
पटना। बिहार की आबोहवा में कुदरत के मिजाज ने अप्रैल के महीने में ही जून जैसी तपिश का अहसास कराना शुरू कर दिया है। राज्य के वायुमंडलीय व्यवहार में आए अचानक बदलाव और पछुआ हवाओं के बढ़ते प्रभुत्व के कारण बिहार के अधिकांश हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। रविवार, 19 अप्रैल 2026 की सुबह से ही सूरज के तेवर इतने तल्ख हैं कि जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त नजर आ रहा है। राज्य के औसत अधिकतम तापमान ने पिछले कई वर्षों के अप्रैल माह के रिकॉर्ड को चुनौती दे दी है। दक्षिण बिहार के जिलों में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहाँ पारा 42 डिग्री सेल्सियस की दहलीज को पार कर चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, राजस्थान की ओर से आने वाली शुष्क और गर्म हवाओं के कारण बिहार के दक्षिण-पश्चिम भाग में ‘हीटवेव’ यानी लू जैसी स्थितियां समय से पहले ही बन रही हैं। यह न केवल आम जनजीवन के लिए स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा कर रहा है, बल्कि कृषि और पशुधन पर भी इसके प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।
पारा 42 के पार: बिहार के तपते शहरों का पूरा ब्यौरा
शनिवार की शाम जारी किए गए आंकड़ों ने राज्य के प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे को चौकन्ना कर दिया है। बिहार का थर्मल मैप इस समय पूरी तरह से लाल नजर आ रहा है। राज्य के सात प्रमुख शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के उस खतरनाक आंकड़े को पार कर गया है, जिसे सामान्य से काफी ऊपर माना जाता है। रोहतास जिले का डेहरी इलाका पूरे प्रदेश में सबसे गर्म स्थान के रूप में उभरा है, जहाँ का अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। इसके ठीक पीछे कैमूर रहा, जहाँ सूरज की तपिश ने दोपहर के समय सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू जैसा नजारा पैदा कर दिया।
तापमान के इस चढ़ते ग्राफ पर नजर डालें तो अन्य जिलों की स्थिति भी कुछ कम नहीं है। बक्सर में पारा 41.6 डिग्री तक पहुँच गया है, जबकि मोक्ष की धरती गया जी में 41.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। पर्यटन नगरी राजगीर में 40.7 डिग्री, शेखपुरा में 40.5 डिग्री और औरंगाबाद में 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान ने लोगों को बेहाल कर दिया है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि दक्षिण बिहार के जिलों में गर्मी का ‘टॉर्चर’ आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। आसमान पूरी तरह साफ रहने के कारण सौर विकिरण सीधे धरातल तक पहुँच रहा है, जिससे सुबह 10 बजे के बाद ही बाजारों और गलियों में सन्नाटा पसरने लगा है।
वायुमंडलीय गतिकी: पछुआ हवा और राजस्थान का खतरनाक कनेक्शन
मौसम वैज्ञानिकों ने इस अचानक बढ़ी तपिश के पीछे कुछ ठोस भौगोलिक और वायुमंडलीय कारण बताए हैं। वर्तमान में बिहार के वायुमंडल में पछुआ हवा का प्रवाह काफी तीव्र हो गया है। पछुआ हवाएं स्वभाव से शुष्क और गर्म होती हैं, जो वातावरण में मौजूद नमी को सोख लेती हैं। नमी कम होने से सूरज की किरणें बिना किसी बाधा के जमीन तक पहुँचती हैं, जिससे धरातल तेजी से गर्म होता है।
दूसरा और सबसे बड़ा कारण राजस्थान और थार मरुस्थल की ओर से आने वाली गर्म हवाएं हैं। ये हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत से होते हुए सीधे बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश कर रही हैं। चूंकि इन हवाओं के रास्ते में कोई बड़ा अवरोध या पर्याप्त नमी वाला क्षेत्र नहीं है, इसलिए ये अपनी ऊष्मा को सीधे बिहार के वातावरण में समाहित कर रही हैं। आगामी पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बिहार के छह जिलों—बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद और अरवल में पारा 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुँच सकता है। मई के महीने से पहले ही लू चलने की यह आशंका संकेत दे रही है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण होंगे।
पटना का हाल: 40 की दहलीज पर खड़ी राजधानी
