​पाँच करोड़ की जमीन के लिए ‘कलयुगी’ बेटे ने पार की हद: पिता पर चलवाई गोलियां, ससुर के साथ मिलकर रची थी खौफनाक साजिश

पटना। रिश्तों की मर्यादा और पारिवारिक विश्वास जब दौलत के तराजू पर तौले जाते हैं, तो अक्सर खून के रिश्ते ही सबसे बड़े दुश्मन बनकर सामने खड़े हो जाते हैं। बिहार की राजधानी पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बेटे ने महज जमीन के टुकड़े के लिए अपने जन्मदाता की ही जान लेने की कोशिश की। करीब पाँच करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन के लालच में डूबे बेटे ने अपने ससुर और उनके रिश्तेदारों के साथ मिलकर पिता की हत्या का ऐसा ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया, जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और गोलियों की बौछार के बावजूद पिता की जान बच गई। पुलिस ने इस मामले की गुत्थी को सुलझाते हुए बेटे सहित तीन मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई पटना पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसने न केवल एक अंधे कत्ल की कोशिश का पर्दाफाश किया, बल्कि समाज के गिरते नैतिक मूल्यों की एक डरावनी तस्वीर भी पेश की है।

एजी कॉलोनी का वह खौफनाक मंजर: जब सन्नाटे में गूँजी गोलियां

​वारदात की जड़ें 14 मार्च 2024 की उस काली रात से जुड़ी हैं, जिसने शास्त्री नगर के एजी कॉलोनी इलाके में दहशत फैला दी थी। खटाल संचालक शिव यादव रोजाना की तरह काम खत्म कर अपने एजी कॉलोनी स्थित खटाल में सोने चले गए थे। रात का सन्नाटा पसरा हुआ था और शिव यादव गहरी नींद में थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुँचे और उन्हें निशाना बनाकर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। अचानक हुए इस हमले से शिव यादव को संभलने का मौका भी नहीं मिला, लेकिन उनकी किस्मत अच्छी थी कि गोलियां उन्हें इस तरह नहीं लगीं कि उनकी जान चली जाए।

​हमलावर उन्हें मरा हुआ समझकर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। इस जानलेवा हमले के बाद लहूलुहान हालत में शिव यादव ने किसी तरह अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचना दी। शास्त्री नगर पुलिस ने पीड़ित के बयान पर केस दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती दौर में यह मामला किसी बाहरी रंजिश या व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता का लग रहा था, लेकिन जब शिव यादव ने अपने ही सगे बेटे दीपक कुमार पर शक जताया, तो पुलिस की तफ्तीश का रुख पूरी तरह बदल गया। एक पिता द्वारा अपने बेटे पर ही हत्या की कोशिश का संदेह जताना इस बात का संकेत था कि घर के भीतर काफी समय से कलह की चिंगारी सुलग रही थी।

पाँच करोड़ की जमीन: खून के रिश्तों में दरार की वजह

​पुलिस की जांच में यह बात निकलकर सामने आई कि इस पूरी साजिश के केंद्र में पटना की एक बेशकीमती जमीन थी। शास्त्री नगर इलाके में मौजूद इस जमीन की बाजार दर लगभग पाँच करोड़ रुपये आंकी गई है। शिव यादव इस जमीन के मालिक थे और उनके बेटे दीपक की नजर इस करोड़ों की संपत्ति पर थी। दीपक चाहता था कि यह जमीन जल्द से जल्द उसके नाम हो जाए या उसका सौदा कर उसे मोटी रकम मिल सके, लेकिन शिव यादव इसके लिए तैयार नहीं थे।

​संपत्ति का यह लालच दीपक के सिर पर इस कदर सवार हुआ कि उसने अपने पिता को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। उसे लगा कि पिता की मृत्यु के बाद वह स्वतः ही इस विशाल संपत्ति का मालिक बन जाएगा। इसी ‘शॉर्टकट’ सफलता और दौलत की हवस ने उसे एक अपराधी बना दिया। उसने अपने ससुर मिथिलेश यादव से संपर्क किया और उन्हें भी इस बड़ी रकम का लालच दिया। ससुर ने भी अपनी बेटी के भविष्य और पैसों के मोह में अपने दामाद का साथ देने का फैसला किया, जो कि एक सामाजिक और नैतिक पतन का पराकाष्ठा थी।

ससुर और रिश्तेदारों के साथ मिलकर बुना साजिश का जाल

​हत्या की इस साजिश को अमली जामा पहनाने के लिए दीपक ने अपने ससुर मिथिलेश यादव और मिथिलेश के एक करीबी रिश्तेदार नरेश यादव को साथ लिया। नरेश यादव को इस काम के लिए इसलिए जोड़ा गया क्योंकि वह आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने और हथियार जुटाने में सक्षम था। इन तीनों ने मिलकर कई बैठकों में यह तय किया कि कब और कहाँ शिव यादव को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने खटाल को ही सबसे मुफीद जगह चुना क्योंकि वहां रात में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते थे।

