​नाथनगर में ‘पति-पत्नी और वो’ का खौफनाक अंत: प्रेमी की मौत और प्रेमिका सुरक्षित; जहरीले खेल की दास्तां या सोची-समझी साजिश?

भागलपुर। बिहार के रेशम नगरी भागलपुर के नाथनगर थाना क्षेत्र में ‘अवैध’ और ‘जटिल’ रिश्तों के त्रिकोण ने एक ऐसा रक्तरंजित अध्याय लिखा है, जिसने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया है। नाथनगर के हरिदासपुर गाँव में गुरुवार की शाम जो कुछ भी हुआ, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था, लेकिन इसका अंत वास्तविक और बेहद दर्दनाक रहा। एक विवाहिता का अपने प्रेमी के प्रति ‘अंधा मोह’ और उसके पहले पति की अपने अधिकार की मांग ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जहाँ ‘मौत’ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया। शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को पुलिस द्वारा दर्ज किए गए बयानों ने इस मामले की परतों को उधेड़ना शुरू कर दिया है। इस घटना में प्रेमी की मौत हो गई है, जबकि उसकी प्रेमिका (जो पहले से शादीशुदा है) बिल्कुल सुरक्षित है। इस विरोधाभासी परिणाम ने अब मामले को ‘आत्महत्या के प्रयास’ से हटाकर ‘संदेह’ के दायरे में खड़ा कर दिया है। मृतक के परिजनों का सीधा आरोप है कि यह मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित खेल है जिसमें उनके बेटे की जान चली गई।

हरिदासपुर की वो मनहूस शाम: जब रिश्तों में घुला जहर

​घटनाक्रम की शुरुआत गुरुवार को तब हुई जब नाथनगर के हरिदासपुर निवासी भरत कुमार के घर पर लैलख निवासी मनोज मंडल पहुँचा। मनोज, कंचन देवी का पहला पति है। कंचन पिछले कुछ समय से मनोज को छोड़कर अपने प्रेमी भरत के साथ रह रही थी। मनोज का उद्देश्य स्पष्ट था—वह अपनी पत्नी कंचन को वापस अपने साथ ले जाने आया था। भरत के घर पर ही मनोज, कंचन और भरत के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद इस बात पर था कि कंचन किसके साथ रहेगी।

​जैसे-जैसे बहस बढ़ी, कंचन ने एक चरम कदम उठाने की धमकी दी। उसने कहा कि अगर उसे मजबूर किया गया, तो वह अपनी जान दे देगी। इसी बीच जहरीला पदार्थ निकाला गया। कंचन ने उसे अपने मुँह में डाला और देखते ही देखते भरत ने भी वही जहरीला पदार्थ निगल लिया। आनन-फानन में दोनों को नाथनगर थाना ले जाया गया, जहाँ से पुलिस की निगरानी में उन्हें मायागंज अस्पताल (JLNMCH) भेजा गया। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था; इलाज के दौरान गुरुवार की शाम को ही भरत की सांसें थम गईं, जबकि कंचन की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और वह अब खतरे से बाहर है।

रिश्तों का उलझा ताना-बाना: 10 साल की शादी और गुजरात का पलायन

​इस पूरी त्रासदी की जड़ें काफी गहरी और पेचीदा हैं। मृतक भरत कुमार का वैवाहिक इतिहास भी किसी विवाद से कम नहीं था। भरत के पिता चानो मंडल ने पुलिस को बताया कि भरत ने करीब 10 साल पहले नाथनगर के ही अजमेरीपुर की रहने वाली लूसी कुमारी से प्रेम विवाह किया था। उस शादी से उनके दो बच्चे भी हैं, जो आज अनाथ जैसी स्थिति में पहुँच गए हैं।

​हालाँकि, भरत की जिंदगी में कंचन देवी के आने के बाद सब कुछ बदल गया। कंचन भी पहले से शादीशुदा थी और उसके पति का नाम मनोज मंडल है। कंचन और भरत के बीच प्रेम संबंध इतने प्रगाढ़ हो गए कि दोनों ने अपने-अपने परिवारों को छोड़ने का फैसला किया और प्रेम विवाह कर लिया। सामाजिक लोकलाज और कानूनी झमेलों से बचने के लिए दोनों भागलपुर छोड़कर गुजरात चले गए थे। पिछले कई महीनों से वे वहीं रह रहे थे, लेकिन मात्र 10 दिन पहले ही वे वापस अपने घर हरिदासपुर लौटे थे। उन्हें क्या पता था कि घर वापसी का यह फैसला भरत की जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगा।

