​बिहार को मिला अंग का ‘सम्राट’: 37 साल बाद पूर्वी बिहार का राजतिलक

भागलपुर। बिहार की सत्ता के केंद्र में आज एक ऐसा नाम स्थापित हो गया है जिसकी जड़ें ‘अंगजनपद’ की मिट्टी में गहराई तक धंसी हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का शपथ ग्रहण केवल एक राजनैतिक घटना नहीं है, बल्कि यह पूर्वी बिहार के गौरव की पुनर्स्थापना का क्षण है। करीब 37 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, बिहार की कमान एक बार फिर पूर्वी बिहार के एक ऐसे बेटे के हाथ में आई है जो न केवल यहाँ की समस्याओं को समझता है, बल्कि यहाँ की माटी की बोली ‘अंगिका’ में जनता से सीधा संवाद भी करता है। मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड अंतर्गत लखनपुर गांव के रहने वाले सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना पूरे अंग प्रदेश, कोसी और सीमांचल के लिए उत्सव का विषय बन गया है। राजनैतिक गलियारों में इसे ‘अंग के सम्राट’ का उदय कहा जा रहा है। 15 अप्रैल 2026 की यह सुबह भागलपुर, बांका, मुंगेर और खगड़िया के उन लाखों कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीदों का नया सवेरा लेकर आई है, जिन्होंने दशकों तक अपने क्षेत्र से एक सशक्त नेतृत्व का सपना देखा था।

अंग और कोसी-सीमांचल का साझा ‘सम्राट’

​सम्राट चौधरी की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘अंगभाषी’ पहचान है। वे जब जनता के बीच जाते हैं, तो अपनी सहज ‘हमभाषी’ शैली (अंगिका और स्थानीय बोलियों का मिश्रण) से कोसी और सीमांचल के लोगों को भी उसी गहराई से जोड़ लेते हैं जैसे पूर्वी बिहार के लोगों को। कूटनीतिक और सांगठनिक स्तर पर सम्राट को केवल मुंगेर या भागलपुर का नेता मानना भूल होगी; वे वास्तव में उस पूरे बेल्ट का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ गंगा और कोसी का संगम होता है।

​अंग प्रदेश के कार्यकर्ताओं का मानना है कि नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी ही वह चेहरा हैं जिनके पास बिहार को विकसित बनाने का एक स्पष्ट विजन है। उनकी कार्यशैली में वह आक्रामकता है जो युवाओं को आकर्षित करती है और वह संजीदगी है जो बुजुर्गों को भरोसा दिलाती है। भागलपुर जिला परिषद के सदस्य गौरव राय ने उनके मनोनयन पर बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे अंग वासियों के लिए गर्व की बात है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने एक ऐसे चेहरे को मौका दिया है जो बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की क्षमता रखता है।

इतिहास के पन्नों में पूर्वी बिहार का दबदबा

​बिहार की राजनीति में पूर्वी बिहार का इतिहास अत्यंत स्वर्णिम रहा है, लेकिन 1989 के बाद यहाँ एक बड़ा नेतृत्व शून्य पैदा हो गया था। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से पहले इस क्षेत्र ने बिहार को तीन दिग्गज मुख्यमंत्री दिए थे:

  • श्रीकृष्ण सिंह: बिहार के पहले मुख्यमंत्री और आधुनिक बिहार के निर्माता। उनका जन्म तत्कालीन मुंगेर (अब शेखपुरा) में हुआ था। वे 1961 तक सत्ता के शीर्ष पर रहे।
  • चन्द्रशेखर सिंह: जमुई में जन्मे और बांका को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले चन्द्रशेखर सिंह ने 1983 से 1985 तक बिहार का नेतृत्व किया। वे बांका से सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे।
  • भागवत झा आजाद: भागलपुर के ‘शेर’ कहे जाने वाले भागवत झा आजाद 1988 से 1989 तक मुख्यमंत्री रहे। उनकी राजनैतिक कर्मभूमि भागलपुर ही रही और उन्होंने पाँच बार यहाँ से लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया।

​भागवत झा आजाद के इस्तीफे के बाद पूर्वी बिहार के हाथ से सत्ता की चाबी फिसल गई थी। अब 37 साल बाद सम्राट चौधरी ने उस विरासत को संभाला है। यह संयोग ही है कि इससे पहले भी बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा) इसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते थे, लेकिन अब सम्राट ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर इस क्षेत्र का कद और भी बढ़ा दिया है।

