भागलपुर में रफ्तार और ‘नशे’ का खूनी तालमेल: तिलकामांझी–सबौर रोड पर ऑटो और ई-रिक्शा की भीषण भिड़ंत; चार लोग लहूलुहान, नशे में धुत चालक पर फूटा लोगों का गुस्सा

मुख्य बिंदु:

  • भीषण टक्कर: तिलकामांझी-सबौर मुख्य मार्ग पर तीन पहिया सीएनजी ऑटो और ई-रिक्शा के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत।
  • घायलों की संख्या: हादसे में कुल चार लोग घायल हुए, जिनमें यात्री और चालक शामिल हैं।
  • स्थानीय तत्परता: घटनास्थल पर मौजूद नागरिकों ने मसीहा बनकर घायलों को निजी क्लीनिक में कराया भर्ती।
  • गंभीर आरोप: चश्मदीदों के अनुसार, ई-रिक्शा चालक शराब के नशे में धुत था और बेहद तेज गति से वाहन चला रहा था।
  • पुलिसिया कार्रवाई: मौके पर पहुँची पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में लिया; चालक के नशे में होने की मेडिकल जांच जारी।

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर की व्यस्ततम सड़कों पर एक बार फिर ‘रफ्तार के जुनून’ और ‘नशे की लत’ ने निर्दोष यात्रियों की जान जोखिम में डाल दी। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 की दोपहर तिलकामांझी–सबौर रोड उस समय चीख-पुकार से दहल उठा, जब एक सीएनजी ऑटो और ई-रिक्शा के बीच आमने-सामने की भीषण टक्कर हो गई। यह हादसा केवल दो वाहनों की भिड़ंत नहीं थी, बल्कि शहर की चरमराती यातायात व्यवस्था और अनियंत्रित ई-रिक्शा चालकों की मनमानी का एक और प्रमाण थी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहनों के अगले हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और भीतर बैठे यात्री सड़क पर जा गिरे। इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भागलपुर की सड़कों पर सफर करना अब पूरी तरह से ‘राम भरोसे’ है? विशेषकर तब, जब नशे में धुत चालक सार्वजनिक परिवहन के साधनों को मौत का खिलौना बना रहे हों।

हादसे का मंजर: जब अचानक थम गई सड़क की रफ्तार

​तिलकामांझी से सबौर की ओर जाने वाला यह मार्ग जिले की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक है। यहाँ से न केवल आम शहरी, बल्कि कृषि विश्वविद्यालय के छात्र और भारी वाहनों का भी निरंतर आवागमन रहता है। शनिवार की दोपहर करीब दो बजे, जब ट्रैफिक का दबाव सामान्य था, एक तीन पहिया सीएनजी ऑटो अपनी निर्धारित लेन में सबौर की ओर जा रहा था। तभी विपरीत दिशा से आ रहे एक ई-रिक्शा ने अचानक अपनी लेन बदली और सीधे ऑटो से जा टकराया।

​टक्कर का प्रभाव इतना तीव्र था कि ई-रिक्शा का संतुलन बिगड़ गया और वह बीच सड़क पर ही पलटते-पलटते बचा। ऑटो में सवार यात्री, जो अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे, इस अचानक हुए हमले से संभल नहीं पाए। देखते ही देखते सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। घायल यात्री दर्द से कराह रहे थे, जिनमें से कुछ के सिर और हाथ-पैर में गहरी चोटें आई थीं। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों ने तुरंत सक्रियता दिखाई और घायलों को मलबे से बाहर निकाला।

मानवीय संवेदना: जब आम नागरिक बने ‘फरिश्ते’

​अक्सर सड़क हादसों के समय लोग वीडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन तिलकामांझी-सबौर रोड पर नजारा अलग था। यहाँ स्थानीय लोगों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया। घायलों की स्थिति को देखते हुए उन्हें सरकारी एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय पास के ही एक निजी क्लीनिक में ले जाया गया।

​क्लीनिक के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया और बताया कि कुल चार लोग घायल हुए हैं। राहत की बात यह है कि प्राथमिक उपचार के बाद सभी की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों में महिलाएं और युवा शामिल थे, जो इस हादसे के बाद गहरे सदमे में हैं। स्थानीय नागरिकों के इस त्वरित निर्णय ने शायद एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया, जिसकी सराहना पुलिस अधिकारियों ने भी की है।

नशे की ‘रफ्तार’ पर फूटा गुस्सा: चश्मदीदों के सनसनीखेज खुलासे

​हादसे के बाद जब भीड़ ने ई-रिक्शा चालक को पकड़ा, तो सच्चाई सामने आने लगी। घटनास्थल पर मौजूद मनोज कुमार और विकास यादव ने बताया कि ई-रिक्शा चालक की आंखों में सुर्खी थी और उसके मुंह से शराब की तेज दुर्गंध आ रही थी। लोगों का आरोप है कि वह नशे की हालत में पूरी तरह सुध-बुध खो चुका था और वाहन को लहराते हुए चला रहा था।

