
गोपालगंज। बिहार की सत्ताधारी राजनीति के कद्दावर चेहरों में शुमार कुचायकोट के जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय के विरुद्ध कानून का शिकंजा अब बेहद कस चुका है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 की सुबह गोपालगंज जिला पुलिस ने विधायक की गिरफ्तारी के लिए एक साथ कई मोर्चों पर बड़ी सैन्य जैसी कार्रवाई शुरू कर दी। कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट निर्गत होने के बाद पुलिस की आधा दर्जन से अधिक टीमें विधायक और उनके सहयोगियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। सोमवार की अल सुबह जब जिले में हलचल शुरू ही हुई थी, तभी पुलिस के भारी जमावड़े ने विधायक के पैतृक आवास तुलसिया और उनके हथुआ स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को घेर लिया। हालांकि, पुलिस की इस ‘प्रिसिजन स्ट्राइक’ के बावजूद विधायक और उनके भाई सतीश पांडेय चकमा देकर फरार होने में सफल रहे। भू-माफियाओं को संरक्षण देने और बाहुबल के दम पर जमीनों पर कब्जे के प्रयास के संगीन आरोपों में घिरे विधायक के लिए अब राहें मुश्किल होती जा रही हैं। जिले के कई थानों की पुलिस को इस ऑपरेशन में लगाया गया है, जिसने पूरे गोपालगंज में एक प्रशासनिक युद्ध जैसा माहौल पैदा कर दिया है।
तुलसिया से हथुआ तक खाकी का पहरा: सुबह-सुबह हुई घेराबंदी
सोमवार की सुबह गोपालगंज पुलिस के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी। जैसे ही सूरज की पहली किरण ने दस्तक दी, पुलिस की गाड़ियों के साइरन ने तुलसिया गांव के सन्नाटे को चीर दिया। विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय के तुलसिया स्थित आवास पर जब पुलिस ने दबिश दी, तो वहां केवल सन्नाटा पसरा हुआ था। पुलिस ने घर के एक-एक कोने की तलाशी ली, लेकिन विधायक और उनके भाई सतीश पांडेय वहां मौजूद नहीं मिले। इसके तुरंत बाद पुलिस का काफिला हथुआ की ओर मुड़ा, जहाँ विधायक के पेट्रोल पंप और वहां बने आवासीय परिसर पर छापेमारी शुरू की गई।
हथुआ में भी पुलिस को खाली हाथ ही मलना पड़ा, क्योंकि छापेमारी की भनक शायद आरोपियों को पहले ही लग चुकी थी। पुलिस अधिकारियों ने वहां मौजूद कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की और विधायक के आने-जाने के रास्तों और समय के बारे में जानकारी जुटाई। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों को अपनी जांच के दायरे में लिया है। इस कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें न केवल स्थानीय थानों की पुलिस, बल्कि जिला मुख्यालय से भेजे गए विशेष जवान भी शामिल थे। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार के विरोध की स्थिति से निपटा जा सके।
भू-माफिया कनेक्शन: एक अप्रैल की वारदात ने बदली तस्वीर
विधायक पप्पू पांडेय पर चल रही इस बड़ी कार्रवाई की जड़ें एक अप्रैल 2026 को कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ी हैं। आरोप है कि बेलवा गांव की 93 एकड़ की एक विवादित और बेशकीमती जमीन पर कब्जे के लिए विधायक ने अपने गुर्गों और भू-माफियाओं को न केवल उकसाया, बल्कि उन्हें सीधा संरक्षण भी प्रदान किया। उस दिन स्कॉर्पियो सवार अपराधियों ने जमीन के मैनेजर पर गोलियां चलाई थीं और दहशत का माहौल बनाया था।
कुचायकोट पुलिस ने इस मामले में जब जांच शुरू की, तो कड़ियाँ सीधे विधायक और उनके भाई सतीश पांडेय तक जा पहुँचीं। पुलिस को पुख्ता सबूत मिले कि अपराधियों का मनोबल बढ़ाने में विधायक की सीधी भूमिका थी। इस मामले में पुलिस ने पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिन्होंने पूछताछ में विधायक के नाम का खुलासा किया था। राजनीतिक रसूख की आड़ में चल रहे इस ‘लैंड ग्रैबिंग’ सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस अब कोई ढील बरतने के मूड में नहीं है। विधायक पर आरोप है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर करोड़ों की संपत्तियों पर अवैध कब्जे की पटकथा लिखते रहे हैं, जिसे प्रशासन ने अब चुनौती दी है।
कोर्ट का वारंट और सीए राहुल तिवारी की संलिप्तता
