​बिहार उपमुख्यमंत्रियों की सुरक्षा बढ़ी: विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को मिली Z श्रेणी

पटना। बिहार की सत्ता संरचना में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले दोनों उपमुख्यमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के सुरक्षा घेरे में विस्तार करते हुए अब उन्हें ‘जेड श्रेणी’ (Z Category) की सुरक्षा प्रदान की गई है। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के इन दो शीर्ष पदों पर आसीन व्यक्तियों की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद किया जाए। शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों नेताओं को अब जेड श्रेणी के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षा कवच मुहैया कराया जाएगा। यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि राज्य के प्रशासनिक और राजनैतिक नेतृत्व की सुरक्षा के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।

सुरक्षा का नया मानक: क्या है जेड श्रेणी का प्रोटोकॉल?

​राज्य सरकार द्वारा उपमुख्यमंत्रियों के लिए तय की गई जेड श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था एक अत्यंत सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत सुरक्षा कवच है। इस श्रेणी के तहत विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ कुल 22 सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। यह सुरक्षा घेरा केवल संख्या बल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो की भी भूमिका होगी। प्रोटोकॉल के अनुसार, इस 22 सदस्यीय दल में चार से छह एनएसजी (NSG) अथवा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों जैसे कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) या भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कमांडो शामिल रहेंगे।

​इन कमांडो को अत्याधुनिक हथियारों और संचार उपकरणों से लैस किया जाता है ताकि वे किसी भी विषम परिस्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दे सकें। जेड श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है। पहला हिस्सा ‘मोबाइल सुरक्षा’ (Mobile Security) कहलाता है, जो उपमुख्यमंत्रियों के चलते समय या यात्रा के दौरान उनके साथ रहता है। दूसरा हिस्सा ‘स्थिर सुरक्षा’ (Static Security) है, जो उनके निवास स्थान और कार्यालय परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस व्यवस्था के लागू होने से अब उपमुख्यमंत्रियों के आवास पर सुरक्षा जांच के कड़े मापदंड होंगे और बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित होगा।

जेड और जेड प्लस श्रेणी के बीच का अंतर

​सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में विशिष्ट व्यक्तियों (VVIPs) की सुरक्षा को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें जेड प्लस (Z+) सबसे उच्चतम स्तर होता है। उपमुख्यमंत्रियों को दी गई जेड श्रेणी की सुरक्षा, जेड प्लस से ठीक एक स्तर नीचे मानी जाती है। जहाँ जेड श्रेणी में 22 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, वहीं जेड प्लस में यह संख्या बढ़कर 55 हो जाती है। इसके पूर्व बिहार में कुछ उपमुख्यमंत्रियों को जेड प्लस की सुरक्षा भी दी गई थी, लेकिन वर्तमान सुरक्षा विश्लेषण और खतरे के आकलन (Threat Perception) के आधार पर विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को जेड श्रेणी में रखा गया है।

​जेड श्रेणी के सुरक्षा घेरे में एस्कॉर्ट गाड़ियों का भी प्रावधान होता है। जब भी उपमुख्यमंत्री शहर या राज्य के किसी हिस्से में भ्रमण करेंगे, उनके काफिले के साथ सुरक्षाकर्मियों से भरी एस्कॉर्ट गाड़ियां आगे और पीछे मौजूद रहेंगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि उनके वाहन के आवागमन में कोई बाधा न आए और सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी संदेहास्पद गतिविधि को दूर से ही रोका जा सके।

प्रशासनिक प्रक्रिया और सुरक्षा समीक्षा का आधार

​विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव की सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। बिहार पुलिस मुख्यालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की विशेष शाखा (Special Branch) समय-समय पर राज्य के महत्वपूर्ण राजनैतिक चेहरों पर संभावित खतरों का आकलन करती है। उपमुख्यमंत्रियों की सार्वजनिक जीवन में सक्रियता और विभिन्न जिलों में उनके निरंतर दौरों को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई थी।

​सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा श्रेणी में यह बदलाव राज्य की वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों और पूर्व की घटनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय बलों या राज्य के विशेष सुरक्षा दल के जवान दिखाई देंगे। सुरक्षा की यह नई व्यवस्था उनके सरकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ निजी दौरों पर भी लागू रहेगी।

विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव की राजनैतिक महत्ता

​सुरक्षा बढ़ाए जाने के पीछे एक बड़ा कारण इन दोनों नेताओं का बिहार की राजनीति में बढ़ता कद और उनकी जिम्मेदारियां भी हैं। विजय कुमार चौधरी बिहार की राजनीति के एक मझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं और वे वर्तमान मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं। इसी प्रकार, बिजेंद्र प्रसाद यादव राज्य के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक हैं और उनकी प्रशासनिक पकड़ अत्यंत मजबूत मानी जाती है। इन दोनों नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए प्रशासनिक स्थिरता की दृष्टि से भी अनिवार्य है।

​अक्सर महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने वाले पदों पर आसीन व्यक्तियों को राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता या असामाजिक तत्वों से खतरा बना रहता है। ऐसे में जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करना यह सुनिश्चित करता है कि वे बिना किसी सुरक्षा चिंता के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। सुरक्षा घेरे में वृद्धि के बाद अब इनके सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय पुलिस को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

सुरक्षा के तकनीकी पहलू और कमांडो ट्रेनिंग

​जेड श्रेणी के तहत तैनात होने वाले चार से छह कमांडो विशेष रूप से क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) का हिस्सा होते हैं। इनका मुख्य कार्य वीवीआईपी के चारों ओर एक अभेद्य घेरा बनाना होता है। इन कमांडो को मार्शल आर्ट्स, अत्याधुनिक असॉल्ट राइफलों के संचालन और आपातकालीन निकासी (Emergency Evacuation) में महारत हासिल होती है।

​सुरक्षा घेरे में तैनात अन्य पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी बाहरी परिधि की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की होती है। उपमुख्यमंत्रियों के काफिले में जैमर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी शामिल किए जा सकते हैं, जो रिमोट नियंत्रित विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। सुरक्षा के इन तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने बजट और संसाधनों का उचित आवंटन सुनिश्चित किया है। यह सुरक्षा व्यवस्था उनके पटना स्थित आवासों पर 24 घंटे सक्रिय रहेगी।

राजनैतिक गलियारों में सुरक्षा पर चर्चा

​सुरक्षा श्रेणी में इस बदलाव के बाद बिहार के राजनैतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। अक्सर सुरक्षा श्रेणी को राजनैतिक प्रतिष्ठा और पद की गरिमा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह विशुद्ध रूप से सुरक्षा समीक्षा का मामला है। विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षा की नई परतें उन्हें अधिक आत्मविश्वास प्रदान करेंगी।

​विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में जहाँ ग्रामीण अंचलों तक राजनेताओं का सीधा संवाद रहता है, वहां जेड श्रेणी की सुरक्षा का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। एस्कॉर्ट गाड़ियों और 22 कर्मियों के साथ भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाना और फिर भी जनता से जुड़ाव बनाए रखना एक कला है। इसके लिए सुरक्षाकर्मियों को भी विशेष निर्देश दिए जाते हैं कि वे सुरक्षा और जनसंपर्क के बीच संतुलन बनाए रखें।

भविष्य की सुरक्षा रणनीतियां और नई तैनातियां

​पुलिस मुख्यालय अब जल्द ही उन जवानों और कमांडो की सूची जारी करेगा जो दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ स्थायी रूप से तैनात रहेंगे। इसमें बिहार सैन्य पुलिस (BMP) के चुनिंदा जवानों को भी शामिल किया जा सकता है जिन्हें विशेष सुरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त है। जेड सुरक्षा के तहत अब उनके दौरों की जानकारी पहले से ही संबंधित जिलों के एसपी को दी जाएगी, जो वहां स्थानीय सुरक्षा और एस्कॉर्ट का अतिरिक्त प्रबंध करेंगे।

​विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव की इस नई सुरक्षा व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि बिहार सरकार अपने नेतृत्व की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। आने वाले समय में कुछ अन्य मंत्रियों और महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल, 18 अप्रैल की सुबह तक यह साफ हो चुका है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों का सुरक्षा घेरा अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और पेशेवर हाथों में है। 22 जवानों की यह फौज और केंद्रीय बलों के कमांडो अब उनके साये की तरह साथ रहेंगे, जिससे बिहार के प्रशासनिक शीर्ष नेतृत्व को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।

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