
सीवान। बिहार के सीवान जिले में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब एक युवक न्याय की गुहार लगाते हुए सैकड़ों फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर जा चढ़ा। यह हाई-वोल्टेज ड्रामा किसी फिल्मी दृश्य जैसा लग रहा था, लेकिन इसके पीछे एक परिवार का गहरा दर्द और व्यवस्था के खिलाफ गहरा आक्रोश छिपा था। मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर गांव का है, जहाँ सैफ उर्फ लालू नाम का युवक अपने छोटे भाई की संदिग्ध मौत के मामले में इंसाफ की मांग कर रहा था। टावर के नीचे खड़े उसके परिजन “जस्टिस फॉर अनवर” लिखे बैनर और पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस घटना ने एक बार फिर सीवान मंडल कारा की सुरक्षा और वहां होने वाली कैदियों की मौत के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। पुलिस प्रशासन के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही, क्योंकि युवक ने टावर से नीचे उतरने के लिए ठोस कार्रवाई की शर्त रखी थी।
मोहद्दीपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा: जब टावर पर चढ़ा सैफ
शनिवार की सुबह मोहद्दीपुर गांव के लोग तब हैरान रह गए जब उन्होंने असलम मियां के बेटे सैफ उर्फ लालू को मोबाइल टावर की चोटी पर चढ़ते देखा। देखते ही देखते वहां ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। सैफ टावर की ऊंचाई से चिल्ला-चिल्लाकर अपने भाई फैज अनवर अली के लिए न्याय की मांग कर रहा था। टावर के नीचे उसके परिवार के सदस्य, महिलाएं और बच्चे हाथों में तख्तियां लिए विलाप कर रहे थे। उनका एक ही नारा था— “अनवर को न्याय दो।”
ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय मुफस्सिल थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से सैफ को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह टस से मस होने को तैयार नहीं था। सैफ का कहना था कि उसके भाई की मौत के महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। करीब घंटों तक चले इस तनावपूर्ण माहौल के बाद, पुलिस के काफी अनुनय-विनय और निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद सैफ को सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।
क्या है पूरा मामला: 2025 की वो काली रात
इस पूरे विरोध प्रदर्शन की जड़ें पिछले साल यानी वर्ष 2025 की एक घटना से जुड़ी हुई हैं। सैफ का छोटा भाई, फैज अनवर अली उर्फ बिहारी, चोरी के एक मामले में नामजद था। मुफस्सिल थाना पुलिस ने उसे 31 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में सीवान मंडल कारा भेजा था। लेकिन जेल जाने के महज दो दिन के भीतर, यानी 2 अगस्त 2025 को, जेल प्रशासन ने सूचना दी कि फैज अनवर की मौत हो गई है।
जेल प्रशासन का दावा था कि फैज ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली है, लेकिन परिजनों ने इस थ्योरी को पहले दिन से ही सिरे से खारिज कर दिया था। उनका आरोप था कि जो युवक दो दिन पहले बिल्कुल स्वस्थ और मानसिक रूप से मजबूत था, वह अचानक जेल की ऊंची सुरक्षा वाली दीवारों के भीतर आत्महत्या कैसे कर सकता है? इसी सवाल का जवाब और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर यह परिवार पिछले कई महीनों से दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
परिजनों का गंभीर आरोप: ‘आत्महत्या नहीं, सुनियोजित हत्या है’
टावर के नीचे प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने जेल प्रशासन और पुलिस पर संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फैज अनवर की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। परिजनों का दावा है कि जेल के भीतर कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर उसके खिलाफ साजिश रची गई और बाद में सबूतों को मिटाने के लिए उसे फांसी का रूप दे दिया गया।
मृतक के भाई सैफ ने नीचे उतरने के बाद बताया कि जेल के अंदर उसके भाई के साथ मारपीट की गई थी। परिजनों का तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति जेल के भीतर सुसाइड करता है, तो यह जेल प्रशासन की सुरक्षा में एक बड़ी चूक है, लेकिन इस मामले में जांच को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। “जस्टिस फॉर अनवर” का बैनर लेकर खड़ी महिलाओं ने कहा कि जब तक इस मामले की सीबीआई या किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
जेल प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा पर सवाल
सीवान मंडल कारा पहले भी कई विवादों में रहा है, लेकिन एक विचाराधीन कैदी की महज दो दिन में मौत हो जाना कई अनसुलझे सवाल खड़ा करता है। जेल के भीतर कैदियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से जेल अधीक्षक और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की होती है। नियमों के मुताबिक, किसी भी कैदी की संदिग्ध मौत पर न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) होनी अनिवार्य है।
परिजनों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि इस मामले में अभी तक किसी भी जेल कर्मी या अधिकारी पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। उनका कहना है कि अगर जेल के सीसीटीवी फुटेज और उस दिन तैनात कर्मियों की भूमिका की सही से जांच हो, तो सच सामने आ सकता है। मोबाइल टावर पर चढ़ने जैसी चरम घटना यह दर्शाती है कि पीड़ित परिवार का सिस्टम पर से भरोसा उठ चुका है और वे अपनी बात पहुँचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का आश्वासन
मुफस्सिल थाना पुलिस ने सैफ को टावर से नीचे उतारने के बाद राहत की सांस ली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवक काफी उत्तेजित था और किसी भी अप्रिय घटना की संभावना बनी हुई थी। पुलिस ने परिजनों को समझाया कि कानूनी प्रक्रिया अपनी गति से चल रही है और किसी भी निर्दोष को फंसाया नहीं जाएगा, न ही किसी दोषी को छोड़ा जाएगा।
हालांकि, पुलिस के इन आश्वासनों से परिजन पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना है कि पहले भी ऐसे आश्वासन दिए गए थे, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। पुलिस ने बताया कि जेल में हुई मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है।
हिरासत में मौत: एक गंभीर मानवाधिकार मुद्दा
सीवान की यह घटना बिहार में ‘कस्टोडियल डेथ’ (हिरासत में मौत) के बढ़ते मामलों की ओर भी ध्यान खींचती है। कानून के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति पुलिस या जेल की कस्टडी में होता है, तो उसकी जान की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि जेल की दीवारों के पीछे किसी भी कैदी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
फैज अनवर उर्फ बिहारी की मौत के मामले में जिस तरह से उसका परिवार सड़कों पर है, वह यह साबित करता है कि कहीं न कहीं संवाद की कमी है या जांच प्रक्रिया में ढिलाई बरती जा रही है। यदि किसी कैदी की मौत संदिग्ध है, तो प्रशासन को चाहिए कि वह सारे साक्ष्य परिजनों के सामने रखे ताकि उनका संदेह दूर हो सके। टावर पर चढ़ना केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं है, बल्कि यह न्याय प्रणाली की सुस्ती के खिलाफ एक सामूहिक विलाप है।
निष्कर्ष: न्याय की आस और भविष्य की चुनौती
सीवान के मोहद्दीपुर गांव में शनिवार को हुआ यह ड्रामा भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी बाकी है। सैफ उर्फ लालू को नीचे उतारकर पुलिस ने एक बड़ा हादसा तो टाल दिया, लेकिन क्या वह उस परिवार को मानसिक शांति दे पाएगी जिसने अपने जवान बेटे को खोया है? “जस्टिस फॉर अनवर” की गूँज अब केवल मोहद्दीपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह पूरे सीवान प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पुलिस और जेल प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता बरतते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा करने की बात कह रही है। पीड़ित परिवार ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें जल्द इंसाफ नहीं मिला, तो वे जिला मुख्यालय और राजधानी पटना में बड़ा आंदोलन करेंगे।


