​बेगूसराय में सर्च ऑपरेशन के दौरान बम धमाका: STF समेत 5 पुलिसकर्मी घायल

बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में अपराधियों के खिलाफ जारी एक बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जमीन के भीतर छिपाकर रखे गए एक शक्तिशाली देशी बम में जोरदार धमाका हो गया। यह घटना नावकोठी थाना क्षेत्र के वृंदावन गांव की है, जहाँ पुलिस की एक विशेष टीम दरभंगा लूटकांड से जुड़े सुरागों की तलाश में जुटी थी। इस अचानक हुए विस्फोट की चपेट में आने से एसटीएफ (STF) के तीन जवानों सहित कुल पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज दूर तक सुनाई दी और पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। घायलों को तत्काल बेगूसराय के सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। यह घटना दर्शाती है कि अपराधी अपनी लूट की संपत्ति को बचाने के लिए सुरक्षा बलों के खिलाफ किस हद तक घातक साजिशें रच रहे हैं।

दरभंगा लूटकांड और वृंदावन गांव का कनेक्शन

​इस पूरे मामले की जड़ें कुछ दिन पहले हुए चर्चित दरभंगा लूटकांड से जुड़ी हुई हैं। पुलिस की विशेष टीम इस मामले में अपराधियों के एक बड़े सिंडिकेट का पीछा कर रही थी। इसी क्रम में दो दिन पहले पुलिस ने नावकोठी थाना क्षेत्र के वृंदावन गांव के रहने वाले कुख्यात दीपक कुमार को उसके कई साथियों के साथ गिरफ्तार किया था। दीपक कुमार से हुई कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस के हाथ कई महत्वपूर्ण सुराग लगे थे।

​दीपक की निशानदेही पर पुलिस ने पहले ही वृंदावन गांव के एक बगीचे से साढ़े आठ किलो चांदी और लगभग डेढ़ सौ ग्राम सोना बरामद किया था। यह बरामदगी इस बात का संकेत थी कि लूट की बड़ी खेप इसी इलाके में छिपाई गई है। शनिवार को पुलिस टीम एक बार फिर आरोपी के घर और उसके पास स्थित बगीचे में सघन तलाशी के लिए पहुँची थी। पुलिस को उम्मीद थी कि जमीन के भीतर और भी सोना-चांदी या हथियार छिपाए गए हो सकते हैं। इसी उद्देश्य से ‘डॉग स्क्वॉड’ और खुदाई करने वाली टीम को भी साथ लिया गया था।

सर्च ऑपरेशन और अचानक हुआ जोरदार धमाका

​शनिवार की दोपहर जब एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बगीचे में ‘मेटल डिटेक्टर’ और खोजी कुत्तों की मदद से सर्च ऑपरेशन चला रही थी, तभी यह हादसा हुआ। पुलिस टीम एक संदिग्ध जगह पर खुदाई कर रही थी, जहाँ कुछ कीमती सामान होने का संदेह था। जैसे ही खुदाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी, जमीन के नीचे दबा हुआ एक देशी बम सक्रिय हो गया और उसमें भयानक विस्फोट हो गया।

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना तीव्र था कि आसपास की मिट्टी और बारूद के कण हवा में कई फीट ऊपर तक उछल गए। खुदाई कर रहे और पास खड़े पुलिसकर्मी इस अचानक हुए हमले को समझ पाते, तब तक वे इसकी चपेट में आ चुके थे। बताया जाता है कि अपराधियों ने लूट के माल की सुरक्षा के लिए या पुलिस को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से इन बमों को गड्ढों में दबाकर रखा था। विस्फोट के बाद बगीचे में धुएं का गुबार छा गया और सर्च ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

घायल पुलिसकर्मियों का विवरण और स्वास्थ्य स्थिति

​इस विस्फोट में जो पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, उनमें सहायक अवर निरीक्षक (ASI) विपिन कुमार ओझा और एक महिला प्रशिक्षु अवर निरीक्षक (SI) गुड़िया कुमारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनके अलावा एसटीएफ के तीन जवान भी इस धमाके की चपेट में आए। धमाके के कारण पुलिसकर्मियों के चेहरे, हाथ और पैर बारूद की गर्मी से मामूली रूप से झुलस गए हैं।

​घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को पुलिस के अन्य वाहनों से सदर अस्पताल पहुँचाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी का प्राथमिक उपचार किया। घायल एएसआई विपिन ओझा ने अस्पताल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि वे लोग जमीन की गहराई से सुराग तलाश रहे थे, तभी अचानक पैरों के पास जोरदार धमाका हुआ। राहत की बात यह रही कि किसी भी पुलिसकर्मी को जानलेवा चोट नहीं आई है और मरहम-पट्टी के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

