बिहार में डिजिटल जनगणना का ‘महाअभियान’: 20 लाख से अधिक परिवारों ने दिखाई सक्रियता; स्व-गणना में वैशाली अव्वल, पटना पांचवें पायदान पर

पटना। भारत की आगामी ‘जनगणना 2027’ की नींव आज बिहार में डिजिटल क्रांति के माध्यम से मजबूती से रखी जा रही है। राज्य में 17 अप्रैल से शुरू हुए स्व–गणना (Self Enumeration) अभियान ने अपनी शुरुआती अवधि में ही अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। शनिवार, 25 अप्रैल 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 20 लाख 19 हजार 950 परिवार इस डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल राज्य की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बिहार की जनता अब सरकारी प्रक्रियाओं में सीधा और सक्रिय योगदान देने के लिए तैयार है। स्व–गणना की यह प्रक्रिया नागरिकों को उनके मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने की सुविधा देती है, जिससे डेटा की सटीकता और गोपनीयता सुनिश्चित होती है। प्रशासन के अनुसार, अब तक कुल 18 लाख 98 हजार 139 परिवारों ने अपनी गणना प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि 1,21,811 परिवार वर्तमान में इस प्रक्रिया को पूरा करने में जुटे हैं।

डिजिटल साक्षरता का प्रमाण: वैशाली और मधुबनी ने रचा इतिहास

​स्व–गणना अभियान के आंकड़ों ने जिलावार प्रतिस्पर्धा और जनभागीदारी की एक रोचक तस्वीर पेश की है। पूरे राज्य में वैशाली जिला इस समय डिजिटल जनगणना के मामले में निर्विवाद रूप से शीर्ष पर बना हुआ है। वैशाली में कुल 3,55,447 परिवारों ने स्व–गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कराई है। इसके ठीक पीछे मधुबनी जिला है, जहाँ 3,40,804 परिवारों ने इस अभियान में हिस्सा लिया है।

​दिलचस्प बात यह है कि खगड़िया और भोजपुर जैसे जिलों ने भी बड़ी छलांग लगाई है। खगड़िया 1,18,120 परिवारों के साथ तीसरे और भोजपुर 1,04,879 परिवारों के साथ चौथे स्थान पर है। राजधानी पटना इस सूची में 91,547 परिवारों के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गया है, जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण और अन्य जिला मुख्यालयों में डिजिटल जागरूकता का प्रसार शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी तेजी से हो रहा है।

स्व-गणना: सुगम, पारदर्शी और सटीक डिजिटल समाधान

​स्व–गणना अभियान जनगणना की उस पारंपरिक और बोझिल प्रक्रिया को बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जहाँ प्रगणक बार-बार घर आते थे और जानकारी नोट करते थे। इस नई व्यवस्था के कई प्रमुख लाभ हैं:

  • त्रुटिहीन डेटा: नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करते हैं, जिससे नाम, उम्र और अन्य विवरणों में गलती की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
  • समय की बचत: नागरिकों को प्रगणकों के आने का इंतजार नहीं करना पड़ता; वे अपनी सुविधानुसार किसी भी समय पोर्टल पर जाकर डेटा फीड कर सकते हैं।
  • गोपनीयता: डिजिटल पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी सीधे केंद्रीय डेटाबेस में सुरक्षित होती है, जिससे डेटा के गलत हाथों में जाने का जोखिम खत्म हो जाता है।

​विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस बार जिस तरह से लोगों ने खुद बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, उससे यह स्पष्ट है कि बिहार ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को धरातल पर उतारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

अगला चरण: 2 मई से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक

​स्व–गणना की यह विशेष सुविधा 01 मई 2026 तक ही उपलब्ध है। प्रशासन ने अपील की है कि जिन परिवारों ने अब तक अपनी जानकारी दर्ज नहीं की है, वे एसई (Self Enumeration) पोर्टल पर जाकर इसे जल्द पूरा कर लें। इसके तुरंत बाद, यानी 02 मई से 31 मई 2026 तक राज्य में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य शुरू होगा।

​इस चरण में प्रगणक (Enumerators) भौतिक रूप से प्रत्येक घर तक पहुँचेंगे। जिन नागरिकों ने स्व–गणना पूरी कर ली है, उन्हें केवल अपना एसई आईडी (SE ID) प्रगणक को उपलब्ध कराना होगा। इससे प्रगणक का काम आसान हो जाएगा और आपके डेटा का मिलान तुरंत हो जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्व–गणना करने से भविष्य में होने वाली भौतिक गणना की प्रक्रिया अत्यंत सुगम और सटीक हो जाएगी।

स्व-गणना में बिहार के टॉप 10 जिले: एक नजर में

​बिहार के विभिन्न जिलों में स्व-गणना को लेकर जो उत्साह देखा गया है, उसकी सूची नीचे दी गई है। यह आंकड़े 24 अप्रैल की शाम तक के हैं:

जिला

परिवार (जिन्होंने स्व-गणना की)

वैशाली

3,55,447

मधुबनी

3,40,804

खगड़िया

1,18,120

भोजपुर

1,04,879

पटना

91,547

गोपालगंज

85,699

औरंगाबाद

71,644

पश्चिम चंपारण

67,460

दरभंगा

63,102

रोहतास

52,720

सफलता के पीछे का तंत्र: व्यापक जागरूकता अभियान

​इस अभियान की सफलता के पीछे जिला प्रशासन और सांख्यिकी विभाग का व्यापक जागरूकता कार्यक्रम रहा है। राज्य भर में होर्डिंग्स, सोशल मीडिया कैंपेन और स्थानीय स्तर पर लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को स्व-गणना के फायदों के बारे में बताया गया। वैशाली और मधुबनी जैसे जिलों में जिलाधिकारियों ने स्वयं इसकी मॉनिटरिंग की और स्कूलों व पंचायतों के माध्यम से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई।

​विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं ने अपने स्मार्टफोन के माध्यम से अपने परिवार और पड़ोसियों की गणना करने में मदद की, जिसने इस आंकड़े को 20 लाख के पार पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई। तकनीकी स्तर पर भी एसई पोर्टल को काफी सरल बनाया गया है, ताकि कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से अपनी जानकारी भर सकें।

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