विरोधाभासी बयान: ‘जीभ पर घसना’ बनाम ‘जहर निगलना’

​भरत की मौत के बाद अस्पताल में जो बयान दर्ज किए गए हैं, वे इस मामले को और अधिक उलझा रहे हैं। मृतक के पिता चानो मंडल ने मायागंज अस्पताल में पुलिस के समक्ष जो फर्द बयान दिया है, उसमें उन्होंने कंचन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चानो मंडल का कहना है कि यह ‘दोहरा आत्महत्या’ का प्रयास केवल एक दिखावा था। उनके अनुसार, कंचन ने चालाकी दिखाते हुए जहरीले पदार्थ को केवल अपनी जीभ पर घसा था और नाटक किया, जबकि उनके बेटे भरत ने कंचन के प्रति अपनी निष्ठा साबित करने के चक्कर में जहर को वास्तव में निगल लिया।

​दूसरी ओर, कंचन देवी की दलील बिल्कुल अलग है। कंचन का कहना है कि उसने भी जहर खाया था, लेकिन जहर खाने के तुरंत बाद वह जमीन पर गिर पड़ी। कंचन का दावा है कि गिरने के कारण उसके मुँह से जहरीला पदार्थ बाहर निकल गया (उल्टी या थूक के माध्यम से), जिससे उसकी जान बच गई। लेकिन भरत ने उसे पूरी तरह निगल लिया था, जिससे उसके शरीर के आंतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया। पिता और प्रेमिका के बयानों के बीच का यह अंतर ही अब पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु है। क्या कंचन ने भरत को उकसाया था? क्या उसने जहर खाने का केवल स्वांग रचा था? ये सवाल अब हरिदासपुर की गलियों में गूँज रहे हैं।

पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी पेचीदगियां

​नाथनगर थानेदार इंस्पेक्टर राजीव रंजन ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि पुलिस पूरी संवेदनशीलता के साथ साक्ष्य जुटा रही है। फिलहाल पुलिस को अस्पताल से फर्द बयान की आधिकारिक कॉपी मिलने का इंतजार है। जैसे ही कागजी कार्रवाई पूरी होगी, बयान के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। पुलिस यह भी जांच रही है कि जिस जहरीले पदार्थ का सेवन किया गया, वह क्या था और उसकी उपलब्धता कहाँ से हुई।

​इस मामले में ‘उकसावे’ (Abetment to Suicide) की धारा के तहत कार्रवाई होने की संभावना प्रबल है। यदि यह साबित होता है कि कंचन ने भरत को जहर खाने के लिए मानसिक रूप से मजबूर किया या उसे झांसे में रखकर खुद बचने की योजना बनाई, तो उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही, कंचन के पहले पति मनोज मंडल की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जिसके आने के बाद ही विवाद शुरू हुआ था।

एक परिवार की बर्बादी और सामाजिक संदेश

​भरत की मौत ने एक बार फिर उन सामाजिक बुराइयों और रिश्तों की अस्थिरता को उजागर किया है, जो डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रही हैं। एक तरफ भरत की पहली पत्नी लूसी और उसके दो मासूम बच्चे हैं, जिनका भविष्य अब अनिश्चित है। दूसरी तरफ कंचन और मनोज का टूटा हुआ रिश्ता है।

​हरिदासपुर के ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अवैध संबंधों का अंजाम हमेशा ऐसा ही खौफनाक होता है। भरत, जिसने अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर कंचन को अपनाया, उसे अंततः अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी। पिता चानो मंडल की बेबसी और उनके आरोप समाज के उस दर्द को बयां कर रहे हैं, जहाँ एक पिता अपने बेटे की बलि चढ़ते हुए देख रहा है।

विशेषज्ञों की राय और फॉरेंसिक जांच की आवश्यकता

​इस मामले में केवल बयानों पर निर्भर रहना पुलिस के लिए जोखिम भरा हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘जीभ पर घसने’ और ‘निगलने’ के प्रभाव शरीर पर अलग-अलग तरह से दिखते हैं। कंचन के मुँह और गले की मेडिकल जांच यह स्पष्ट कर सकती है कि क्या वास्तव में उसने जहर का सेवन किया था या केवल बाहरी लेप लगाकर भ्रम पैदा किया गया। भरत के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट (विसेरा जांच सहित) यह बताएगी कि जहर की मात्रा कितनी घातक थी और उसने शरीर पर कितनी तेजी से असर किया।

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