​नालंदा में शराब के विवाद ने ली अधेड़ की जान: बड़गांव मुशहरी में पीट-पीटकर हत्या, पड़ोसी पर लगा संगीन आरोप

नालंदा। बिहार के नालंदा जिले में पूर्ण शराबबंदी के दावों के बीच एक बार फिर शराब के विवाद ने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम के अंधेरे में धकेल दिया है। नालंदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़गांव मुशहरी गांव में रविवार, 12 अप्रैल 2026 की देर शाम एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहाँ मामूली कहासुनी के बाद एक अधेड़ व्यक्ति की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 55 वर्षीय चंदेश्वर मांझी के रूप में हुई है, जो अपने परिवार का इकलौता सहारा था। यह घटना उस समय हुई जब गांव के ही एक पड़ोसी के साथ शराब पीने और बेचने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। पुलिस की प्राथमिक जांच और मृतक के परिजनों के बयानों ने इलाके में चल रहे अवैध शराब के कारोबार और उससे पनपने वाली हिंसक प्रवृत्तियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। घटना के बाद से ही आरोपी पक्ष गांव छोड़कर फरार है, जबकि पीड़ित परिवार का न्याय के लिए रो-रोकर बुरा हाल है। सोमवार की सुबह जब पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई, तो गांव में तनाव और शोक का मिला-जुला वातावरण देखा गया।

मेहनत-मजदूरी से चलता था घर, रविवार की छुट्टी बनी काल

​मृतक चंदेश्वर मांझी, जो मूल रूप से स्व तुलसी मांझी का पुत्र था, अपनी आजीविका चलाने के लिए काफी संघर्ष कर रहा था। उसके पुत्र गोपाल कुमार ने भारी मन से बताया कि उसके पिता गांव से दूर एक होटल में रहकर मेहनत-मजदूरी का काम करते थे। वे एक सीधे-सादे इंसान थे जिनका उद्देश्य केवल अपने परिवार का पेट पालना था। अक्सर वे होटल में ही रुकते थे, लेकिन संयोगवश रविवार को होटल बंद होने के कारण वे अपने घर बड़गांव मुशहरी आए हुए थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अपने ही गांव और अपने ही घर के पास उनकी जिंदगी का सफर इस तरह से समाप्त हो जाएगा।

​परिजनों के अनुसार, रविवार की शाम करीब सात-आठ बजे के आसपास चंदेश्वर घर से बाहर निकले थे। उसी दौरान उनका सामना पड़ोसी वीरेश मांझी से हुआ। गोपाल का आरोप है कि वीरेश मांझी लंबे समय से इलाके में शराब बेचने और पिलाने के अवैध धंधे में संलिप्त है। चंदेश्वर जब वीरेश के घर के पास पहुँचे, तो वहां शराब के लेन-देन या पुरानी किसी रंजिश को लेकर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि वीरेश मांझी ने अपने कुछ अज्ञात सहयोगियों को बुला लिया और चंदेश्वर पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला बोल दिया।

तड़पते रहे चंदेश्वर, अस्पताल पहुँचने से पहले ही थमी सांसें

​प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का कहना है कि हमला इतना अचानक और भीषण था कि चंदेश्वर को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आरोपियों ने उनके सिर और शरीर के नाजुक हिस्सों पर डंडों से कई वार किए। चंदेश्वर की चीखें सुनकर जब उनके परिजन और ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, तो हमलावर उन्हें मरणासन्न स्थिति में छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए वहां से भाग निकले। जमीन पर लहूलुहान पड़े चंदेश्वर को आनन-फानन में ग्रामीणों के सहयोग से इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।

​अस्पताल पहुँचते ही ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने उनकी स्थिति का परीक्षण किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने चंदेश्वर मांझी को ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल पहुँचने से पहले मृत) घोषित कर दिया। इस खबर ने परिजनों को पूरी तरह से तोड़ दिया। गोपाल कुमार ने बताया कि आरोपियों ने जिस क्रूरता के साथ उसके पिता की हत्या की है, वह यह दर्शाता है कि उन्हें कानून का जरा भी डर नहीं है। चंदेश्वर की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया।

थानाध्यक्ष का खुलासा: सुबह के विवाद ने शाम को लिया खूनी रूप

​नालंदा थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने इस पूरी घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुलिस को प्रारंभिक जांच में कुछ अहम सुराग मिले हैं। थानाध्यक्ष के अनुसार, विवाद की जड़ें रविवार की सुबह ही जम चुकी थीं। जानकारी मिली है कि रविवार सुबह भी चंदेश्वर और वीरेश मांझी के बीच शराब पीने को लेकर कुछ अनबन हुई थी। उस समय मामला शांत हो गया था, लेकिन खुन्नस बाकी थी।

​शाम को आरोपी वीरेश मांझी शराब के नशे में धुत होकर चंदेश्वर के घर के पास गाली-गलौज कर रहा था। जब चंदेश्वर ने उसे अपनी हरकतों से बाज आने और अपशब्द न कहने को कहा, तो नशे में धुत वीरेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने इसे अपनी तौहीन समझा और अपने साथियों के साथ मिलकर चंदेश्वर पर धावा बोल दिया। थानाध्यक्ष ने पुष्टि की है कि यह पूरी घटना शराब के सेवन और उसके व्यापार से उपजे आपसी विवाद का परिणाम है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और वहां से कुछ साक्ष्य भी एकत्रित किए हैं जो मारपीट की पुष्टि करते हैं।

गांव से फरार आरोपी और पुलिस की छापेमारी

​हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी वीरेश मांझी और उसके सहयोगी गांव छोड़कर फरार हो गए हैं। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए रविवार रात से ही संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनके छिपने के स्थानों पर पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द सभी दोषियों को कानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा।

​वहीं दूसरी ओर, सोमवार की सुबह पुलिस ने शव का विधिवत पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चंदेश्वर की मौत सिर की गंभीर चोट से हुई है या आंतरिक अंगों में आई चोट के कारण। हालांकि, बाहरी चोटों के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। शव का पोस्टमार्टम कराकर दोपहर तक परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद गांव में गमगीन माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया।

अवैध शराब का कारोबार और सुरक्षा पर सवाल

​बड़गांव मुशहरी गांव की यह घटना एक बार फिर बिहार में शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगाती है। मृतक के पुत्र गोपाल ने खुलेआम आरोप लगाया है कि उसका पड़ोसी शराब बेचता है और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि शराबबंदी के बावजूद चोरी-छिपे शराब की बिक्री और सेवन जारी है, जिसके कारण अक्सर ऐसी हिंसक झड़पें होती रहती हैं।

​चंदेश्वर मांझी जैसे मेहनतकश इंसान की जान जाना पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। शराब के नशे में व्यक्ति अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो देता है और पड़ोसी होने के नाते जो रिश्ता सम्मान का होना चाहिए था, वह हत्या के खूनी खेल में बदल गया। नालंदा पुलिस के लिए अब यह चुनौती है कि वह न केवल इस मामले के आरोपियों को पकड़े, बल्कि इलाके में चल रहे शराब के अवैध अड्डों को भी ध्वस्त करे ताकि भविष्य में किसी और ‘चंदेश्वर’ को अपनी जान न गंवानी पड़े।

​मृतक चंदेश्वर अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, लेकिन उनके जाने से घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। गोपाल और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने जिला प्रशासन से मुआवजे और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और स्पीडी ट्रायल के जरिए आरोपियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया जाएगा। फिलहाल, गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है और अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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