
पटना। बिहार के राजनैतिक इतिहास में शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 की तारीख एक नए अध्याय की आधिकारिक पुष्टि करने जा रही है। राजधानी पटना के विधानसभा परिसर में आज भारी गहमागहमी के बीच सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार अपना बहुमत साबित करेगी। सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की विशेष कार्यवाही शुरू होगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विश्वासमत का प्रस्ताव पटल पर रखेंगे। यह अग्निपरीक्षा उस राजनैतिक बदलाव की परिणति है जिसने बिहार में लगभग दो दशकों से चले आ रहे ‘नीतीश युग’ के प्रत्यक्ष नेतृत्व को समाप्त कर भाजपा के हाथों में कमान सौंपी है। हालांकि, संख्या बल के आधार पर सरकार को किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मर्यादा और संवैधानिक अनिवार्यता को पूरा करने के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव भी सदन में मौजूद रहेंगे, जो सुशासन की नई और पुरानी परंपराओं के संगम का प्रतीक बने हुए हैं।
11 बजे का वक्त और बहुमत का गणित: विधानसभा में आज क्या होगा?
बिहार विधानसभा का विशेष सत्र आज केवल एक ही एजेंडे के लिए बुलाया गया है—विश्वास मत। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन को संबोधित करेंगे और अपनी सरकार के प्रति विश्वास जताने के लिए प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संक्षिप्त बहस की संभावना है, जिसके बाद मत विभाजन (वोटिंग) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो एनडीए के पास 202 विधायकों का प्रचंड समर्थन प्राप्त है। 243 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए केवल 122 विधायकों की आवश्यकता होती है। ऐसे में सम्राट चौधरी की सरकार के पास सुरक्षित आंकड़े से कहीं अधिक विधायक मौजूद हैं। दूसरी तरफ, राजद और कांग्रेस के नेतृत्व वाला महागठबंधन केवल 41 विधायकों के साथ सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। यह संख्यात्मक अंतर यह स्पष्ट करता है कि आज का फ्लोर टेस्ट महज एक औपचारिकता है, लेकिन यह सरकार को वह वैधानिक शक्ति प्रदान करेगा जिसके बाद वह अपने पूर्ण मंत्रिमंडल का विस्तार और बड़े नीतिगत फैसले ले सकेगी।
नीतीश का ‘त्याग’ और सम्राट का ‘राज्याभिषेक’: कैसे बदली बिहार की तस्वीर?
आज होने वाले फ्लोर टेस्ट की पटकथा 14 अप्रैल 2026 को लिखी गई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया था, जिसे भरने के लिए भाजपा और जदयू ने मिलकर सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगाई। 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और उनके साथ दो अनुभवी मंत्रियों ने उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
यह सत्ता हस्तांतरण बिहार के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार भाजपा ‘बड़े भाई’ की भूमिका में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुई है। नीतीश कुमार ने स्वयं सम्राट चौधरी का समर्थन करते हुए यह संदेश दिया कि वे राज्य के विकास के लिए भाजपा के नेतृत्व को अपना पूरा सहयोग देंगे। आज का विश्वासमत न केवल सम्राट चौधरी की व्यक्तिगत जीत होगी, बल्कि यह उस गठबंधन की मजबूती पर भी मुहर लगाएगा जो नीतीश कुमार के आशीर्वाद से पुष्पित और पल्लवित हो रहा है।
सदन के भीतर का माहौल: विपक्ष की रणनीति और सत्ता पक्ष की मुस्तैदी
भले ही विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है, लेकिन राजद और कांग्रेस के नेता सदन के भीतर अपनी आवाज बुलंद करने की कोशिश करेंगे। विपक्षी खेमे ने संकेत दिया है कि वे सरकार की स्थिरता और वैधानिकता पर सवाल उठाएंगे। हालांकि, विजय कुमार चौधरी जैसे अनुभवी नेताओं ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए का हर एक विधायक एकजुट है और किसी भी प्रकार की ‘टूट-फूट’ की खबरें महज अफवाह हैं।
सत्ता पक्ष ने अपने सभी विधायकों को व्हिप जारी कर सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज सदन में अपने भाषण के दौरान भविष्य की कार्ययोजना और बिहार के विकास का नया रोडमैप भी पेश कर सकते हैं। वे यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि उनकी सरकार केवल ‘चेहरे’ का बदलाव नहीं है, बल्कि यह सुशासन को एक नई गति देने का संकल्प है।
फ्लोर टेस्ट के बाद का रोडमैप: मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी
आज जैसे ही विधानसभा में विश्वासमत हासिल हो जाएगा, सम्राट चौधरी की सरकार को पूर्ण राजनैतिक वैधता मिल जाएगी। इसके तुरंत बाद सबकी नजरें मंत्रिमंडल के विस्तार पर टिक जाएंगी। वर्तमान में मुख्यमंत्री ने खुद 29 विभागों की जिम्मेदारी संभाली हुई है, जो प्रशासनिक कार्यों के बोझ को बढ़ा रही है। राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि मई के पहले सप्ताह में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।
आज का फ्लोर टेस्ट यह भी तय करेगा कि एनडीए के भीतर जदयू और भाजपा के बीच मंत्रालयों का बंटवारा किस अनुपात में होगा। विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव की उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि पुराने प्रशासनिक अनुभवों को नई सरकार में पूरा सम्मान मिलेगा। आज की जीत के बाद सम्राट चौधरी की प्राथमिकता राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाना और रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना होगा।


