
बांका/बेलहर। बिहार के सीमावर्ती जिलों में अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बांका जिले के बेलहर थाना क्षेत्र में गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की सुबह पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी है, जो पड़ोसी राज्य झारखंड से बिहार के विभिन्न जिलों में हथियारों की खेप पहुँचाने में लगा था। देवघर-सुल्तानगंज मुख्य मार्ग पर ब्लॉक के समीप की गई इस छापेमारी में पुलिस ने एक कार से 66 अर्धनिर्मित पिस्टल बरामद की हैं। यह बरामदगी केवल संख्या के लिहाज से ही बड़ी नहीं है, बल्कि यह पिछले 15 वर्षों में बांका पुलिस द्वारा की गई सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। पुलिस ने न केवल हथियारों का जखीरा जब्त किया, बल्कि मुंगेर के एक शातिर तस्कर को भी रंगे हाथ गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इस बड़ी कामयाबी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में अर्धनिर्मित हथियारों का मिलना एक बड़े ‘मिनी गन फैक्ट्री’ सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है।
अलसुबह की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 5:00 बजे का सफल ऑपरेशन
हथियार तस्करी के खिलाफ इस मिशन की शुरुआत एक गुप्त सूचना के साथ हुई थी। पुलिस को जानकारी मिली थी कि झारखंड के रास्ते हथियारों की एक बड़ी खेप खगड़िया की ओर ले जाई जा रही है। बेलहर पुलिस ने बिना समय गंवाए देवघर-सुल्तानगंज मुख्य मार्ग पर जाल बिछाया। गुरुवार की सुबह करीब 5:00 बजे, जब सड़कों पर कोहरे और अंधेरे का असर था, तब पुलिस ने ब्लॉक के पास एक संदिग्ध कार को रुकने का इशारा किया।
पुलिस को देखकर कार चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया। जब कार की गहन तलाशी ली गई, तो पुलिस अधिकारियों की आँखें फटी रह गईं। कार के भीतर गुप्त खानों और सीटों के नीचे छिपाकर रखी गई 66 अर्धनिर्मित पिस्टल बरामद हुईं। ये पिस्टल अभी पूरी तरह तैयार नहीं थीं, जिन्हें ‘फिनिशिंग’ के लिए मुंगेर या खगड़िया ले जाया जा रहा था। पुलिस ने तुरंत कार को जब्त कर लिया और चालक को हिरासत में ले लिया।
मुंगेर का कनेक्शन और तस्कर की गिरफ्तारी
पकड़े गए हथियार तस्कर की पहचान मुंगेर जिला अंतर्गत रायसर निवासी गौतम रजक (पिता स्वर्गीय धनेश्वर रजक) के रूप में हुई है। मुंगेर ऐतिहासिक रूप से अवैध हथियारों के निर्माण का गढ़ रहा है, और गौतम रजक का वहां से जुड़ा होना इस बात की पुष्टि करता है कि यह एक पेशेवर गिरोह का काम है।
प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि गौतम रजक केवल एक चालक नहीं, बल्कि इस अंतरराज्यीय गिरोह का एक महत्वपूर्ण ‘कैरियर’ है। वह झारखंड के अवैध निर्माण केंद्रों से इन अर्धनिर्मित पिस्टलों को उठाकर बिहार के उन इलाकों में पहुँचाने का काम करता था, जहाँ इन्हें अंतिम रूप देकर अपराधियों को बेचा जाता है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि गौतम रजक पहले कितनी बार इस तरह की खेप पहुँचा चुका है और उसके गिरोह के सरगना कौन हैं। मुंगेर पुलिस से भी गौतम के आपराधिक इतिहास की जानकारी साझा की गई है।
झारखंड से खगड़िया: तस्करी का नया ‘सेफ रूट’
इस बरामदगी ने तस्करी के एक नए और रणनीतिक मार्ग का पर्दाफाश किया है। तस्कर अब मुख्य राजमार्गों (Highways) के बजाय लिंक रोड और जिला मार्गों का उपयोग कर रहे हैं।
- झारखंड कनेक्शन: पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का निर्माण झारखंड के सुदूर जंगलों या पहाड़ी इलाकों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों में हुआ है।
