
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मौका था संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में पारित न हो पाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने का। सम्राट चौधरी ने दोटूक शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर कांग्रेस की ‘दोहरी सोच’ अब पूरे देश के सामने उजागर हो चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने आधिकारिक वक्तव्य के माध्यम से स्पष्ट किया कि विपक्ष हमेशा से महिलाओं की प्रगति की राह में एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ा रहा है। मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब शुक्रवार को सदन में पर्याप्त संख्या बल और समर्थन न मिलने के कारण वह महत्वपूर्ण विधेयक गिर गया, जो ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए अनिवार्य माना जा रहा था। सम्राट चौधरी ने कांग्रेस की राजनैतिक कार्यशैली को ‘ढोंग’ करार देते हुए कहा कि जो लोग टीवी पर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की बातें करते हैं, उन्होंने सदन के भीतर आधी आबादी के सपनों का गला घोंटने का काम किया है।
संविधान संशोधन विधेयक और कांग्रेस की ‘असुरक्षा’
सम्राट चौधरी ने शनिवार की सुबह अपने विस्तृत बयान में उस कड़वी हकीकत को उजागर किया जो संसद के भीतर घटित हुई। उन्होंने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं था, बल्कि यह देश की करोड़ों महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने का एक सशक्त माध्यम था। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस विधेयक के माध्यम से सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष की ‘असुरक्षित’ मानसिकता ने इसे अवरुद्ध कर दिया।
सम्राट चौधरी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल इस बात से बुरी तरह घबराए हुए हैं कि यदि महिलाएं सशक्त हो गईं और निर्णय लेने वाली सीटों पर पहुँच गईं, तो उनकी परंपरागत राजनैतिक जमीन खिसक जाएगी। उन्होंने पूछा कि आखिर देश की आधी आबादी को उनकी अपनी आवाज देना कांग्रेस के लिए इतना मुश्किल क्यों था? मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि यह वही कांग्रेस है जो खुद को प्रगतिशील होने का दावा करती है, लेकिन जब वास्तविक अवसर आया, तो वह अपने पुराने ‘महिला विरोधी’ ढर्रे पर वापस लौट आई।
यूपीए के दौर से अब तक: एक ही सोच का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को खंगालते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के दस वर्षों के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान भी महिलाओं के अधिकारों की इसी तरह अनदेखी की गई थी। सम्राट चौधरी के अनुसार, कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को केवल एक ‘वोट बैंक’ के रूप में देखा है, लेकिन उन्हें नेतृत्व सौंपने की बात जब भी आई, तो पार्टी ने कदम पीछे खींच लिए।
उन्होंने कहा कि संप्रग के दौर में जो सोच हावी थी, आज विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस वही मानसिकता दोहरा रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल नहीं चाहते कि पंचायत और नगर निकायों की तरह लोकसभा और विधानसभाओं में भी महिलाएं अपनी ताकत दिखाएं। सम्राट चौधरी ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने जब ऐतिहासिक साहस दिखाते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था, तब भी विपक्ष ने बाधा डालने की कोशिश की थी, और अब जब इसके क्रियान्वयन की बारी आई है, तब भी वे ‘दोहरी सोच’ का परिचय दे रहे हैं।
‘नारी शक्ति वंदन’ का मार्ग अवरुद्ध करने का आरोप
