​हरिद्वार से भागलपुर पहुँचा अखंड ज्योति रथ: मानवाधिकार संगठन ने किया स्वागत

भागलपुर। अध्यात्म और समाज सेवा के अनूठे संगम का गवाह शनिवार को भागलपुर का विशनपुर जिछो इलाका बना। अखिल भारतीय विश्व गायत्री परिवार द्वारा संचालित और हरिद्वार के पावन तटों से शुरू हुई लगभग 1260 किलोमीटर लंबी आध्यात्मिक यात्रा ‘अखंड ज्योति रथ’ के रूप में जिले के विशनपुर जिछो स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर प्रांगण में पहुँची। इस पावन ज्योति के आगमन ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया। इस अवसर पर न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रदर्शन हुआ, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े संगठनों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आर टी आई जागरूकता संगठन भारत की भागलपुर टीम ने इस अवसर पर विशेष रूप से शिरकत की और अखंड ज्योति की पूजा अर्चना कर समाज में शांति और जागरूकता का संदेश दिया। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि समाज निर्माण के लिए आध्यात्मिक चेतना और मानवाधिकारों के प्रति सजगता दोनों का साथ चलना अनिवार्य है।

1260 किलोमीटर का सफर और आस्था का सैलाब

​हरिद्वार, जिसे देवभूमि का द्वार माना जाता है, वहां से प्रज्वलित यह अखंड ज्योति पिछले कई दिनों से निरंतर यात्रा पर है। यह कोई साधारण रथ यात्रा नहीं है, बल्कि यह नवयुग निर्माण और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का एक अभियान है। लगभग 1260 किलोमीटर की दूरी तय कर जब यह रथ भागलपुर की सीमा में प्रविष्ट हुआ, तो श्रद्धालुओं की भीड़ इसे देखने और इसके दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी। विशनपुर जिछो के दुर्गा मंदिर प्रांगण में रथ के पहुँचते ही गायत्री मंत्रों के उच्चारण से पूरा आकाश गूंज उठा।

​गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस अखंड ज्योति का उद्देश्य लोगों के भीतर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करना और समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ एक वैचारिक क्रांति लाना है। इस ज्योति के माध्यम से हरिद्वार के शांतिकुंज का संदेश घर-घर तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। मंदिर परिसर में ज्योति कलश की स्थापना के बाद विधिवत अनुष्ठान शुरू हुए, जिसमें समाज के हर वर्ग के लोगों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

मानवाधिकार संगठन की सहभागिता और प्रतीक चिन्ह भेंट

​इस आयोजन की एक महत्वपूर्ण कड़ी राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आर टी आई जागरूकता संगठन भारत की मौजूदगी रही। संगठन के मीडिया प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव विभूति सिंह अपनी पूरी टीम के साथ मंदिर प्रांगण पहुँचे। उन्होंने अपनी टीम के सदस्यों के साथ अखंड ज्योति की विधिवत पूजा अर्चना की और लोक कल्याण की कामना की। विभूति सिंह ने इस दौरान संगठन के उद्देश्यों और आध्यात्मिक चेतना के अंतर्संबंधों पर भी प्रकाश डाला।

​पूजा के उपरांत एक गरिमामयी कार्यक्रम में गायत्री परिवार के उन योद्धाओं को सम्मानित किया गया जो इस लंबी यात्रा को सफल बनाने में दिन-रात लगे हुए हैं। गायत्री परिवार के अखंड ज्योति जिला प्रभारी नारायण बाबू और भागवताचार्य विकास भारती को राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की ओर से प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी धार्मिक सेवाओं के लिए था, बल्कि उस दृढ़ संकल्प के लिए भी था जो वे समाज को जोड़ने के लिए दिखा रहे हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में समरसता बढ़ती है और लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध होता है।

प्रवीण सिंह कुशवाहा का संबोधन: गायत्री मंत्र की वैश्विक शक्ति

​कार्यक्रम में राजनीतिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक के रूप में कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा भी शामिल हुए। उन्होंने गायत्री परिवार के तमाम पुजारियों और कार्यकर्ताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। अपने संबोधन में कुशवाहा ने गायत्री मंत्र की महत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र केवल एक धार्मिक सूत्र नहीं है, बल्कि इसमें संसार की संपूर्ण शक्ति समाहित है। यह मंत्र बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है और व्यक्ति के भीतर के अंधकार को मिटाता है।

