​भागलपुर नगर निगम: आज सामान्य बोर्ड की बैठक में मचेगा बवाल, प्याऊ विवाद पर गोलबंद हुए पार्षद

भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के नगर विकास की दशा और दिशा तय करने वाली नगर निगम की सामान्य बोर्ड की बैठक शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को आयोजित होने जा रही है। लेकिन इस बार यह बैठक केवल विकास योजनाओं के अनुमोदन तक सीमित रहने वाली नहीं है। सदन के भीतर ‘नगर सरकार’ (मेयर और डिप्टी मेयर) और वार्ड पार्षदों के बीच एक बड़ी वैचारिक और राजनैतिक जंग छिड़ने के आसार हैं। शहर के विभिन्न वार्डों के पार्षद विकास योजनाओं में भेदभाव और अपनी अनदेखी को लेकर लामबंद हो गए हैं। पार्षदों का स्पष्ट आरोप है कि वार्डों के विकास कार्यों का श्रेय लेने की होड़ में उनके संवैधानिक अधिकारों और जनता के बीच उनकी छवि के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में प्याऊ निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुका है। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि सदन के भीतर उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे न केवल पुरजोर विरोध करेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर सदन की कार्यवाही को भी बाधित करेंगे।

प्याऊ निर्माण: विकास की राजनीति और पार्षदों का ‘अस्तित्व’ संकट

​इस बार के हंगामे की सबसे मुख्य और संवेदनशील वजह शहर के विभिन्न वार्डों में होने वाला प्याऊ निर्माण है। भागलपुर में अप्रैल की तपिश अपने चरम पर है और ऐसे में पेयजल की व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा है। नगर निगम प्रशासन ने इस साल प्याऊ निर्माण के लिए एक नया फार्मूला तैयार किया है, जिसके तहत मेयर को 10 और डिप्टी मेयर को 5 अतिरिक्त प्याऊ निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहली नजर में यह एक सामान्य व्यवस्था लग सकती है, लेकिन इसने वार्ड पार्षदों के बीच अपनी ‘साख’ बचाने की चिंता पैदा कर दी है।

​पार्षदों का तर्क है कि जिस वार्ड में मेयर या डिप्टी मेयर के कोटे से प्याऊ का निर्माण हो रहा है, वहां के स्थानीय निवासी अपने पार्षद से सवाल पूछ रहे हैं। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि उनके वार्ड का पार्षद अक्षम है, और इसीलिए बड़े पदाधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। कई वार्डों में स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि लोग अपने पार्षदों को आईना दिखाते हुए कह रहे हैं कि आगे के विकास कार्य भी अब मेयर और डिप्टी मेयर ही कराएंगे। पार्षदों के लिए यह केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके राजनैतिक अस्तित्व और क्षेत्र में उनकी पकड़ का सवाल बन गया है।

सदन में ‘घेराबंदी’ की तैयारी: पार्षद संजय सिन्हा का कड़ा रुख

​शनिवार की बैठक को लेकर पार्षदों ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। शहर के कई कद्दावर पार्षदों ने निजी तौर पर बैठकें कर एक साझा मोर्चा बनाया है। पार्षद संजय सिन्हा ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि नगर निगम के भीतर जो चीजें गलत हो रही हैं, उनका जोरदार विरोध किया जाएगा। सिन्हा के अनुसार, नगर निगम में लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन होना चाहिए, जहाँ हर वार्ड को समान महत्व मिले। किसी एक या दो व्यक्तियों के हाथों में शक्तियों का केंद्रीकरण वार्ड स्तर के प्रतिनिधित्व को कमजोर करता है।

​पार्षदों की गोलबंदी का असर आज की बैठक के एजेंडे पर भी पड़ना तय है। पार्षद न केवल प्याऊ विवाद पर सवाल उठाएंगे, बल्कि वार्डों में लंबित नाला सफाई, स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और गर्मी के मौसम में जल संकट से निपटने की अन्य योजनाओं पर भी जवाब मांगेंगे। पार्षदों का कहना है कि वे केवल रबर स्टैम्प बनकर सदन में बैठने के लिए नहीं हैं। यदि उनके वार्ड की समस्याओं को नगर सरकार ने नजरअंदाज किया, तो वे सदन को तब तक चलने नहीं देंगे जब तक कि कोई ठोस आश्वासन या समाधान नहीं मिल जाता।

नगर सरकार बनाम वार्ड प्रतिनिधि: विकास का ‘क्रेडिट वार’

