
पटना, 8 अप्रैल 2026: बिहार सरकार ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। गृह विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब हर महीने लाइसेंस से जुड़े मामलों की विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।
हर महीने 7 तारीख तक देनी होगी रिपोर्ट
नए निर्देश के अनुसार, सभी जिलों को प्रत्येक माह की 7 तारीख तक शस्त्र लाइसेंस से संबंधित रिपोर्ट गृह विभाग को उपलब्ध करानी होगी।
इस रिपोर्ट में शामिल होंगे:
- महीने में प्राप्त कुल आवेदन
- जारी किए गए लाइसेंस की संख्या
- लंबित मामलों की स्थिति
- डीएम और एसपी स्तर पर निष्पादित आवेदनों का विवरण
इसके लिए विभाग ने एक तय फॉर्मेट भी जारी किया है, ताकि सभी जिलों से एक समान और स्पष्ट जानकारी मिल सके।
60 दिनों के भीतर फैसला करना होगा अनिवार्य
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि आयुध नियम, 2016 के तहत शस्त्र लाइसेंस आवेदनों पर तय समय सीमा में निर्णय लेना अनिवार्य होगा।
नियमों के अनुसार:
- पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद 60 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा
- आवेदन की आवश्यकता और पात्रता का मूल्यांकन इसी अवधि में करना होगा
इससे आवेदनों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या को खत्म करने की कोशिश की गई है।
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
प्रक्रिया को तेज करने के लिए पुलिस विभाग की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
- लाइसेंस या नवीकरण से जुड़े मामलों में पुलिस को अधिकतम 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी
- देरी होने पर जवाबदेही तय की जा सकती है
लंबित मामलों पर रहेगी खास नजर
नई रिपोर्टिंग प्रणाली में 90 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों की अलग से जानकारी देना अनिवार्य किया गया है।
इससे गृह विभाग को यह पता चल सकेगा कि किस जिले में प्रक्रिया धीमी है और कहां सुधार की जरूरत है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों डेटा शामिल
रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि:
- कितने आवेदन ऑनलाइन प्राप्त हुए
- कितने ऑफलाइन आवेदन आए
- कुल आवेदनों का निष्पादन कितनी तेजी से हुआ
इससे पूरी प्रक्रिया की निगरानी और विश्लेषण आसान होगा।
पहले भी दिए गए थे निर्देश
गौरतलब है कि इससे पहले गृह विभाग ने पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों—जैसे मुखिया, सरपंच और ग्राम कचहरी सदस्यों—के शस्त्र लाइसेंस आवेदनों को 60 दिनों में निपटाने का निर्देश दिया था।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।
नियमित मॉनिटरिंग, तय समय-सीमा और जवाबदेही तय होने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।


