
- सारण जिले के डोरीगंज थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मोहित मोहन को पटना से आई निगरानी विभाग की विशेष टीम ने उनके निजी आवास से रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
- आरोपी दरोगा पर आरोप है कि वह स्थानीय भू-माफियाओं के साथ मिलकर मन्नू महतो नामक एक व्यक्ति और उसके परिवार को लंबे समय से प्रताड़ित कर रहा था।
- मामले से नाम हटाने और केस में रियायत देने के बदले दरोगा ने पहले 10 हजार रुपये की मांग की थी, जो मोलभाव के बाद 9 हजार रुपये पर तय हुई थी।
- विजिलेंस डीएसपी वसीम अहमद के नेतृत्व में बिछाए गए जाल में दरोगा उस समय फंस गया जब वह रिश्वत की रकम स्वीकार कर रहा था।
- छपरा सर्किट हाउस में कागजी औपचारिकताओं के बाद आरोपी को पटना ले जाया गया है, जहाँ निगरानी की विशेष अदालत में उसे पेश किया जाएगा।
छपरा/सारण (द वॉयस ऑफ बिहार)।
रक्षक ही जब भक्षक बन जाए: डोरीगंज में खाकी का शर्मनाक चेहरा
कानून की रक्षा की शपथ लेने वाले जब खुद कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो समाज में असुरक्षा और अविश्वास का जहर फैलना लाजमी है। सारण जिले के डोरीगंज थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मोहित मोहन ने कुछ ऐसा ही किया। जिस वर्दी को जनता अपनी सुरक्षा का कवच मानती है, उसी वर्दी की आड़ में मोहित मोहन ने भ्रष्टाचार की दुकान सजा रखी थी। बुधवार को जब निगरानी विभाग (विजिलेंस) की टीम ने उसे 9 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए उसके निजी आवास से दबोचा, तो न केवल एक भ्रष्ट अधिकारी का मुखौटा उतरा, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर पल रहे भ्रष्टाचार के उस तंत्र की भी पोल खुल गई जो अक्सर पर्दे के पीछे से खेलता है। यह गिरफ्तारी केवल एक दरोगा की पकड़ नहीं है, बल्कि उन तमाम रसूखदारों और माफियाओं के लिए भी एक संदेश है जो खाकी के दम पर निर्दोषों का खून चूसते हैं।
मन्नू महतो की व्यथा: पुलिस और माफिया के अपवित्र गठबंधन की कहानी
इस पूरे भ्रष्टाचार कांड के केंद्र में मन्नू महतो नामक एक पीड़ित है, जिसकी कहानी सारण के ग्रामीण अंचलों में व्याप्त पुलिसिया जुल्म की बानगी पेश करती है। मन्नू महतो का कसूर सिर्फ इतना था कि वह स्थानीय भू-माफियाओं की आंखों की किरकिरी बन गया था। आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर मोहित मोहन ने न्याय का रास्ता छोड़कर माफियाओं का हाथ थाम लिया। मन्नू महतो ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि दरोगा मोहित मोहन लंबे समय से उसे और उसके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने का डर दिखा रहा था। इससे पहले भी उसके परिजनों को बेबुनियाद आरोपों में जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा चुका था। जब डोरीगंज थाने में एक नया मामला दर्ज हुआ, तो दरोगा ने इसे अपनी ‘कमाई’ का अवसर समझ लिया और मन्नू के रिश्तेदारों का नाम हटाने के एवज में 10 हजार रुपये की मांग रख दी।
भ्रष्टाचार का बाजार भाव: 10 हजार की मांग और 9 हजार की डील
भ्रष्टाचार के इस बाजार में भी ‘बार्गेनिंग’ का दौर चला। मन्नू महतो ने जब अपनी लाचारी और गरीबी का हवाला दिया, तो मोहित मोहन ने ‘रहम’ दिखाते हुए 10 हजार की मांग को घटाकर 9 हजार रुपये कर दिया। यह सौदा एक दरोगा की ईमानदारी का नहीं, बल्कि एक गरीब की बेबसी का था। मन्नू महतो को समझ आ गया था कि यदि वह आज यह रकम दे भी देता है, तो कल फिर से कोई नई मांग सामने खड़ी होगी। इसी प्रताड़ना और मानसिक घुटन से तंग आकर मन्नू ने पटना का रुख किया और निगरानी विभाग के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। निगरानी विभाग ने मामले को गोपनीय तरीके से सत्यापित किया और जब मामला पूरी तरह सही पाया गया, तब दरोगा के खिलाफ ‘ऑपरेशन रंगे हाथ’ की रूपरेखा तैयार की गई।
विजिलेंस का चक्रव्यूह: वसीम अहमद का सटीक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
