
भागलपुर। जगदीशपुर में आयोजित श्री श्री 1008 श्री लक्ष्मी नारायण पंचकुंड महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का सातवां दिन भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। व्यास पीठाधिपति परम पूज्य बालक स्वामी श्री केशवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में चल रहे इस महायज्ञ में रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां रुक्मणी विवाह की मनमोहक झांकी ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
महायज्ञ के सातवें दिन कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के दिव्य विवाह प्रसंग की अत्यंत भावपूर्ण व्याख्या की गई। कथा वाचन के साथ-साथ जब इस प्रसंग को जीवंत झांकी के रूप में प्रस्तुत किया गया, तो वहां उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। झांकी में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का दृश्य इतनी सुंदरता और सजीवता के साथ प्रस्तुत किया गया कि दर्शकों की आंखें श्रद्धा और आनंद से भर उठीं।
मुरादाबाद से आए कलाकार राहुल और उनके दल ने इस झांकी को बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत विभिन्न धार्मिक झांकियों ने पूरे आयोजन में चार चांद लगा दिए। झांकी की सजावट, वेशभूषा, संगीत और अभिनय का ऐसा समन्वय देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और पूरे वातावरण में जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी।
यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायज्ञ का विधिवत आयोजन जारी रहा। आचार्य बीरबल मंडल, नीरज पंजियारा, अशोक साह, चंदन कुमार, रतन कुमार और गोपाल साह ने पूरे विधि-विधान से यज्ञ में आहुति अर्पित की। मंत्रों की गूंज और हवन कुंड से उठती पवित्र अग्नि ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
इसके साथ ही यज्ञशाला परिसर में बने राम दरबार में निरंतर रामधुन का आयोजन भी चलता रहा। भजन-कीर्तन और राम नाम के जाप से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग लेते नजर आए और भगवान के नाम में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते रहे।
आचार्य तुलसी यादव ने पंडित प्रह्लाद झा के मंत्रोच्चार के साथ सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन कराया। इस दौरान पूरे परिसर में शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रों की गूंज से एक दिव्य वातावरण का सृजन हुआ। श्रद्धालु इस पवित्र क्षण के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे।
महायज्ञ के सातवें दिन की भव्यता और आयोजन की दिव्यता ने श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था और श्रद्धा का संचार किया। कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों ने इसे एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक जागरूकता का संचार करते हैं।
इस महायज्ञ में हर दिन अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और जीवन के मूल्यों के बारे में ज्ञान प्राप्त हो रहा है। कथा के माध्यम से लोगों को भगवान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जा रही है।
जगदीशपुर में आयोजित यह महायज्ञ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का भी प्रतीक बन गया है। यहां विभिन्न क्षेत्रों से आए लोग एक साथ बैठकर भक्ति में लीन हो रहे हैं, जो समाज में भाईचारे और सद्भावना को मजबूत करता है।
आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं भी की गई हैं। प्रसाद वितरण, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे लोग बिना किसी परेशानी के कार्यक्रम का आनंद ले सकें।
महायज्ञ के आगामी दिनों में भी इसी तरह के धार्मिक कार्यक्रम और झांकियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को और अधिक आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। आयोजकों का कहना है कि इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य लोगों में धर्म के प्रति आस्था बढ़ाना और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाना है।
कुल मिलाकर, महायज्ञ का सातवां दिन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। रुक्मणी विवाह की झांकी ने जहां लोगों को भाव-विभोर किया, वहीं वैदिक अनुष्ठानों और भक्ति कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी सफल और यादगार बना दिया।


