
भागलपुर। बिहार की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले भागलपुर के प्रतिष्ठित मारवाड़ी महाविद्यालय में सोमवार को शैक्षणिक शांति की जगह आक्रोश और नारों की गूँज सुनाई दी। अवसर किसी छात्र संघ चुनाव का नहीं, बल्कि अपनी जान की सलामती और बुनियादी अधिकारों की मांग का था। महाविद्यालय परिसर का पारा उस समय चढ़ गया जब बड़ी संख्या में छात्र उग्र होकर प्राचार्य कार्यालय जा पहुँचे और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि जिस छात्रावास में रहकर वे अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे हैं, वह छात्रावास खुद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। भवन की जर्जर स्थिति ऐसी है कि वह किसी भी समय एक बड़े मलबे में तब्दील हो सकता है। जर्जर छतें, दीवारों से झांकती ईंटें और पीने के साफ पानी की अनुपलब्धता ने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। प्राचार्य कार्यालय के बाहर जमा छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कॉलेज प्रशासन को महज 3 दिनों का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
मौत के साये में गुज़रती रातें: जर्जर छत और गिरता प्लास्टर
मारवाड़ी महाविद्यालय के छात्रावास की बदहाली किसी से छिपी नहीं है, लेकिन सोमवार को छात्रों ने इस समस्या को जिस प्रमुखता से उठाया, उसने कॉलेज प्रबंधन की नींद उड़ा दी है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र शिवसागर ने छात्रावास की भयावह स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि भवन का ढांचा इतना कमजोर हो चुका है कि रात में सोते समय छात्रों को डर लगा रहता है। कई बार सोते हुए छात्रों के बिस्तर पर छत का प्लास्टर गिर चुका है। जर्जर हॉस्टल की दीवारें सीलन से भरी हैं और खिड़कियों के पल्ले तक गायब हैं।
छात्रों का कहना है कि वे यहाँ पढ़ने आते हैं, लेकिन उन्हें हर समय अपनी जान बचाने की चिंता सताती रहती है। “हम रात भर इस खौफ में रहते हैं कि कहीं सोते समय छत हमारे ऊपर न गिर जाए। क्या एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय में शिक्षा पाने की यही कीमत है कि हमें जान जोखिम में डालकर रहना पड़े?” यह सवाल प्रदर्शन कर रहे लगभग हर छात्र की जुबान पर था। छात्रों ने यह भी जोड़ा कि बारिश के दिनों में स्थिति और भी नारकीय हो जाती है, जब छतों से पानी टपकता है और पूरे कमरे में नमी फैल जाती है।
बूंद-बूंद पानी को तरसते छात्र: बुनियादी सुविधाओं का अकाल
छात्रावास की समस्या केवल जर्जर भवन तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पीने के पानी की भीषण समस्या को लेकर भी कॉलेज प्रशासन को घेरा। छात्रों का आरोप है कि छात्रावास में पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। जो जल स्रोत उपलब्ध हैं, वे इतने प्रदूषित और पुराने हैं कि उनके इस्तेमाल से छात्र लगातार बीमार पड़ रहे हैं। साफ सफाई की व्यवस्था नगण्य है और शौचालय की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है।
शिवसागर और उनके साथी छात्रों ने बताया कि कई बार प्राचार्य से मौखिक और लिखित रूप में इन समस्याओं की शिकायत की गई, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘फाइल बढ़ रही है’ जैसा जवाब देकर टाल दिया गया। छात्रों का कहना है कि जब वे छात्रावास के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करते हैं, तो उन्हें न्यूनतम सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं? स्वच्छ पेयजल और एक सुरक्षित छत छात्र का मौलिक अधिकार है, लेकिन मारवाड़ी कॉलेज का प्रशासन इन बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदनहीन बना हुआ है। सोमवार को प्राचार्य कार्यालय के बाहर छात्रों की भीड़ इसी संवेदनहीनता के खिलाफ एक सामूहिक आक्रोश का प्रकटीकरण थी।
