‘वुमनिया’ से बदल रही तस्वीर: महिला उद्यमियों को मिल रहा डिजिटल बाजार, लोकल से ग्लोबल तक पहुंच

पटना: बिहार की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प अब डिजिटल युग में नई पहचान बना रहे हैं। ‘वुमनिया’ पहल के जरिए राज्य की महिला उद्यमियों को ऐसा मंच मिला है, जहां उनके बनाए उत्पाद न केवल देशभर में बल्कि वैश्विक बाजार तक पहुंच रहे हैं। यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

लोकल कला को मिला ग्लोबल प्लेटफॉर्म

बिहार की महिलाएं वर्षों से मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कढ़ाई, टिकुली आर्ट, सिक्की शिल्प, जूट, बांस और अन्य पारंपरिक उत्पाद तैयार करती रही हैं। पहले इन उत्पादों को उचित बाजार और सही मूल्य नहीं मिल पाता था। बिचौलियों के कारण महिलाओं को उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिलता था।

अब ‘वुमनिया’ के जरिए इन उत्पादों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर लाकर सीधे खरीदारों से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाएं अपने उत्पादों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे बेच पा रही हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता और समय पर भुगतान

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पूरा लेन-देन डिजिटल और पारदर्शी होता है।

  • उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग
  • सीधे सरकारी विभागों और संस्थानों से खरीद
  • समय पर भुगतान

इन सभी सुविधाओं ने महिला उद्यमियों के काम को आसान बना दिया है। अब उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार या एजेंट पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

31 लोकल उत्पादों को मिला राष्ट्रीय बाजार

बिहार के करीब 20 जिलों के 31 प्रकार के स्थानीय उत्पाद GeM पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • मधुबनी की पेंटिंग
  • सीतामढ़ी की सिक्की कला
  • दरभंगा का मखाना
  • कटिहार के जूट उत्पाद
  • भागलपुर की सिल्क साड़ियां
  • बांका के सिल्क सूट

इन उत्पादों को अब केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य संस्थाओं द्वारा खरीदा जा रहा है।

महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी

‘वुमनिया’ पहल के तहत महिला उद्यमियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार—

  • 2.10 लाख से अधिक महिला उद्यमी पंजीकृत हुई हैं
  • कुल 13.7 लाख ऑर्डर प्राप्त हुए
  • 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध दिए गए

यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 27.60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है, जो इस पहल की सफलता को साफ दिखाता है।

सरकारी खरीद में बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी

GeM पोर्टल पर महिला उद्यमियों को कुल ऑर्डर का 5.6 प्रतिशत हिस्सा मिला है। यह निर्धारित 3 प्रतिशत लक्ष्य से काफी अधिक है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है और यह पहल जमीनी स्तर पर असर भी दिखा रही है।

किन उत्पादों की हो रही बिक्री

‘वुमनिया’ के तहत कई तरह के उत्पाद शामिल किए गए हैं—

  • हस्तशिल्प और हैंडीक्राफ्ट
  • हथकरघा वस्त्र
  • किराना और घरेलू सामान
  • कार्यालय उपयोगी सामग्री
  • व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद

इन उत्पादों की विविधता ने महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं और उन्हें अपने कौशल को व्यवसाय में बदलने का मौका दिया है।

ग्रामीण महिलाओं को मिला सबसे बड़ा लाभ

इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को मिला है।
पहले जहां वे सीमित बाजार में ही उत्पाद बेच पाती थीं, अब वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के ग्राहकों तक पहुंच बना रही हैं।

इससे—

  • उनकी आय में वृद्धि हुई है
  • आत्मनिर्भरता बढ़ी है
  • रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं

आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

‘वुमनिया’ सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता बन चुका है। यह पहल उन्हें घर बैठे व्यवसाय करने का अवसर देती है और उनके हुनर को पहचान दिलाती है।

बिहार की महिलाएं अब केवल पारंपरिक शिल्प तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। ‘वुमनिया’ जैसी पहल ने यह साबित कर दिया है कि सही प्लेटफॉर्म मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।

लोकल कला को ग्लोबल बाजार से जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में और भी बड़े बदलाव का आधार बन सकती है, जहां हर महिला उद्यमी अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बनेगी।

  • ये भी पढ़े..

    भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: पूर्व रेलवे में ₹405 करोड़ की सिग्नलिंग आधुनिकीकरण परियोजना को मंजूरी, 32 स्टेशनों पर लगेगी अत्याधुनिक तकनीक

    Share Add as a preferred…

    भागलपुर में नशे के कारोबार पर पुलिस का बड़ा प्रहार, गोराडीह से 8.25 किलो गांजा बरामद, तस्कर की तलाश तेज

    Share Add as a preferred…