​भागलपुर नगर निगम में लंबे समय से मेयर-डिप्टी मेयर और पार्षदों के बीच खींचतान चलती रही है। ‘क्रेडिट वार’ यानी विकास कार्यों का श्रेय लेने की यह लड़ाई अब सड़कों से निकलकर सदन के फर्श तक पहुँच गई है। पार्षदों का मानना है कि वार्ड के भीतर होने वाला हर छोटा-बड़ा काम पार्षद की देखरेख और उसकी अनुशंसा पर होना चाहिए। जब उच्च पदाधिकारी सीधे हस्तक्षेप करते हैं, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था में असंतुलन पैदा होता है।

​दूसरी ओर, नगर सरकार का पक्ष यह हो सकता है कि वे शहर के समग्र विकास के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पार्षदों का आरोप है कि प्याऊ निर्माण की यह बंदरबांट चहेते क्षेत्रों को लाभ पहुँचाने और राजनैतिक बढ़त बनाने के लिए की जा रही है। शनिवार की बैठक में इस ‘क्रेडिट वार’ की गूँज सुनाई देगी, जहाँ पार्षद अपने अधिकारों की रक्षा के लिए नगर आयुक्त और मेयर के सामने अपनी बात रखेंगे। यदि तालमेल नहीं बैठा, तो भागलपुर की जनता के लिए आज की बैठक किसी कड़वे अनुभव से कम नहीं होगी।

गर्मी का बढ़ता प्रकोप और पेयजल की चुनौती

​18 अप्रैल की तारीख भागलपुर के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में पारा तेजी से बढ़ रहा है। प्याऊ विवाद केवल राजनैतिक नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की प्यास से जुड़ा है। अगर सदन में इसी तरह हंगामे की वजह से काम रुका रहा, तो शहर के कई हिस्सों में प्याऊ निर्माण की प्रक्रिया लटक सकती है। भागलपुर के चौक-चौराहों पर राहगीरों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना निगम की प्राथमिकता होनी चाहिए थी, लेकिन फिलहाल यह मुद्दा आपसी रंजिश की भेंट चढ़ता दिख रहा है।

​पार्षदों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि उनके वार्ड में होने वाला काम उनके माध्यम से ही हो। “नगर सरकार” को घेरने की तैयारी कर रहे पार्षदों ने एजेंडा कॉपी का भी बारीकी से अध्ययन किया है ताकि वे तकनीकी आधार पर प्रशासन को घेर सकें। आज की बैठक में भागलपुर की सफाई व्यवस्था और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की धीमी प्रगति पर भी तीखे सवाल होने की संभावना है।

बैठक का संभावित माहौल: हंगामे के बीच विकास की आस

​नगर निगम प्रशासन ने बैठक को सफल बनाने के लिए तैयारियां तो पूरी कर ली हैं, लेकिन हंगामे की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सामान्य बोर्ड की बैठक में आमतौर पर बजट और नई योजनाओं पर चर्चा होती है, लेकिन इस बार ‘प्याऊ’ शब्द सदन के तापमान को बढ़ाएगा। भागलपुर के नागरिक इस बैठक से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें गर्मी से राहत दिलाने वाली योजनाओं को हरी झंडी मिलेगी, लेकिन पार्षदों के तेवर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

​विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पार्षदों और मेयर के बीच संवाद नहीं हुआ, तो यह बैठक शहर के विकास के लिए एक ‘शून्य’ साबित हो सकती है। नगर निगम में आंतरिक कलह का सीधा असर जमीन पर होने वाले कामों पर पड़ता है। भागलपुर नगर निगम के पास वर्तमान में कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधूरे काम और जल जमाव की समस्या शामिल है। लेकिन इन सबके ऊपर अब ‘प्याऊ निर्माण की जिम्मेदारी’ का विवाद हावी हो गया है।

निगम की प्रशासनिक तैयारी और पार्षदों की मांग

​निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्याऊ निर्माण की योजना शहर की तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए बनाई गई है। इसे किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुँचाने के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, पार्षदों की मांग है कि प्याऊ की संख्या बढ़ाने के बजाय, हर वार्ड को समान बजट आवंटित किया जाए ताकि पार्षद खुद अपने वार्ड की जरूरत के हिसाब से प्याऊ का स्थान और निर्माण तय कर सकें।

​शनिवार सुबह से ही भागलपुर नगर निगम परिसर में सरगर्मी तेज है। पार्षद छोटे-छोटे समूहों में बैठकर अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्याऊ निर्माण की फाइल को लेकर सवाल दागने की तैयारी है। भागलपुर नगर निगम की यह बैठक यह तय करेगी कि शहर में ‘सुशासन’ का दावा कितना मजबूत है या फिर आपसी खींचतान में शहर की जनता एक बार फिर अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी।

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