विरासत में मिली राजनीति और संघर्ष का पाठ

​सम्राट चौधरी के रगों में राजनीति का रक्त दौड़ता है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के उन गिने-चुने समाजवादियों में से हैं जिन्होंने कभी हार नहीं मानी। शकुनी चौधरी तारापुर से आठ बार चुनाव लड़े और छह बार जीत हासिल की। हालांकि, उन्हें भागलपुर, बांका और खगड़िया लोकसभा क्षेत्रों में कई बार हार का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार को कभी अंत नहीं माना। सम्राट चौधरी ने अपने पिता के लिए इन तमाम क्षेत्रों में धूप और धूल के बीच जमकर प्रचार किया था। यही कारण है कि आज भागलपुर की गलियों से लेकर बांका के पहाड़ों तक सम्राट के व्यक्तिगत समर्थक मौजूद हैं।

​उनकी माता पार्वती देवी भी तारापुर का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। सम्राट चौधरी खुद 2025 में पहली बार तारापुर से विधायक बने, लेकिन इससे पहले वे खगड़िया के परबत्ता क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उनकी यह भौगोलिक विविधता उन्हें पूरे पूर्वी बिहार का एक सर्वमान्य नेता बनाती है। वे केवल एक सीट के विधायक नहीं, बल्कि पूरे अंग प्रदेश के अभिभावक के रूप में देखे जा रहे हैं।

अंगजनपद में जश्न का माहौल: अकबरनगर से नवगछिया तक हर्ष

​सम्राट चौधरी के नेता चुने जाने की खबर जैसे ही भागलपुर और आसपास के इलाकों में फैली, जश्न का माहौल बन गया। अकबरनगर नगर पंचायत में एनडीए कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सम्राट युग’ का प्रारंभ बताया। भाजपा नेता सतीश कुमार उर्फ कन्हैया झा और ओमदत्त चौधरी ने कहा कि अब बिहार के स्वर्णिम विकास की बारी है। वहीं सुल्तानगंज में भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे अंग प्रदेश के लिए ‘ऐतिहासिक न्याय’ करार दिया।

​नवगछिया में पूर्व सांसद अनिल यादव और सीनेट सदस्य अजय कुशवाहा ने सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए कहा कि उनके अंग क्षेत्र से विशेष जुड़ाव का सीधा लाभ यहाँ के विकास कार्यों को मिलेगा। भागलपुर जिला अध्यक्ष संतोष कुमार और उनके सहयोगियों—अभय घोष, आलोक सिंह बंटू, देवेंदर चौधरी, और प्रीति शेखर—ने इसे भाजपा की सांगठनिक जीत बताया। नवगछिया जिला प्रभारी पवन मिश्रा ने कहा कि पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री होना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी अब बिहार में अपने दम पर विकास की नई लहर लाने के लिए तैयार है।

विकसित बिहार का ‘अंग’ मॉडल

​सम्राट चौधरी से अंग प्रदेश की जनता को बहुत सारी अपेक्षाएं हैं। भागलपुर में हवाई सेवा की शुरुआत, सिल्क सिटी को वैश्विक पहचान दिलाना और कोसी-सीमांचल में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान उनके एजेंडे में शीर्ष पर रहने की उम्मीद है। 29 सितंबर 2025 को जब वे नीतीश कुमार के साथ सन्हौला आए थे, तब भी उन्होंने अंग प्रदेश के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी।

​अब जब वे खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं, तो माना जा रहा है कि ‘अंगजनपद’ की उपेक्षा का दौर समाप्त होगा। The Voice of Bihar (VOB) के विश्लेषण के अनुसार, सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना भाजपा की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह पूर्वी बिहार को अपना सबसे मजबूत गढ़ बनाना चाहती है। अंगभाषी होने के नाते वे लोगों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझते हैं और यही उनकी सफलता का सबसे बड़ा सूत्र होगा।

बदलाव की ओर बढ़ता बिहार

​15 अप्रैल की यह दोपहर लोकभवन में हो रहे शपथ ग्रहण के साथ ही एक नई राजनैतिक कहानी लिख रही है। सम्राट चौधरी के सामने अब पूरे बिहार को साथ लेकर चलने की चुनौती है, लेकिन उनके पास अंग प्रदेश का वह अटूट समर्थन है जो किसी भी नेता के लिए सबसे बड़ी ताकत होती है। श्रीकृष्ण सिंह, चन्द्रशेखर सिंह और भागवत झा आजाद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए सम्राट चौधरी को अब यह साबित करना है कि वे केवल अंग प्रदेश के नहीं, बल्कि पूरे बिहार के ‘विकसित सम्राट’ हैं।

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