
पटना। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बिहार की बदलती राजनैतिक फिजा और जदयू-भाजपा के अटूट रिश्तों पर एक बड़ा बयान देकर देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को एक प्रमुख समाचार चैनल को दिए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में जदयू और भाजपा का गठबंधन केवल सत्ता का समीकरण नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गठबंधन की राजनीति का एक उत्कृष्ट ‘उदाहरण’ है। नितिन नवीन, जो स्वयं बिहार की मिट्टी से निकलकर आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी के शिखर पर पहुँचे हैं, उन्होंने दोनों दलों के बीच की ‘परस्पर सहमति’ और ‘त्याग’ को ऐतिहासिक करार दिया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को बिहार की नवनिर्वाचित सम्राट चौधरी सरकार विधानसभा में अपना विश्वास मत (Floor Test) हासिल करने जा रही है। नितिन नवीन ने विश्वास जताया कि यह गठबंधन न केवल बिहार की विकास यात्रा को नई गति देगा, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए हर एक संकल्प को पूरा करने के लिए ‘अमली जामा’ भी पहनाएगा।
त्याग और समन्वय की मिसाल: जब भाजपा ने बड़ा दिल दिखाया
साक्षात्कार के दौरान नितिन नवीन ने गठबंधन के पुराने दिनों को याद करते हुए उस ‘राजनैतिक उदारता’ का जिक्र किया, जो भारतीय राजनीति में कम ही देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब बिहार में भाजपा संख्या बल के हिसाब से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। राजनैतिक मर्यादा के अनुसार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भाजपा का दावा बनता था, लेकिन गठबंधन धर्म और बिहार के व्यापक हित को सर्वोपरि रखते हुए भाजपा ने नीतीश कुमार को नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे किया।
नितिन नवीन ने गर्व के साथ कहा, “हमने हमेशा गठबंधन की शुचिता पर भरोसा किया है। जब हम बड़े थे, तब हमने नीतीश कुमार का सम्मान किया और उनके नेतृत्व में बिहार को ‘जंगलराज’ से बाहर निकाला। आज इतिहास ने खुद को दोहराया है। जदयू ने वही फैसला लिया जो हमने पहले लिया था। नीतीश कुमार के दूरदर्शी निर्णय और जदयू की सहमति के कारण आज भाजपा को बिहार में नेतृत्व करने और सरकार बनाने का मौका मिला है।” उन्होंने सम्राट चौधरी को बिहार का नया नेता और एनडीए की सामूहिक पसंद बताया, जो राज्य को सुशासन के अगले स्तर पर ले जाएंगे।
इतिहास में दर्ज होगी जदयू-भाजपा की आपसी सहमति
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जदयू और भाजपा के बीच जो राजनैतिक सामंजस्य है, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों ने समय-समय पर यह प्रमाणित किया है कि जब बात राज्य के विकास की हो, तो व्यक्तिगत और दलीय आकांक्षाओं को पीछे छोड़ा जा सकता है।
नितिन नवीन के अनुसार, बिहार लंबे समय से एनडीए और भाजपा के लिए एक ‘आधार क्षेत्र’ रहा है। यहाँ की जनता ने बार-बार इस गठबंधन के विकास मॉडल पर अपनी मुहर लगाई है। उन्होंने कहा, “2025 का विधानसभा चुनाव हमने नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा था, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार और बिहार के उज्ज्वल भविष्य के लिए नीतीश कुमार ने जो निर्णय लिया (राज्यसभा जाने और भाजपा के मुख्यमंत्री का समर्थन करने का), वह उनकी महानता को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि यह गठबंधन केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं है, बल्कि बिहार की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने का एक मिशन है।
विपक्ष पर तीखा प्रहार: “राजद पहले अपनी गिरेबान में झांके”
साक्षात्कार के दौरान नितिन नवीन ने विपक्षी खेमे, विशेषकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने राजद द्वारा गठबंधन पर उठाए जा रहे सवालों को हास्यास्पद बताया। नितिन नवीन ने कहा कि जिस पार्टी का अपना जनाधार पूरी तरह खिसक चुका है और जिसकी राजनीति केवल नकारात्मकता और परिवारवाद पर टिकी है, वह जदयू जैसी बड़ी और जनप्रिय पार्टी पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रखती।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “विपक्षी नेताओं को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपनी गिरेबान में झांकना चाहिए। जनता उनके साथ नहीं खड़ी है, और सदन के भीतर भी उनकी असलियत सबके सामने आ चुकी है। राजद ने बिहार को केवल पिछड़ापन और अराजकता दी थी, जबकि एनडीए ने बिहार को ‘सम्मान’ दिलाया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की हताशा इस बात का प्रमाण है कि वे एनडीए की मजबूती और जनता के अटूट भरोसे से डरे हुए हैं।
2025 के संकल्पों को पूरा करने की प्रतिबद्धता
नितिन नवीन ने बिहार की जनता को आश्वस्त किया कि भले ही नेतृत्व का चेहरा बदला हो, लेकिन 2025 के संकल्प पत्र के वादे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी की सरकार उन सभी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और नीतीश कुमार के रोडमैप का हिस्सा रहे हैं।
नितिन नवीन द्वारा रेखांकित किए गए भविष्य के प्रमुख लक्ष्य:
- विकसित बिहार 2047: राज्य को विकसित भारत के सपने के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ाना।
- रोजगार और कौशल विकास: युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें राज्य के भीतर ही रोजगार के पर्याप्त अवसर प्रदान करना।
- महिला सशक्तिकरण: जीविका दीदियों और महिला सुरक्षा के मॉडल को और अधिक सुदृढ़ करना।
- बुनियादी ढांचा: सड़कों, पुलों और तकनीकी संसाधनों का विस्तार कर बिहार को एक आधुनिक प्रदेश बनाना।
उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि बिहार का हर नागरिक खुद को सुरक्षित और गर्वान्वित महसूस करे।
बिहार से दिल्ली तक का सफर: नितिन नवीन की बढ़ती भूमिका
नितिन नवीन का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में यह साक्षात्कार उनकी बढ़ती राजनैतिक कद का भी परिचायक है। बिहार विधानसभा में लगभग 20 वर्षों तक विधायक रहने और पटना की रग-रग से वाकिफ होने के कारण, उनका दिल्ली में बैठना बिहार के लिए एक ‘प्लस पॉइंट’ साबित हो रहा है। उन्होंने अपनी विधानसभा सीट (बांकीपुर) से इस्तीफा देकर और राज्यसभा जाकर यह संदेश दिया है कि वे अब राष्ट्रीय फलक पर बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
उन्होंने साक्षात्कार में भावुक होते हुए अपने पिता के जीवन के संघर्षों को भी याद किया और कहा कि वे उसी सेवा भाव के साथ पार्टी और देश की सेवा करना चाहते हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा अब बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।


