
भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर में पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे की आड़ में रंगदारी और अवैध वसूली का धंधा चलाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जोगसर थाना क्षेत्र के मानिक सरकार चौक स्थित एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट में ‘मीडिया’ की धौंस दिखाकर संचालक से पैसे ऐंठने पहुंचे पांच फर्जी पत्रकारों को पुलिस ने रंगे हाथ दबोच लिया। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को हुई इस कार्रवाई ने शहर के उन तत्वों को कड़ा संदेश दिया है जो फर्जी पहचान पत्र और कैमरे का डर दिखाकर व्यापारियों को अपना शिकार बनाते हैं। पकड़े गए आरोपियों में शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों के लोग शामिल हैं, जिन्होंने एक संगठित सिंडिकेट बनाकर उगाही का खेल शुरू किया था। वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को मिली गुप्त सूचना पर हुई इस त्वरित छापेमारी ने न केवल एक बड़े ठगी गिरोह का अंत किया, बल्कि शहर के अन्य व्यवसायियों को भी राहत की सांस लेने का मौका दिया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल दो फरार महिला सहयोगियों की तलाश में जुटी है, जिन्होंने इस पूरी साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।
घटनाक्रम: ‘2.0 रेस्टोरेंट’ में पत्रकारिता के नाम पर गुंडागर्दी
मामला जोगसर थाना क्षेत्र के मानिक सरकार चौक का है, जहाँ ‘2.0 रेस्टोरेंट’ नामक प्रतिष्ठान को इन जालसाजों ने अपना निशाना बनाया। दोपहर के वक्त पांच से सात लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, अचानक रेस्टोरेंट में दाखिल हुए। खुद को नामचीन पोर्टल और अखबारों का पत्रकार बताते हुए इन लोगों ने रेस्टोरेंट के संचालन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। संचालक अभिषेक कुमार के अनुसार, ये लोग पत्रकारिता की मर्यादा भूलकर सीधे धमकी पर उतर आए। उन्होंने रेस्टोरेंट की कमियां दिखाने और उसे बंद करवाने का डर दिखाकर मोटी रकम की मांग की।
अभिषेक कुमार ने जब उनकी पहचान और प्रेस कार्ड की सत्यता जाननी चाही, तो आरोपी और अधिक आक्रामक हो गए। उन्होंने अपनी कथित ‘पहुंच’ का हवाला देते हुए अवैध वसूली के लिए दबाव बनाना शुरू किया। सौभाग्य से, इस संदिग्ध गतिविधि की सूचना किसी जागरूक नागरिक या सूत्र के माध्यम से सीधे वरीय पुलिस अधीक्षक को मिल गई। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और बिना समय गंवाए रेस्टोरेंट पर धावा बोलने का निर्देश दिया।
पुलिसिया कार्रवाई: ‘संवाद’ से ‘छापेमारी’ तक का सफर
एसएसपी के निर्देशन में सिटी एसपी (नगर), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (नगर-01) और जोगसर थानाध्यक्ष मंटु कुमार के नेतृत्व में एक सशक्त टीम बनाई गई। पुलिस की टीम जब रेस्टोरेंट पहुँची, तो वहां का नजारा खुद ही सारी कहानी बयां कर रहा था। पुलिस ने देखा कि फर्जी पत्रकार बनकर आए ये लोग संचालक को घेरकर खड़े थे और डराने-धमकाने की प्रक्रिया जारी थी।
पुलिस की टीम को देखते ही आरोपियों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। जब पुलिस ने उनसे पत्रकारिता से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज, संस्था का नियुक्ति पत्र या एक्रेडिटेशन कार्ड मांगा, तो वे बगलें झांकने लगे। उनकी बातों में विरोधाभास और घबराहट ने साफ कर दिया कि वे किसी मीडिया संस्थान से नहीं, बल्कि अपराध की दुनिया से जुड़े लोग हैं। पुलिस ने मौके से पांच पुरुष आरोपियों को हिरासत में ले लिया, जबकि भीड़ और हंगामे का फायदा उठाकर गिरोह में शामिल दो महिलाएं भागने में सफल रहीं।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण: कौन हैं ये ‘खाकी’ और ‘कलम’ के दुश्मन?