- खगड़िया गंतव्य: खगड़िया को हथियारों के वितरण का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा था। यहाँ से इन पिस्टलों को गंगा के दियारा क्षेत्रों के अपराधियों तक पहुँचाने की योजना थी।
- बांका का ट्रांजिट पॉइंट: देवघर-सुल्तानगंज मार्ग का उपयोग पुलिस की नजरों से बचने के लिए किया गया, क्योंकि आमतौर पर इस मार्ग पर कांवड़ियों और आम यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है, जिससे चेकिंग का दबाव कम रहता है।
बेलहर पुलिस की मुस्तैदी ने तस्करों के इस ‘सेफ रूट’ के भ्रम को तोड़ दिया है। एसडीपीओ ने बताया कि गिरफ्तार तस्कर से पूछताछ में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं, जो खगड़िया और मुंगेर के बड़े सफेदपोश अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं।
15 साल का रिकॉर्ड टूटा: बेलहर पुलिस की ऐतिहासिक उपलब्धि
बेलहर और बांका जिले के लिए यह बरामदगी एक बड़ी उपलब्धि है। विदित हो कि बेलहर में करीब 15 वर्ष बाद पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में अवैध हथियार पकड़े हैं। इससे पहले वर्ष 2010 और उसके आसपास के समय में हथियार तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाइयां हुई थीं, लेकिन एक साथ 66 पिस्टल का मिलना हाल के वर्षों की सबसे बड़ी रिकवरी है।
इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस का खुफिया तंत्र अब अपराधियों से एक कदम आगे चल रहा है। 2010 के बाद से हथियार तस्करों ने अपने तौर-तरीके बदल लिए थे। वे अब छोटे-छोटे पैकेट के बजाय एक साथ बड़ी खेप भेजने का जोखिम उठा रहे हैं, जिसे ‘बल्क सप्लाई’ कहा जाता है। 66 अर्धनिर्मित पिस्टलों का मतलब है कि अपराधी किसी बड़ी घटना की तैयारी में थे या फिर बाजार में हथियारों की मांग अचानक बढ़ गई है।
अर्धनिर्मित पिस्टल: क्यों है यह खतरनाक?
हथियार विशेषज्ञों के अनुसार, ‘अर्धनिर्मित’ (Semi-finished) हथियारों की तस्करी अधिक सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इन्हें ले जाते समय पकड़े जाने पर तस्कर अक्सर यह तर्क देते हैं कि ये केवल ‘लोहे के पुर्जे’ हैं। लेकिन तकनीक के स्तर पर ये पिस्टल लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक तैयार होती हैं।
- आसान फिनिशिंग: मुंगेर के कारीगर इन पिस्टलों को महज कुछ घंटों में पूरी तरह कार्यक्षम (Functional) बना देते हैं।
- पहचान में मुश्किल: इन पर कोई सीरियल नंबर या मार्किंग नहीं होती, जिससे अपराध होने के बाद हथियार के स्रोत का पता लगाना नामुमकिन हो जाता है।
- बड़ा मुनाफ़ा: झारखंड में ये पिस्टल बेहद कम कीमत पर खरीदी जाती हैं और बिहार के बाजारों में ‘फिनिशिंग’ के बाद इन्हें दस गुना अधिक दाम पर बेचा जाता है।
एसडीपीओ का बयान और आगामी कार्रवाई
बेलहर एसडीपीओ ने इस पूरी कार्रवाई की निगरानी की और उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शुरुआत है। एसडीपीओ के अनुसार, “गिरफ्तार हथियार तस्कर गौतम रजक से लगातार पूछताछ की जा रही है। हमें उम्मीद है कि इस कड़ी को जोड़कर हम एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर पाएंगे। पुलिस की टीमें मुंगेर और खगड़िया में भी छापेमारी के लिए रवाना की गई हैं।”
पुलिस अब इस कार के मालिक का भी पता लगा रही है और यह जांच रही है कि क्या वाहन के कागजात फर्जी तो नहीं हैं। साथ ही, गौतम रजक के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली जा रही है ताकि उन ‘रिसीवर्स’ तक पहुँचा जा सके जो खगड़िया में इस खेप का इंतजार कर रहे थे। बांका एसपी ने भी इस सफल ऑपरेशन के लिए बेलहर पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।


