उजड़ें।

वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष रिपोर्ट।

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