बिहार की राजधानी पटना में भी गर्मी ने अपने तेवर दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पटना के तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। शनिवार को राजधानी के अधिकतम तापमान में 2.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान में 4.4 डिग्री सेल्सियस की भारी वृद्धि हुई। पटना का अधिकतम तापमान फिलहाल 39.6 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर है, लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों के भीतर यहाँ भी पारा 40 के पार चला जाएगा।
राजधानी में न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो रात की गर्मी बढ़ने का स्पष्ट संकेत है। कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके पटना जैसे शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ इफेक्ट के कारण कंक्रीट की इमारतें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में उसे छोड़ती हैं, जिससे रात के समय भी सुकून नहीं मिल पा रहा है। आने वाले एक-दो दिनों में पटनावासियों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
दोहरा मौसम: एक तरफ तपिश, दूसरी तरफ आंधी-बारिश का येलो अलर्ट
अजीबोगरीब मौसमी परिस्थितियों के बीच बिहार में आज दो विपरीत स्थितियां देखने को मिलेंगी। जहाँ राज्य के 35 जिलों में लोग भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का सामना करेंगे, वहीं सीमांचल के तीन जिलों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। अररिया, किशनगंज और सुपौल के एक-दो स्थानों पर गर्जना के साथ बिजली चमकने और हल्की आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है।
शनिवार को भी पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार जिले के कुछ हिस्सों में 0.4 से 15.4 मिलीमीटर के बीच बारिश हुई, जिससे वहां तापमान में मामूली गिरावट आई है। हालांकि, यह राहत केवल स्थानीय और क्षणिक है। उत्तर बिहार के जिलों में भी 22-23 अप्रैल तक तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है, जिससे वहां का पारा भी 40 डिग्री के आसपास पहुँच जाएगा। पछुआ हवा का प्रवाह बढ़ने से राज्य के तापमान में रविवार से क्रमिक वृद्धि होगी, जिससे लोगों को दिन में भीषण गर्मी का अहसास होगा।
कृषि और जनजीवन पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव
मई के आगमन से पहले इस तरह की भीषण तपिश का सीधा असर बिहार की कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है। रबी फसलों की कटाई के बाद अब गरमा फसलों और सब्जियों की खेती का समय है, लेकिन गर्म हवाओं के कारण खेतों में नमी तेजी से सूख रही है। इससे फसलों को बचाने के लिए किसानों को अधिक सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट भी गहराने लगा है, क्योंकि पोखरों और जलाशयों का पानी तेजी से वाष्पीकृत हो रहा है।
चिकित्सकों ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचने, अधिक से अधिक तरल पदार्थों जैसे मट्ठा, लस्सी और पानी का सेवन करने का सुझाव दिया गया है। राजस्थान से आने वाली हवाओं में धूल के कणों की मात्रा अधिक होने के कारण आंखों और श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने भी पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
अगले 72 घंटों की बड़ी चुनौती
मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक बिहार में भीषण गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। आसमान के पूरी तरह साफ रहने और पछुआ हवाओं के निरंतर प्रवाह के कारण तापमान में क्रमिक वृद्धि जारी रहेगी। दक्षिण-पश्चिम भाग के छह जिलों में तापमान के 45 डिग्री तक पहुँचने का पूर्वानुमान यह संकेत दे रहा है कि इस वर्ष की गर्मी पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
न्यूनतम तापमान का 23.7 से 28.3 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना यह दर्शाता है कि अब रातें भी आरामदायक नहीं रहने वाली हैं। छपरा जहाँ 23.7 डिग्री के साथ सबसे कम तापमान वाला जिला रहा, वहीं डेहरी की गर्मी ने पूरे राज्य को सतर्क कर दिया है। बिहार की जनता को अब न केवल दिन की धूप से बचना होगा, बल्कि रात के बढ़ते तापमान के अनुसार अपनी जीवनशैली में बदलाव करना होगा। 19 अप्रैल 2026 की यह सुबह बिहार के लिए एक लंबी और गर्म ग्रीष्म ऋतु का आगाज कर रही है।