निगरानी विभाग के डीएसपी वसीम अहमद के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने पूरी योजना को गुप्त रखा ताकि स्थानीय स्तर पर कोई सूचना लीक न हो सके। मन्नू महतो को केमिकल (फिनोलफ्थलीन पाउडर) लगे हुए नोट दिए गए और उसे दरोगा के पास भेजा गया। दरोगा मोहित मोहन इतना शातिर था कि उसने रिश्वत की रकम लेने के लिए थाने का चुनाव नहीं किया, बल्कि मन्नू को अपने निजी आवास पर बुलाया। उसे लगा कि निजी दीवारें उसके गुनाह को छिपा लेंगी, लेकिन वह भूल गया कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। जैसे ही मन्नू ने दरोगा को 9 हजार रुपये सौंपे, पहले से घात लगाकर बैठी विजिलेंस की टीम ने उसे दबोच लिया।
गुलाबी हुए हाथ, बेनकाब हुआ सफेदपोश चेहरा
गिरफ्तारी के बाद जब दरोगा के हाथ एक विशेष रसायन वाले पानी में धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण था कि दरोगा ने रिश्वत के नोटों को छुआ है। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद मोहित मोहन के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। जिस दरोगा की धौंस से पूरा इलाका कांपता था, वह विजिलेंस की टीम के सामने गिड़गिड़ाने लगा। लेकिन साक्ष्य इतने पुख्ता थे कि उसकी कोई भी दलील काम नहीं आई। पुलिस ने रिश्वत की राशि को जब्त किया और दरोगा को हिरासत में लेकर तत्काल छपरा सर्किट हाउस के लिए रवाना हो गई। वहां घंटों तक चली पूछताछ और कागजी कार्रवाई के दौरान दरोगा के उन संपर्कों को भी खंगाला गया जो भू-माफियाओं से जुड़े हुए थे।
भू-माफिया और खाकी का सिंडिकेट: जांच की अगली कड़ी
निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से यह भी संकेत मिले हैं कि मोहित मोहन अकेला नहीं था। मन्नू महतो ने आरोप लगाया है कि दरोगा स्थानीय जमीन माफियाओं के इशारे पर काम कर रहा था। सारण जिले में जमीन विवादों को सुलझाने के बजाय उन्हें उलझाकर पैसे वसूलना कुछ पुलिसकर्मियों की कार्यशैली बन चुकी है। विजिलेंस की टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मोहित मोहन के ऊपर भी कोई बड़ा हाथ था जो उसे इन अवैध गतिविधियों के लिए शह दे रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद डोरीगंज थाने के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं जो इस सिंडिकेट का हिस्सा रहे हैं।
सर्किट हाउस से पटना तक: कानूनी प्रक्रिया का दौर
गिरफ्तारी के बाद आरोपी सब-इंस्पेक्टर को छपरा सर्किट हाउस लाया गया, जहाँ उसकी मेडिकल जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद विजिलेंस की टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच पटना लेकर रवाना हुई। पटना स्थित निगरानी विशेष न्यायालय में उसे पेश किया जाएगा, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा सकता है। विजिलेंस विभाग ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। दरोगा के आवास की भी तलाशी ली गई है ताकि यह पता चल सके कि उसने अब तक कितनी अवैध संपत्ति अर्जित की है।
निष्कर्ष: सुशासन के नारे और कड़वी हकीकत
मोहित मोहन की गिरफ्तारी बिहार सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ ऑन करप्शन के नारे को एक ओर तो पुख्ता करती है कि अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे, लेकिन दूसरी ओर यह भी दिखाती है कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। एक सब-इंस्पेक्टर का भू-माफियाओं के साथ मिलकर एक परिवार को तबाह करना पुलिस की विश्वसनीयता पर बड़ा धब्बा है। मन्नू महतो जैसे पीड़ितों का साहस ही वह लौ है जो इस अंधेरे तंत्र को चुनौती देती है। जब तक पुलिस विभाग के भीतर से ऐसे ‘काली भेड़ों’ को बाहर नहीं निकाला जाएगा, तब तक आम आदमी का पुलिस स्टेशन जाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। डोरीगंज की यह घटना एक चेतावनी है—वर्दी केवल रौब के लिए नहीं, बल्कि जवाबदेही के लिए है।


