
नई दिल्ली/पटना: नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। सरकार ने इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान किया था, जिसे ऐतिहासिक कदम बताया गया।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया और समर्थन के मुद्दे पर सियासी मतभेद सामने आए। विपक्षी दलों ने कानून की टाइमिंग और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए, जिसके चलते संसद में सहमति नहीं बन सकी और मामला विवादों में घिर गया।

इधर, विपक्ष के रुख से नाराज़ NDA नेताओं ने बिहार की राजधानी पटना में महागठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शहर के कई इलाकों में पोस्टर लगाए गए, जिनमें महागठबंधन के नेताओं पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए। कुछ पोस्टरों में महिलाओं के प्रतीकात्मक चित्रों के जरिए विरोध दर्ज कराया गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा नेता शैलेश महाजन ने महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष का रवैया महिलाओं के हितों के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को देख रही हैं और समय आने पर इसका जवाब देंगी।
गौरतलब है कि इस कानून के लागू होने से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है, जिसके बाद ही महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। विपक्षी दलों—जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल—ने इसी आधार पर सरकार को घेरा है।
फिलहाल, महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है और आने वाले समय में यह मुद्दा और भी गरमाने के आसार हैं।