​सबौर रोड पर ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और चालकों की कम उम्र पहले से ही चिंता का विषय रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नशे में धुत होकर ई-रिक्शा चलाना इस क्षेत्र में आम होता जा रहा है। चालक ने न केवल अपनी जान जोखिम में डाली, बल्कि ऑटो में सवार निर्दोष यात्रियों को भी मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया। गुस्से में आई भीड़ ने चालक की क्लास लगाने की कोशिश की, लेकिन तभी पुलिस के पहुँच जाने से मामला शांत हुआ।

पुलिस की एंट्री और जांच के बिंदु

​हादसे की सूचना मिलते ही तिलकामांझी और सबौर थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुँची। पुलिस ने सबसे पहले दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क के बीच से हटवाकर यातायात सुचारू कराया। पुलिस अधिकारियों ने घायलों का हालचाल जाना और उनके बयान दर्ज किए। मुख्य आरोपी यानी ई-रिक्शा चालक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

​पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि क्या चालक वास्तव में नशे में था। इसके लिए उसे मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, ऐसे में अगर ई-रिक्शा चालक के खून में अल्कोहल की मात्रा पाई जाती है, तो यह मामला न केवल मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) बल्कि मद्यनिषेध कानून के तहत भी बेहद गंभीर हो जाएगा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या ई-रिक्शा चालक के पास वैध लाइसेंस और परमिट था, क्योंकि भागलपुर में बड़ी संख्या में अवैध ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

तिलकामांझी-सबौर मार्ग: दुर्घटनाओं का नया ‘ब्लैक स्पॉट’?

​यह मार्ग अपनी चौड़ाई के बावजूद अब असुरक्षित होता जा रहा है। इसके कई कारण हैं:

  1. अतिक्रमण: सड़क के दोनों ओर लगी दुकानों के कारण मुख्य मार्ग संकरा हो गया है।
  2. स्ट्रीट लाइट की कमी: शाम ढलते ही यहाँ रोशनी कम हो जाती है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों को मोड़ पर देखने में दिक्कत होती है।
  3. अवैध पार्किंग: ऑटो और ई-रिक्शा कहीं भी सवारी चढ़ाने-उतारने के लिए रुक जाते हैं, जो पीछे से आ रहे वाहनों के लिए खतरा पैदा करते हैं।
  4. स्पीड ब्रेकर का अभाव: रिहायशी इलाकों के पास गति सीमा को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संकेतक या ब्रेकर नहीं हैं।

ई-रिक्शा बनाम ऑटो: सड़कों पर वर्चस्व की लड़ाई

​भागलपुर में परंपरागत सीएनजी ऑटो और नए जमाने के ई-रिक्शा के बीच एक शीत युद्ध सा चलता रहता है। ई-रिक्शा चालक अक्सर बिना किसी प्रशिक्षण के सड़कों पर आ जाते हैं। चूंकि ये वाहन शोर नहीं करते, इसलिए पैदल चलने वालों और अन्य वाहन चालकों को इनके करीब आने का पता नहीं चलता। शनिवार की घटना यह दर्शाती है कि हल्के ई-रिक्शा जब भारी सीएनजी ऑटो से टकराते हैं, तो नुकसान दोनों ओर होता है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। जिला परिवहन विभाग (DTO) को चाहिए कि वह इन ई-रिक्शा चालकों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण और समय-समय पर ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ (Drunk and Drive) चेकिंग अभियान चलाए।

जिम्मेदारी किसकी?

​तिलकामांझी-सबौर रोड का यह हादसा एक चेतावनी है। आज चार लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं, लेकिन कल यह कोई बड़ी त्रासदी भी हो सकती है। अगर ई-रिक्शा चालक वास्तव में नशे में था, तो यह प्रशासन की शराबबंदी और यातायात निगरानी, दोनों की विफलता को दर्शाता है। सड़कों पर केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ‘लाइव’ पेट्रोलिंग की जरूरत है जो ऐसे झूमते हुए चालकों को पकड़ सके।

​भागलपुर की जनता को भी चाहिए कि वे ऐसे चालकों के वाहनों में बैठने से बचें जो संदिग्ध नजर आएं। मनोज कुमार और विकास यादव जैसे सजग नागरिकों ने जो तत्परता दिखाई, वह सराहनीय है, लेकिन न्याय तब होगा जब दोषी चालक को कड़ी सजा मिले ताकि दूसरे सबक ले सकें। फिलहाल, पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को थाने ले जाया गया है।

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