​भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा का महा-कवच: मुख्य सचिव ने जयनगर में की हाई-लेवल मीटिंग

मधुबनी/जयनगर। भारत और नेपाल के बीच की खुली सीमाएं जहाँ दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंधों और सांस्कृतिक विरासत की गवाह रही हैं, वहीं बदलते वक्त के साथ ये सीमाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियों का केंद्र भी बन गई हैं। इन चुनौतियों को जड़ से समाप्त करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून का राज स्थापित करने के उद्देश्य से गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को मधुबनी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा के नए मानकों की आधारशिला रखी है। बैठक का मुख्य केंद्र भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाना, अवैध गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण और विभिन्न सुरक्षा व प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना था। मुख्य सचिव के इस दौरे और जयनगर के नेपाली रेलवे स्टेशन के भौतिक निरीक्षण ने यह साफ कर दिया है कि राज्य सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में है।

आधुनिक खतरों पर प्रहार: साइबर फ्रॉड और जाली मुद्रा पर नकेल

​समीक्षा बैठक के दौरान प्रत्यय अमृत ने उन अपराधों पर विशेष चिंता व्यक्त की जो अब तकनीकी रूप से अधिक जटिल हो चुके हैं। जाली भारतीय मुद्रा (FICN) का प्रसार सीमा पार से होने वाला एक पुराना घाव है, लेकिन अब इसके साथ साइबर फ्रॉड, म्यूल खातों (Mule Accounts) का दुरुपयोग और अवैध दूरसंचार गतिविधियों ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई दीवार खड़ी कर दी है। बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि कैसे फर्जी कंपनियां सीमावर्ती क्षेत्रों का उपयोग कर वित्तीय अपराधों को अंजाम दे रही हैं।

​मुख्य सचिव ने इन मामलों की गहन जांच के निर्देश देते हुए कहा कि दोषियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि म्यूल खातों और फर्जी कंपनियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस की विशेष शाखा और साइबर सेल को मिलकर काम करना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासनिक सतर्कता और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

मादक पदार्थों के विरुद्ध ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 5 करोड़ का गांजा जब्त

​सीमावर्ती इलाकों में मादक पदार्थों की तस्करी केवल एक कानूनी समस्या नहीं, बल्कि समाज की जड़ों को खोखला करने वाला जहर है। मुख्य सचिव ने इस पर नकेल कसने के लिए एनडीपीएस (NDPS) एक्ट को और अधिक सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने एक बड़ी सफलता की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले पांच दिनों से जिले में ‘सूखा नशा’ और अन्य मादक पदार्थों के विरुद्ध एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

​इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन ने 1000 किलो गांजा बरामद करने में सफलता हासिल की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए है। मुख्य सचिव ने इस बड़ी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि विधि-व्यवस्था के दृष्टिकोण से सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। उन्होंने डीएम और एसपी को कड़े निर्देश दिए कि अवैध तस्करी में संलिप्त गिरोहों और अवांछित तत्वों को चिन्हित कर उन पर स्पीडी ट्रायल चलाया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाना सुनिश्चित करें।

वाइब्रेंट विलेज: विकास के जरिए सुरक्षा की नई रणनीति

​भारत सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना सीमावर्ती क्षेत्रों के कायाकल्प का एक महा-अभियान है। मधुबनी जिले के 286 गांवों को इस योजना के तहत चयनित किया गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इन गांवों में सभी प्रस्तावित योजनाओं को त्वरित गति से धरातल पर उतारा जाए ताकि ये गांव ‘विकसित भारत’ की श्रेणी में आ सकें।

​एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत अब इन 286 वाइब्रेंट विलेज की पंचायतों में होने वाली ग्राम सभाओं में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के प्रतिनिधि भी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होंगे। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने बताया कि इससे प्रशासन, जनता और सुरक्षा बलों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। मुख्य सचिव ने एसएसबी के अधिकारियों को बॉर्डर पर पैट्रोलिंग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

नेपाली जयनगर रेलवे स्टेशन का जमीनी जायजा

​बैठक के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत स्वयं वरीय अधिकारियों के साथ जयनगर स्थित नेपाली रेलवे स्टेशन पहुँचे। यह स्टेशन भारत और नेपाल के बीच रेल संपर्क का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण केंद्र है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्थाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने विशेष रूप से वहां स्थापित सीसीटीवी कैमरों और उनके कंट्रोल रूम की कार्यक्षमता को परखा।

​मुख्य सचिव ने रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और सुरक्षा जांच की प्रक्रियाओं को और अधिक आधुनिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीमा पर हर आने-जाने वाले पर तकनीक के जरिए नजर रखी जानी चाहिए। सीसीटीवी कैमरों के अधिष्ठापन में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी नहीं होनी चाहिए और इनका कवरेज क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

प्रशासनिक समन्वय और उच्चस्तरीय मौजूदगी

​इस बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसमें शामिल शीर्ष नेतृत्व से लगाया जा सकता है। बैठक में बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, अपर मुख्य सचिव (गृह) अरविंद कुमार चौधरी, पुलिस महानिदेशक (विशेष शाखा एवं एसटीएफ) कुंदन कृष्णन, दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय, मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमारसरोज कुमार ठाकुर उपस्थित थे।

​एसएसबी की ओर से मुजफ्फरपुर क्षेत्रक मुख्यालय के उप महानिरीक्षक गोविंद सिंह भंडारी, 48वीं वाहिनी जयनगर के कमांडेंट खोजा राम लामोर और 18वीं वाहिनी राजनगर के कमान अधिकारी ने बॉर्डर सुरक्षा की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों द्वारा आपसी समन्वय से किए जा रहे कार्यों की सराहना की और इसे निरंतर बनाए रखने पर बल दिया।

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