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में तकनीकी बारीकियों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को धरातल पर उतारने के लिए संविधान में 131वां संशोधन करना अनिवार्य था। यह संशोधन जनगणना और परिसीमन के साथ महिला आरक्षण को जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी थी। शुक्रवार को इस विधेयक के गिरने का मतलब यह है कि अब आरक्षण के कार्यान्वयन में तकनीकी अड़चनें पैदा हो सकती हैं, जिसका सीधा दोष मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के सिर मढ़ा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को रोकने के लिए विपक्ष ने जिस तरह की घेराबंदी की है, वह निंदनीय है। सम्राट चौधरी ने कहा कि विपक्ष की इस नकारात्मक राजनीति से केवल एक पार्टी या सरकार को नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि देश की उन करोड़ों बेटियों और माताओं की उम्मीदों को ठेस पहुँची है जो राजनीति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का सपना देख रही थीं। उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक ‘काला दिन’ बताया जब विपक्ष ने महिलाओं के नेतृत्व की संभावना से डरकर उनके अधिकारों के विरुद्ध मतदान किया या समर्थन वापस लिया।
विपक्ष की ‘ढोंगी’ राजनीति का पर्दाफाश
सम्राट चौधरी का सबसे बड़ा प्रहार कांग्रेस के ‘ढोंग’ पर था। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस के बड़े नेता सड़कों पर उतरकर महिलाओं के हक की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सदन के भीतर वे उसी कानून की राह रोकते हैं जो महिलाओं को संवैधानिक शक्ति देता है। उन्होंने कहा, “यह कैसी राजनीति है जहाँ आप मंच पर कुछ और कहते हैं और मतदान के समय कुछ और करते हैं? कांग्रेस की यह दोहरी चाल अब देश की महिलाएं समझ चुकी हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की असुरक्षा इतनी गहरी है कि वे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के बजाय वर्तमान में रोड़े अटका रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा महिलाओं को केवल लाभार्थी (Beneficiary) नहीं मानती, बल्कि उन्हें ‘राष्ट्र निर्माता’ के रूप में देखती है। सम्राट चौधरी के अनुसार, विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन में साथ न देकर यह साबित कर दिया है कि उनकी विचारधारा में महिलाओं के लिए केवल नारे हैं, नीतियां नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेगी और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
बिहार की महिलाओं से अपील और भावी संकल्प
सम्राट चौधरी ने बिहार के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि बिहार वह धरती है जहाँ महिलाओं को सबसे पहले पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने हमेशा महिलाओं के सम्मान और भागीदारी को प्राथमिकता दी है, लेकिन कांग्रेस का रुख हमारे राज्य की प्रगतिशील सोच के खिलाफ है। उन्होंने बिहार की महिलाओं से अपील की कि वे कांग्रेस और उसके सहयोगियों की इस ‘दोहरी सोच’ को पहचानें और देखें कि कौन वास्तव में उनके सशक्तिकरण के लिए खड़ा है।
उन्होंने संकल्प दोहराते हुए कहा कि भाजपा और राजग (NDA) इस हार से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि भले ही आज विपक्ष ने एक विधेयक को रोक दिया हो, लेकिन नारी शक्ति के उस सैलाब को नहीं रोक पाएंगे जो अब उमड़ चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार फिर से उन संवैधानिक रास्तों को तलाशेगी जिससे महिलाओं को उनका हक मिल सके। सम्राट चौधरी ने कहा कि “हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी हकीकत नहीं बन जाती।”
सियासी मैदान में अब ‘आधी आबादी’ का फैसला
18 अप्रैल 2026 की यह दोपहर सम्राट चौधरी के कड़े बयानों से गूँजती रही। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि आगामी राजनैतिक जंग में महिला सशक्तिकरण का मुद्दा भाजपा का सबसे बड़ा हथियार होगा। कांग्रेस पर ‘दोहरी सोच’ का आरोप लगाकर उन्होंने एक ऐसी लकीर खींच दी है जहाँ एक तरफ महिलाओं के नेतृत्व का समर्थन करने वाला पक्ष है और दूसरी तरफ (उनके दावों के अनुसार) उन्हें रोकने वाला ‘ढोंगी’ विपक्ष।
संसद में 131वां संशोधन विधेयक भले ही विफल हो गया हो, लेकिन सम्राट चौधरी ने इसे बिहार और देश की जनता के बीच एक बड़े भावनात्मक मुद्दे में बदल दिया है। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी अदालत जनता की होती है, और जब महिलाएं अपने हक की रक्षा के लिए मतदान केंद्र तक पहुँचेंगी, तो कांग्रेस की यह ‘दोहरी सोच’ उन्हें बहुत महंगी पड़ेगी। फिलहाल, सचिवालय से लेकर सोशल मीडिया तक सम्राट चौधरी का यह आक्रामक अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है, जो संकेत दे रहा है कि बिहार की राजनीति में अब ‘नारी शक्ति’ ही सत्ता का भविष्य तय करेगी।