प्रशासन का पक्ष: अधीक्षक संजय जायसवाल का आश्वासन
छात्रों के बढ़ते हंगामे और नारेबाजी को देखते हुए मारवाड़ी महाविद्यालय के छात्रावास अधीक्षक संजय जायसवाल ने छात्रों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों की शिकायतों को सुना और यह स्वीकार किया कि छात्रावास की मरम्मत की आवश्यकता है। संजय जायसवाल ने छात्रों को शांत करने का प्रयास करते हुए आश्वासन दिया कि उनकी जायज मांगों को जल्द ही पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन की मरम्मत और पानी की व्यवस्था को लेकर कागजी कार्यवाही की जा रही है और इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, छात्रों को अधीक्षक का यह आश्वासन बहुत रास नहीं आया। छात्रों का तर्क था कि पिछले कई महीनों से उन्हें इसी तरह के ‘जल्द होने वाले’ आश्वासनों पर जिंदा रखा गया है, लेकिन धरातल पर एक ईंट भी नहीं बदली गई है। संजय जायसवाल ने छात्रों से कुछ समय की मांग की, लेकिन छात्रों ने इस बार समय सीमा (डेडलाइन) तय कर दी है। कॉलेज प्रशासन की दलील है कि फंड और टेंडर की प्रक्रियाओं में समय लगता है, लेकिन छात्रों का कहना है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो गया, तो क्या प्रशासन टेंडर का इंतजार करेगा?
3 दिन का अल्टीमेटम और उग्र आंदोलन की चेतावनी
सोमवार के प्रदर्शन के बाद छात्रों ने एक सुर में निर्णय लिया है कि वे अब और प्रतीक्षा नहीं करेंगे। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में 3 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों की मांग है कि इन 72 घंटों के भीतर जर्जर भवन की मरम्मत का काम शुरू किया जाए और स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए।
शिवसागर ने छात्रों की ओर से चेतावनी देते हुए कहा, “अगर 3 दिनों के भीतर हमारी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो हम उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उस स्थिति में महाविद्यालय की तालाबंदी और सड़क जाम जैसे कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य की होगी।” छात्रों के इस कड़े रुख ने महाविद्यालय प्रबंधन को बैकफुट पर धकेल दिया है। परिसर में तनाव अभी भी बना हुआ है और छात्र अपनी अगली रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।
बिहार की उच्च शिक्षा और बुनियादी ढांचे की हकीकत
मारवाड़ी कॉलेज भागलपुर की यह घटना कोई अकेली मिसाल नहीं है। यह बिहार के कई अंगीभूत और प्रतिष्ठित महाविद्यालयों की उस कड़वी हकीकत को बयां करती है, जहाँ शिक्षा के नाम पर बड़े-बड़े बजट तो पास होते हैं, लेकिन छात्रों के रहने के ठिकाने ‘मौत के कुएं’ बने हुए हैं। भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के अंतर्गत आने वाले कई कॉलेजों के हॉस्टल इसी तरह की उपेक्षा का शिकार हैं।
मारवाड़ी कॉलेज जैसे संस्थान से निकले छात्र देश-दुनिया में नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में वहां पढ़ रहे छात्रों को एक सुरक्षित कमरा और साफ पानी के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि शिक्षा विभाग के लिए भी एक बड़ा सवाल है। छात्रों के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि नई पीढ़ी अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है और वे बदहाली को अपनी नियति मानने को तैयार नहीं हैं। अगले 3 दिन मारवाड़ी महाविद्यालय के लिए काफी निर्णायक होने वाले हैं। क्या प्रशासन नींद से जागेगा या एक बार फिर छात्रों को सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी, यह बुधवार के बाद स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल, भागलपुर के इस प्रमुख महाविद्यालय में छात्रों का गुस्सा एक शांत तूफान की तरह उमड़ रहा है, जो किसी भी वक्त उग्र रूप ले सकता है।