​कुशवाहा ने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में गायत्री मंत्र के जाप को शामिल करें। उनके अनुसार, जिस समाज में आध्यात्मिक अनुशासन होता है, वहां अपराध और मानवाधिकारों का हनन कम होता है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि हरिद्वार की पावन ज्योति आज भागलपुर की धरती को पवित्र कर रही है। उनके भाषण ने उपस्थित लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार किया और गायत्री परिवार के प्रति उनके सम्मान को और बढ़ा दिया।

नारी सशक्तिकरण और नवयुग निर्माण का संदेश

​संगठन के राष्ट्रीय सचिव विभूति सिंह ने इस दौरान एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि सामान्यतः लोगों को ऐसी अखंड ज्योति के दर्शन के लिए हजारों किलोमीटर दूर हरिद्वार जाना पड़ता है, लेकिन यह हम सबका परम सौभाग्य है कि गायत्री परिवार के अथक परिश्रम के कारण यह ज्योति खुद चलकर हमारे बीच आई है। विभूति सिंह ने इस यात्रा को ‘नारी सशक्तिकरण’ और ‘नवयुग निर्माण’ के संकल्प से जोड़ा।

​उन्होंने रेखांकित किया कि गायत्री परिवार का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में लाना और उन्हें आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाना है। जब नारी सशक्त होगी, तभी एक नए और आदर्श समाज का निर्माण संभव है। विभूति सिंह ने गायत्री परिवार के उन सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस कठिन यात्रा को सुगम बनाया और भागलपुर के लोगों को घर बैठे यह दिव्य अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा भी तभी संभव है जब मनुष्य का मन शुद्ध हो, और ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम मन की शुद्धि के सबसे बड़े माध्यम हैं।

सहयोगियों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका

​इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पावन ज्योति कलश रथ के कुशल संचालन में चालक सुजीत की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण रास्तों के बावजूद ज्योति को सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचाया। वहीं, भागवताचार्य विकास भारती, नारायण मालाकार, मनोहर पंडित, सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता, सुभाष, सुरेंद्र नाथ, सरस्वती दीदी, कृष्ण दीदी, हेमंत, नंदकिशोर सिंह, जगत नारायण सिंह और नीरज कुमार सिंह जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में अपना योगदान दिया।

​सैकड़ों की संख्या में पहुँचे महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने न केवल ज्योति के दर्शन किए, बल्कि वहां मौजूद विद्वानों से आध्यात्मिक चर्चा भी की। मंदिर प्रांगण में उत्सव जैसा माहौल था, जहाँ लोग जाति और पंथ की सीमाओं को तोड़कर एक सूत्र में बंधे नजर आए। संगठन की ओर से संजीव कुमार, नवीन कुमार सिंह, अवधेश कुमार, योगेश कुमार वर्मा, गुंजन कुमारी और रूबी देवी सहित अन्य कई सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने सेवा भाव से कार्यक्रम में सहयोग किया।

निष्कर्ष: सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना का महाकुंभ

​भागलपुर के विशनपुर जिछो में हुआ यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं था, बल्कि यह समाज को नई दिशा देने वाला एक वैचारिक महाकुंभ था। एक ओर जहाँ गायत्री परिवार ने अपनी अखंड ज्योति के माध्यम से ज्ञान का प्रसार किया, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठन ने आरटीआई और अधिकारों के प्रति जागरूकता के अपने मिशन को आध्यात्मिकता के साथ जोड़ा।

​अखंड ज्योति का 1260 किलोमीटर का सफर यह बताता है कि विश्वास और संकल्प में कितनी शक्ति होती है। जब तक समाज में ऐसे आयोजन होते रहेंगे, तब तक हमारी संस्कृति और मानवीय मूल्य सुरक्षित रहेंगे। भागलपुर की जनता के लिए यह दिन यादगार बन गया है। हरिद्वार से आई इस ज्योति की लौ अब यहाँ के लोगों के हृदयों में भी ज्ञान और सेवा की अलख जगाती रहेगी।

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