​साजिशकर्ताओं ने यह सोचा था कि हमलावरों को किराये पर बुलाकर या खुद अंजाम देकर वे पुलिस की नजरों से बच जाएंगे। वारदात में प्रयुक्त होने वाली मोटरसाइकिल और हथियारों का इंतजाम नरेश यादव के जरिए किया गया। ससुर मिथिलेश यादव इस पूरी प्रक्रिया में रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे थे, जो दीपक को लगातार उकसा रहे थे। यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कैसे ससुर और दामाद ने मिलकर एक ऐसे व्यक्ति की हत्या की योजना बनाई जो उनके परिवार का आधार स्तंभ था।

सिटी एसपी और विशेष टीम की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी मध्य दीक्षा ने एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम की कमान सचिवालय डीएसपी-2 साकेत कुमार को सौंपी गई, जिसमें शास्त्री नगर थानेदार रवींद्र कुमार और कई अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने सबसे पहले दीपक के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली और उसकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया। जैसे ही पुलिस को दीपक और मिथिलेश के बीच असामान्य बातचीत के सबूत मिले, कड़ियां जुड़ने लगीं।

​पुलिस ने तकनीकी इनपुट और मानवीय मुखबिरों के जरिए यह पुख्ता कर लिया कि हमले की रात दीपक की लोकेशन और उसके द्वारा की गई कॉल संदिग्ध थीं। सख्ती से पूछताछ करने पर दीपक का धैर्य जवाब दे गया और उसने सारा सच उगल दिया। उसकी निशानदेही पर ससुर मिथिलेश यादव और नरेश यादव को भी अलग-अलग ठिकानों से दबोच लिया गया। पुलिस की इस मुस्तैदी ने आरोपियों को भागने या सबूत मिटाने का कोई मौका नहीं दिया। सिटी एसपी दीक्षा ने बताया कि यह एक सोची-समझी साजिश थी जिसे पारिवारिक विवाद का रूप देने की कोशिश की गई थी।

हथियार और बाइक बरामद: पुलिस की ठोस कार्रवाई

​गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए घातक हथियारों और अन्य सामानों को बरामद कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो कट्टा (देशी पिस्टल), तीन जिंदा कारतूस, वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, खाली खोखा और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। ये बरामदगियां अदालत में आरोपियों के खिलाफ सबसे मजबूत भौतिक साक्ष्य (Physical Evidence) साबित होंगी।

​बाइक की बरामदगी से यह स्पष्ट हो गया है कि हमलावर किस रास्ते से आए और किधर भागे। वहीं, मोबाइल फोन के डेटा से उन मैसेज और कॉल्स का पता चला है जो साजिश रचने के दौरान किए गए थे। पुलिस अब इन हथियारों की फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खटाल में चली गोलियां इन्हीं हथियारों से निकली थीं। बरामद किए गए मोबाइल फोन को भी जांच के लिए लैब भेजा गया है ताकि डिलीट किए गए डेटा और साजिश से जुड़े अन्य डिजिटल सबूतों को निकाला जा सके।

समाज के लिए एक चेतावनी और गिरते नैतिक मूल्य

​पटना की यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक बड़ा अलार्म है। जमीन और पैसों के लिए एक बेटे का अपने पिता पर गोली चलवाना यह दर्शाता है कि आधुनिकता की दौड़ में मानवीय संवेदनाएं कितनी पीछे छूट गई हैं। ससुर का अपने दामाद के साथ मिलकर अपने ही समधी की हत्या की साजिश रचना रिश्तों की पवित्रता पर एक गहरा घाव है।

​आर्थिक विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि शहरीकरण के कारण जमीन की कीमतों में आई बेतहाशा बढ़ोत्तरी ने लोगों को हिंसक बना दिया है। पाँच करोड़ रुपये की वह जमीन शिव यादव के लिए उनकी मेहनत की कमाई थी, लेकिन उनके बेटे के लिए वह केवल एक लग्जरी लाइफस्टाइल का जरिया थी। पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों के बीच यह संदेश गया है कि रिश्तों की आड़ में छिपे गुनहगार भी अब बच नहीं पाएंगे। फिलहाल, दीपक, मिथिलेश और नरेश तीनों को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और पुलिस इस मामले में स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) की मांग करेगी ताकि शिव यादव को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

प्रशासनिक सतर्कता और भविष्य की राह

​सचिवालय डीएसपी-2 साकेत कुमार ने बताया कि इस मामले में अभी कुछ और बिंदुओं पर जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस साजिश में किसी और भू-माफिया या बाहरी व्यक्ति का हाथ तो नहीं था। शास्त्री नगर पुलिस ने खटाल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं ताकि वारदात की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके। शिव यादव फिलहाल खतरे से बाहर हैं, लेकिन अपने ही बेटे की इस करतूत से वे मानसिक रूप से काफी आहत हैं।

​पटना पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे संपत्ति विवादों को कानूनी और संवाद के माध्यम से सुलझाएं, न कि हिंसा का रास्ता अपनाएं। इस मामले ने यह भी साफ कर दिया है कि पुलिस अब केवल अपराधियों को पकड़ ही नहीं रही, बल्कि अपराध के पीछे की गहरी साजिशों को भी बेनकाब कर रही है। सिटी एसपी दीक्षा ने जांच टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि पेशेवर तरीके से किए गए अनुसंधान के कारण ही यह हाई-प्रोफाइल मामला इतनी जल्दी सुलझ सका।

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