​बिहार विधान परिषद उपचुनाव: 12 मई को वोटिंग, मंगल पांडेय की खाली सीट पर मचेगा घमासान

पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर चुनावी हलचल तेज होने वाली है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने सूबे की उच्च सदन यानी विधान परिषद की एक रिक्त सीट को भरने के लिए बिगुल फूंक दिया है। विधानसभा कोटे की इस महत्वपूर्ण सीट पर आगामी 12 मई 2026 को मतदान की प्रक्रिया संपन्न होगी। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित होने के बाद से खाली पड़ी थी। निर्वाचन आयोग की इस घोषणा के साथ ही पटना के राजनैतिक गलियारों में गुणा-गणित और उम्मीदवारों के चयन को लेकर चर्चाएं गर्म हो गई हैं। यह उपचुनाव न केवल एक सीट को भरने की प्रक्रिया है, बल्कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संख्या बल और रणनीतिक कौशल की एक नई परीक्षा भी साबित होने वाली है। 16 नवंबर 2025 से रिक्त चल रहे इस पद के लिए चुनावी शिड्यूल जारी होने के बाद अब सबकी नजरें 23 अप्रैल को जारी होने वाली अधिसूचना पर टिकी हैं।

मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली हुई थी कुर्सी

​इस उपचुनाव की पृष्ठभूमि मंगल पांडेय के राजनैतिक सफर से जुड़ी है। मंगल पांडेय लंबे समय तक विधान परिषद के सदस्य रहे और बिहार सरकार में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, नवंबर 2025 के दौरान हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद, संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप उन्हें अपनी विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र देना पड़ा।

​मंगल पांडेय का इस्तीफा 16 नवंबर 2025 को स्वीकार किया गया था, जिसके बाद से ही विधानसभा कोटे की यह सीट खाली चल रही थी। गौर करने वाली बात यह है कि इस सीट का कार्यकाल अभी काफी लंबा शेष है। निर्वाचित होने वाले नए सदस्य का कार्यकाल 6 मई 2030 तक होगा। यही कारण है कि राजनैतिक दल इस सीट को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं, क्योंकि यहाँ से चुने जाने वाले प्रतिनिधि को सदन में अपनी बात रखने और नीति-निर्माण में भागीदारी करने के लिए लगभग चार साल से अधिक का समय मिलेगा।

चुनावी कैलेंडर: नामांकन से लेकर परिणाम तक की पूरी जानकारी

​निर्वाचन आयोग ने इस उपचुनाव को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के लिए विस्तृत समय-सारणी साझा की है। 17 अप्रैल को हुई घोषणा के अनुसार, इस चुनावी प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत 23 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी होने के साथ होगी। इसी दिन से नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

  • नामांकन की अंतिम तिथि: 30 अप्रैल 2026 तक प्रत्याशी अपना पर्चा भर सकेंगे।
  • नामांकन पत्रों की जांच: 2 मई 2026 को आयोग द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जाएगी।
  • नाम वापसी की तिथि: 4 मई 2026 तक उम्मीदवार स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले सकेंगे।
  • मतदान की तारीख: 12 मई 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे।
  • मतगणना और परिणाम: 12 मई की शाम 5 बजे से ही वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

विधानसभा कोटे का अंकगणित और विधायकों की भूमिका

​विधान परिषद की यह सीट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (Assembly Constituency) कोटे के अंतर्गत आती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस चुनाव में आम जनता सीधे तौर पर मतदान नहीं करती, बल्कि बिहार विधानसभा के निर्वाचित सदस्य यानी विधायक मतदाता होते हैं। विधानसभा में वर्तमान दलीय स्थिति और गठबंधन के संख्या बल के आधार पर ही हार-जीत का फैसला तय होता है।

​चूंकि यह एक एकल सीट का चुनाव है, इसलिए जिस गठबंधन या दल के पास बहुमत का आंकड़ा होगा, उसका पलड़ा भारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, बिहार की राजनीति में कई बार ऐसे मौकों पर अंतरात्मा की आवाज और गुप्त मतदान के दौरान होने वाले उलटफेरों की अपनी एक लंबी दास्तां रही है। सत्ताधारी खेमे के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न है, वहीं विपक्ष भी किसी मजबूत चेहरे को उतारकर सत्ता पक्ष की एकजुटता को चुनौती देने की फिराक में है।

राजनैतिक विसात और उम्मीदवारों की तलाश

​निर्वाचन आयोग की घोषणा के तुरंत बाद पटना स्थित विभिन्न दलों के मुख्यालयों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। मंगल पांडेय की यह सीट किस दल के खाते में जाएगी और चेहरा कौन होगा, इसे लेकर अटकलें तेज हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष किसी ऐसे नेता को मौका दे सकता है जो जातीय समीकरणों को साधने में सक्षम हो या जिसे संगठन के कार्यों में पुरस्कृत करना हो।

​वहीं, कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि इस सीट का उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति को सदन में भेजने के लिए किया जा सकता है जो वर्तमान सरकार में शामिल है लेकिन फिलहाल किसी भी सदन का सदस्य नहीं है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन भी इस उपचुनाव को केवल एक सीट की लड़ाई के तौर पर नहीं देख रहा है। विपक्ष इसे आने वाले समय की राजनैतिक दिशा और सत्ता पक्ष की घेराबंदी करने के एक अवसर के रूप में देख रहा है। 23 अप्रैल को नामांकन शुरू होने के साथ ही यह साफ हो पाएगा कि इस एक कुर्सी के लिए कितनी कड़ी जंग होने वाली है।

सुरक्षा और प्रशासनिक मुस्तैदी

​12 मई को होने वाले मतदान को लेकर जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। मतदान की प्रक्रिया बिहार विधानसभा परिसर के भीतर ही संपन्न कराई जाएगी, जहाँ सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहेंगे। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में संपन्न कराने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और पूरी वोटिंग प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी होगी।

​मतदान के तुरंत बाद मतगणना की व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी भी तरह की आशंका या गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। विधायकों के लिए मतदान की प्रक्रिया गोपनीय होगी। निर्वाचन आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चुनाव से जुड़ी अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

उच्च सदन में प्रतिनिधित्व का महत्व

​बिहार विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय व्यवस्था का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जहाँ विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और विद्वान लोग नीति-निर्माण में अपना योगदान देते हैं। मंगल पांडेय की सीट का खाली होना उच्च सदन में एक प्रभावी आवाज की अनुपस्थिति को दर्शाता था। अब निर्वाचन आयोग की इस पहल से यह कमी दूर होने वाली है।

​इस उपचुनाव का परिणाम भले ही सरकार के स्थायित्व पर तत्काल कोई असर न डाले, लेकिन यह राजनैतिक संदेश देने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मई की भीषण गर्मी के बीच बिहार की राजनैतिक तपिश भी अब अपने चरम पर होगी। 12 मई की शाम जब वोटों की गिनती होगी, तब यह साफ होगा कि मंगल पांडेय की विरासत को विधान परिषद में आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी किसे मिलती है। फिलहाल, पटना से लेकर दिल्ली तक इस एक सीट के लिए राजनैतिक शतरंज की बिसात बिछाई जा चुकी है।

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