पकड़े गए पांचों आरोपी भागलपुर जिले के ही अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं। इनके पास से किसी भी प्रकार की आधिकारिक बरामदगी (नकदी या हथियार) शून्य रही है, लेकिन इनका अपराध ‘मानसिक दबाव’ और ‘पहचान की चोरी’ से जुड़ा है।
गिरफ्तार अपराधियों की सूची:
- गौतम कुमार गर्जना: पिता-कैलाश प्रसाद, निवासी-मुंदीचक, थाना-तिलकामांझी।
- अरविंद कुमार: पिता-बद्री प्रसाद यादव, निवासी-जमालपुर, थाना-शाहकुण्ड।
- अजय कुमार: पिता-इन्द्रदेव यादव, निवासी-आदमपुर, थाना-जोगसर।
- संजीव मिश्रा: पिता-विवेकानंद मिश्रा, निवासी-सबौर, थाना-सबौर।
- समीम उल्लाह: पिता-फकरूद्दीन, निवासी-सिमरिया, थाना-कजरैली।
इन आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे छोटे-मोटे विवादों को तूल देकर या नियमों की आड़ में दुकानदारों को डराकर पैसे ऐंठते थे। इनका नेटवर्क जिले के कई ग्रामीण इलाकों तक भी फैला होने की आशंका है।
कानूनी प्रक्रिया और फरार महिलाओं की तलाश
रेस्टोरेंट संचालक अभिषेक कुमार के लिखित आवेदन के आधार पर जोगसर थाना में कांड संख्या-87/2026 दर्ज की गई है। पुलिस ने इसमें कुल सात लोगों को नामजद किया है, जिनमें पांच पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। इन पर धोखाधड़ी, जबरन वसूली के लिए डराने-धमकाने और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत मामला चलाया जा रहा है।
थानाध्यक्ष मंटु कुमार ने बताया कि इस गिरोह में महिलाओं का उपयोग ‘हनी ट्रैप’ या भावनात्मक दबाव बनाने के लिए किया जाता था, ताकि दुकानदार इज्जत की खातिर चुपचाप पैसे दे दें। फरार चल रही दोनों महिला अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द वे दोनों भी सलाखों के पीछे होंगी।
बिहार में बढ़ता ‘येलो जर्नलिज्म’ और फर्जी आई-कार्ड का खतरा
भागलपुर की यह घटना एक बड़ी सामाजिक बुराई की ओर इशारा करती है। हाल के दिनों में बिहार के विभिन्न जिलों में ऐसे गिरोह सक्रिय हुए हैं जो महज 100-200 रुपये में फर्जी प्रेस कार्ड छपवाकर खुद को पत्रकार घोषित कर लेते हैं। ये लोग न केवल सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित करते हैं, बल्कि सड़कों पर पुलिस चेकिंग से बचने और छोटे व्यापारियों को लूटने के लिए ‘प्रेस’ के नाम का सहारा लेते हैं।
पत्रकारिता जगत के जानकारों का कहना है कि ऐसे लोग वास्तविक पत्रकारों की छवि को भी नुकसान पहुँचाते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह जिले के सभी सक्रिय पत्रकारों और संस्थानों का एक डिजिटल डेटाबेस सार्वजनिक करे, ताकि आम जनता तुरंत पहचान कर सके कि सामने खड़ा व्यक्ति वास्तव में मीडिया से है या नहीं।
व्यापारियों के लिए पुलिस की अपील
जोगसर पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद भागलपुर के व्यवसायियों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति के दबाव में न आएं जो खुद को मीडियाकर्मी बताकर पैसे की मांग करता है। असली पत्रकार कभी भी समाचार के बदले पैसे नहीं मांगता और न ही किसी को डराता है।
- अगर कोई संदिग्ध पत्रकार आपके प्रतिष्ठान पर आए, तो उससे संस्था का आईडी कार्ड जरूर मांगें।
- किसी भी प्रकार की वसूली की स्थिति में तुरंत स्थानीय थाना या डायल 112 पर सूचना दें।
- किसी भी नियम के उल्लंघन की धमकी देने वाले व्यक्ति से डरे नहीं, बल्कि उसे कानून का पालन करने की चुनौती दें।
सुशासन और सुरक्षा की दिशा में एक कदम
अंततः, जोगसर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने भागलपुर में कानून के शासन को और मजबूत किया है। मंटु कुमार, योगेश कुमार और उनकी टीम की सक्रियता की सराहना व्यवसायी वर्ग में हो रही है। इस गिरफ्तारी से यह संदेश गया है कि खाकी हो या कलम, किसी भी आड़ में अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 5 जालसाजों की गिरफ्तारी तो केवल शुरुआत है, पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क की जड़ें खोदने में जुटी है।
2.0 रेस्टोरेंट के संचालक ने पुलिस की मुस्तैदी पर आभार व्यक्त किया है। यह मामला उन सभी के लिए सबक है जो शॉर्टकट के जरिए और दूसरों की मेहनत की कमाई को लूटकर अमीर बनने का सपना देखते हैं। भागलपुर अब ऐसी ‘सफेदपोश’ गुंडागर्दी के खिलाफ एकजुट हो रहा है।


