
पटना। बिहार की प्रशासनिक मशीनरी में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़े नीतिगत बदलाव का एलान किया है। अब राज्य के दूर-दराज के इलाकों में स्थित प्रखंड कार्यालयों, अंचलों और पुलिस थानों की गतिविधियों पर पटना स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से सीधी नजर रखी जाएगी। शुक्रवार को बिहार विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि निचले स्तर पर होने वाली किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या आम जनता की हकमारी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने न केवल अपनी भविष्य की कार्ययोजना पेश की, बल्कि विपक्षी खेमे, विशेषकर लालू प्रसाद के परिवार पर तीखा हमला बोलकर सदन के भीतर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी। विश्वासमत जीतने के बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री का तेवर काफी हमलावर रहा, जहाँ उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के संघर्षों से लेकर बिहार के विकास के रोडमैप तक की विस्तृत चर्चा की।
निचले स्तर के प्रशासन पर ‘सुपर विजन’: बिचौलिया संस्कृति पर प्रहार
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान जिस सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार का जिक्र किया, वह है प्रखंड और थानों की मॉनिटरिंग। अक्सर यह शिकायतें आती रही हैं कि जनता के सबसे करीब के ये प्रशासनिक केंद्र ही भ्रष्टाचार और लापरवाही का अड्डा बन जाते हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि अब इन केंद्रों की जवाबदेही सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रति होगी।
डिजिटल गवर्नेंस और रियल-टाइम फीडबैक के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आम आदमी को जाति, आवासीय या आय प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने तक के लिए किसी बिचौलिए या अवैध वसूली का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि गड़बड़ी करने वालों के लिए मौजूदा सरकार में कोई जगह नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नीतीश कुमार की दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट समर्थन के कारण इस पद पर पहुँचे हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य बिहार के शासन तंत्र को ‘जन-केंद्रित’ बनाना है।
सियासी संघर्ष की दास्तान: लालू प्रसाद के ‘अत्याचार’ पर पलटवार
सम्राट चौधरी ने सदन में अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए भावुक और आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने अपनी राजनीति में आने की मुख्य वजह लालू प्रसाद के शासनकाल में हुए कथित अत्याचारों को बताया। उन्होंने कहा, “अगर लालू प्रसाद ने मेरे और मेरे परिवार के साथ अन्याय नहीं किया होता, तो शायद मैं राजनीति में होता ही नहीं। मेरा रास्ता राजनीति से बिल्कुल अलग होता।”
मुख्यमंत्री ने एक पुराना और गंभीर आरोप दोहराते हुए कहा कि लालू प्रसाद ने उन्हें और उनके 22 रिश्तेदारों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल के पीछे डाल दिया था। सम्राट चौधरी ने उस ऐतिहासिक घटना का भी जिक्र किया जब पटना के मिलर स्कूल मैदान में आयोजित एक राजनीतिक समारोह के दौरान लालू प्रसाद ने सार्वजनिक रूप से इस गलती के लिए माफी मांगी थी। उन्होंने विपक्ष को याद दिलाया कि उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्ष की आग में तपकर बनी है, इसलिए वे किसी भी व्यक्तिगत हमले से डलने वाले नहीं हैं।
तेजस्वी यादव को नसीहत: “सम्मान पर उपदेश न दें”
सदन के भीतर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी ने उन्हें निजी हमलों से बचने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने तल्ख लहजे में कहा कि जो व्यक्ति अपने परिवार और अपनी बहन का घर के भीतर सम्मान सुनिश्चित नहीं कर सकता, उसे दूसरों को सम्मान और नैतिकता पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष की ओर से निजी हमले जारी रहे, तो उन्हें भी उसी भाषा में जवाब सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। मुख्यमंत्री का यह बयान पिछले कुछ दिनों से चल रहे वाकयुद्ध के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहाँ दोनों पक्षों की ओर से व्यक्तिगत मर्यादाओं को लांघा गया था। सम्राट चौधरी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे सदन की गरिमा का सम्मान करते हैं, लेकिन अन्यायपूर्ण हमलों का जवाब देना भी जानते हैं।
इतिहास का आईना: “बिना भाजपा के कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाते लालू”
लालू प्रसाद के ‘आरएसएस’ और ‘भाजपा’ विरोधी स्टैंड पर तंज कसते हुए सम्राट चौधरी ने इतिहास के पन्ने पलटे। उन्होंने कहा कि आज जो लोग भाजपा को कोस रहे हैं, वे भूल गए कि लालू प्रसाद ने पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के कंधों पर चढ़कर ही पाई थी। उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद ने खुद आरएसएस और भाजपा के सामने घुटने टेके थे। अगर भाजपा का समर्थन नहीं मिलता, तो वे कभी बिहार की सत्ता पर काबिज नहीं हो पाते।”
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि लालू प्रसाद को नेता बनाने में नीतीश कुमार की बड़ी भूमिका रही है। नीतीश कुमार के सहयोग और समर्थन के बिना लालू प्रसाद का मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन था। सम्राट चौधरी ने कहा कि जो लोग दूसरों की मदद से सत्ता के शीर्ष तक पहुँचे, वे आज उन लोगों को नसीहत दे रहे हैं जिन्होंने अपनी पूरी राजनीति सिद्धांतों और संगठन के बल पर की है। उन्होंने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा कि वे समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से रहे हैं, इसलिए उनकी जड़ें हमेशा से लालू विरोध और बिहार के विकास से जुड़ी रही हैं।
बिहार का भविष्य: स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग पर केंद्रित रोडमैप
अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जो आने वाले समय में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कागजी दावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर बड़े बदलाव दिखेंगे।
विकास की मुख्य प्राथमिकताएं:
- स्वास्थ्य सेवा: राज्य के हर जिले में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाना और रेफरल अस्पतालों की स्थिति में सुधार करना।
- शिक्षा का आधुनिकीकरण: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और पठन-पाठन की गुणवत्ता को बढ़ाना।
- औद्योगिक क्रांति: बिहार में निवेश के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना ताकि युवाओं को राज्य से बाहर पलायन न करना पड़े।
- आधारभूत संरचना: सड़कों, पुलों और शहरी विकास के प्रोजेक्ट्स को समय सीमा के भीतर पूरा करना।
- पारदर्शिता: हर सरकारी योजना का लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी कटौती के पहुँचाना।
सुशासन का नया संकल्प
अंततः, सम्राट चौधरी का सदन में दिया गया यह भाषण यह स्पष्ट करता है कि बिहार की नई सरकार केवल सत्ता के संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह प्रशासनिक सुधारों की एक नई लहर लाने की तैयारी में है। प्रखंड और थानों की सीधी निगरानी का फैसला भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार साबित हो सकता है।
विपक्ष पर किए गए तीखे प्रहारों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दे दिया है कि वे आने वाले चुनावों तक राजनीतिक मोर्चे पर भी पूरी तरह सक्रिय रहेंगे। भाजपा और जदयू के इस गठबंधन में सम्राट चौधरी का आक्रामक रुख समर्थकों में नई ऊर्जा भरने का काम कर रहा है। अब चुनौती इन वादों को हकीकत में बदलने की है, ताकि बिहार की जनता को वास्तव में उस ‘सुशासन’ का अनुभव हो सके जिसका दावा मुख्यमंत्री कार्यालय से किया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की यह ‘सीधी नजर’ बिहार की सड़कों और दफ्तरों में कितना बदलाव ला पाती है।