भारी मात्रा में हथियार और लूट के माल की बरामदगी के संकेत

​सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस सर्च ऑपरेशन का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। बगीचे और आरोपी के घर के आसपास के इलाकों से केवल सोना-चांदी ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में अवैध हथियार भी बरामद होने की खबर है। हालांकि, पुलिस के वरीय अधिकारी अभी हथियारों की सटीक संख्या और प्रकार के बारे में आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह दरभंगा लूटकांड को अंजाम देने वाला मुख्य ठिकाना था।

​अपराधियों ने वृंदावन गांव के इस सुदूर बगीचे को अपना ‘सेफ हाउस’ बना रखा था। जिस तरह से यहाँ बम दबाकर रखे गए थे, उससे स्पष्ट है कि अपराधी यहाँ लंबे समय तक रुकने और अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने की तैयारी में थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या बगीचे में और भी ऐसे ‘ट्रैप’ या बम दबाए गए हैं। सुरक्षा को देखते हुए बम निरोधक दस्ते (BDDS) को भी मौके पर बुला लिया गया है।

पुलिस की बढ़ी चौकसी: कार्रवाई अभी भी जारी

​विस्फोट की घटना के बाद वृंदावन गांव और आसपास के क्षेत्रों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और बगीचे के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर नावकोठी थाना पुलिस और एसटीएफ की टीम अब और अधिक सावधानी बरत रही है। डॉग स्क्वॉड की मदद से उन स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है जहाँ मिट्टी ताजी खोदी गई प्रतीत होती है।

​इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली के समक्ष नई चुनौतियां पेश कर दी हैं। अब अपराधियों द्वारा ‘लैंडमाइन्स’ की तर्ज पर देशी बमों का उपयोग सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस चुनौती से पीछे नहीं हटेंगे और जब तक लूट का एक-एक सामान और इसमें शामिल सभी अपराधी पकड़े नहीं जाते, तब तक यह ऑपरेशन जारी रहेगा। दरभंगा पुलिस की टीम भी बेगूसराय पहुँच चुकी है ताकि बरामद किए गए सामान का मिलान लूटी गई सूची से किया जा सके।

ग्रामीणों में दहशत और सुरक्षा की मांग

​वृंदावन गांव में हुए इस बम धमाके के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। आम तौर पर शांत रहने वाले इस इलाके में अचानक पुलिस की गाड़ियों की गूँज और फिर बम धमाके ने लोगों को डरा दिया है। ग्रामीण इस बात से हैरान हैं कि उनके पड़ोस में रहने वाला दीपक कुमार इतने बड़े आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा था और उसने अपने बगीचे को ‘बारूद का ढेर’ बना रखा था।

​स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे गांव की सघन तलाशी ली जाए ताकि भविष्य में किसी निर्दोष ग्रामीण या मवेशी को ऐसे दबे हुए बमों से नुकसान न पहुँचे। पुलिस ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि वे पूरी सावधानी बरत रहे हैं और किसी भी ग्रामीण को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा। फिलहाल, बगीचे के चारों ओर घेराबंदी (Cordon off) कर दी गई है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

निष्कर्ष: अपराध के खिलाफ निर्णायक युद्ध

​बेगूसराय की यह घटना बिहार पुलिस के साहस और उनके सामने आने वाले खतरों की एक छोटी सी झलक है। दरभंगा लूटकांड का पर्दाफाश करना पुलिस के लिए सम्मान की लड़ाई बन गई है। पांच पुलिसकर्मियों का घायल होना इस बात का प्रमाण है कि अपराधी अब सीधे पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। लेकिन, जिस तरह से बेगूसराय पुलिस और एसटीएफ ने इस हमले के बावजूद अपना मनोबल गिरने नहीं दिया और ऑपरेशन को जारी रखा, वह सराहनीय है।

​आने वाले घंटों में वृंदावन गांव से और भी बड़ी बरामदगी की संभावना जताई जा रही है। दीपक कुमार और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों से पूछताछ जारी है, जिससे बिहार के कई अन्य लूटकांडों के राज खुलने की भी उम्मीद है। बेगूसराय के सदर अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पुलिसकर्मी फिर से अपनी ड्यूटी पर लौटने को तैयार हैं, जो अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है।

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