कानूनी प्रक्रियाओं के तहत गोपालगंज पुलिस ने जब पुख्ता साक्ष्य जुटा लिए, तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कुचायकोट पुलिस की रिपोर्ट और अपराधियों के बयानों को आधार मानते हुए कोर्ट ने विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और उनके सहयोगी राहुल तिवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। राहुल तिवारी पर आरोप है कि वह विधायक के वित्तीय और प्रशासनिक संपर्कों का प्रबंधन करता था और भू-माफियाओं के साथ होने वाली डील में सक्रिय भूमिका निभाता था।
वारंट जारी होने के बाद से ही ये तीनों फरार चल रहे हैं। पुलिस की फरारी रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये लोग जानबूझकर कानून से भाग रहे हैं। वारंट हाथ में आते ही गोपालगंज एसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी दबाव के बिना त्वरित कार्रवाई की जाए। पुलिस अब इन तीनों के छिपने के संभावित ठिकानों, जैसे उनके करीबियों के घर और अन्य जिलों में स्थित फ्लैटों पर नजर रख रही है। वारंट के बाद पुलिस के पास यह अधिकार है कि वे बिना किसी पूर्व सूचना के विधायक के किसी भी परिसर में प्रवेश कर सकते हैं और उन्हें हिरासत में ले सकते हैं।
प्रशासनिक सख्ती: एसपी का संदेश और पुलिस का मोर्चा
गोपालगंज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी अपराधी को बख्शने वाले नहीं हैं, चाहे उसका राजनीतिक ओहदा कितना भी बड़ा क्यों न हो। छापेमारी के दौरान पुलिस ने जिस तरह की तत्परता दिखाई है, वह यह दर्शाती है कि शासन अब बाहुबल के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुका है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार चल रहे विधायक और उनके भाई की गिरफ्तारी के लिए विशेष कार्य बल (STF) और स्थानीय इंटेलिजेंस का भी सहारा लिया जा रहा है।
कुचायकोट थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 430/25 के तहत पुलिस अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो यदि विधायक अगले 48 घंटों के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो पुलिस कोर्ट में कुर्की-जब्ती (Property Attachment) के लिए आवेदन दे सकती है। यह विधायक के राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा झटका होगा क्योंकि इससे न केवल उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होगी, बल्कि उनके व्यावसायिक हितों को भी नुकसान पहुँचेगा। छापेमारी में जिले के कई थानों, जैसे हथुआ, कुचायकोट और मीरगंज की पुलिस को एक साथ उतारना यह बताता है कि पुलिस इस ऑपरेशन को ‘फ्लॉप’ नहीं होने देना चाहती।
इलाके में तनावपूर्ण सन्नाटा और राजनीतिक हलचल
जेडीयू विधायक पप्पू पांडेय के ठिकानों पर हुई इस छापेमारी के बाद गोपालगंज के राजनीतिक गलियारों में भूकंप जैसी स्थिति है। समर्थक इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक साजिश’ बता रहे हैं, जबकि आम जनता पुलिस के इस कदम को न्याय की ओर बढ़ता हुआ एक साहसिक प्रयास मान रही है। तुलसिया और हथुआ में समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी, लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सत्ताधारी दल के विधायक पर इस तरह की दबिश बिहार की राजनीति में एक नए बदलाव का संकेत है, जहाँ अपराध और राजनीति के गठजोड़ को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
इलाके में चर्चा इस बात की भी है कि विधायक आखिर इतनी जल्दी फरार कैसे हो गए? क्या उन्हें छापेमारी की सूचना पहले ही मिल गई थी? पुलिस अब अपने ही भीतर के गुप्त सूचना तंत्र की भी जांच कर रही है ताकि किसी भी तरह की ‘लीकेज’ को रोका जा सके। फिलहाल, विधायक और उनके साथियों की तलाश जारी है और पुलिस की कई टीमें पड़ोसी जिलों और राज्यों में भी दबिश दे रही हैं। गोपालगंज की सड़कों पर दौड़ती पुलिस की गाड़ियां और विधायक के घर के बाहर तैनात सशस्त्र जवान यह गवाही दे रहे हैं कि इस बार कानून की लड़ाई आर-पार के मूड में है। आने वाले 24 घंटे इस केस के भविष्य को तय करेंगे, क्योंकि पुलिस की अगली चाल विधायक को किसी भी सूरत में सलाखों के पीछे पहुँचाने की है।


