
बच्ची को मरणासन्न हालत में छोड़कर ननिहाल भागा आरोपी किशोर, सिटी एसपी के निर्देश पर पुलिस ने दबोचा
- पटना के मनेर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ खून के रिश्तों को कलंकित करते हुए एक किशोर ने अपनी ही सात वर्षीय चचेरी बहन को हवस का शिकार बनाया।
- आरोपी ने मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर सुनसान जगह पर ले जाकर इस घृणित कृत्य को अंजाम दिया और जब बच्ची अचेत हो गई, तो उसे वहीं छोड़कर फरार हो गया।
- घटना की गंभीरता को देखते हुए पटना वेस्ट के सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को उसके ननिहाल से हिरासत में लिया है।
- एफएसएल (FSL) की टीम ने घटनास्थल का दौरा कर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं, ताकि न्यायालय में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।
- इस घटना ने एक बार फिर समाज में बढ़ती विकृति और अपनों के बीच असुरक्षित होते मासूमों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनेर/पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।
भरोसे का कत्ल: जब रक्षक ही बना भक्षक
बिहार की राजधानी पटना से सटे मनेर इलाके में एक ऐसी घटना घटी है जिसने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी झकझोर कर रख दिया है। एक सात साल की नन्ही बच्ची, जिसे शायद अभी ‘दुष्कर्म’ शब्द का अर्थ भी नहीं पता होगा, वह अपने ही परिवार के एक सदस्य की हैवानियत का शिकार हो गई। रिश्तों की पवित्रता उस समय धूल धूसरित हो गई जब एक किशोर ने अपने ही रिश्ते की बहन के साथ दरिंदगी की। यह घटना उस कड़वी सच्चाई को बयां करती है कि आज के दौर में मासूम बच्चे घर के बाहर ही नहीं, बल्कि अपनों के बीच भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
वारदात का खौफनाक मंजर: बहलाकर ले गया और फिर बरपाया कहर
मिली जानकारी के अनुसार, घटना मनेर थाना क्षेत्र के एक गांव की है। शुक्रवार की शाम जब बच्ची खेल रही थी, तभी उसके दूर के रिश्ते के चचेरे भाई (जो खुद एक किशोर है) ने उसे कुछ खिलाने या घुमाने के बहाने बहला-फुसलाकर एकांत में ले गया। मासूम बच्ची अपने भाई पर भरोसा कर उसके साथ चली गई, उसे क्या पता था कि वह जिसे अपना रक्षक समझ रही है, वही उसके जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन बनने वाला है। एकांत पाकर आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। शारीरिक पीड़ा और सदमे के कारण बच्ची अचेत (बेहोश) हो गई। आरोपी इतना शातिर था कि उसने बच्ची की हालत देखकर उसे बचाने या घर पहुँचाने के बजाय, उसे उसी मरणासन्न हालत में छोड़कर भागना बेहतर समझा।
फरारी और पुलिस की घेराबंदी: ननिहाल तक पहुँचा कानून का हाथ
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी किशोर अपनी पहचान छिपाने और कानून से बचने के लिए तुरंत अपने ननिहाल भाग गया। उधर, काफी देर तक जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान बच्ची अचेत अवस्था में झाड़ियों के पास मिली। उसकी हालत देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और पुलिस को सूचना दी गई।
पटना वेस्ट के सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने मामले की नजाकत को समझते हुए मनेर पुलिस को तत्काल एक्शन लेने का आदेश दिया। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपी का पीछा किया। पुलिस की एक विशेष टीम ने छापेमारी कर आरोपी किशोर को उसके ननिहाल से निरुद्ध (हिरासत में लेना) कर लिया और उसे मनेर थाने ले आई।
साक्ष्यों का संकलन: एफएसएल टीम की सूक्ष्म जांच
ऐसे संवेदनशील मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि घटनास्थल पर एफएसएल (Forensic Science Laboratory) की टीम को भेजा गया है। विशेषज्ञों ने वहां से कपड़ों के रेशे, मिट्टी के नमूने और अन्य जैविक साक्ष्य एकत्र किए हैं। इन साक्ष्यों का मिलान आरोपी और पीड़िता के मेडिकल नमूनों से किया जाएगा। पुलिस का लक्ष्य है कि जांच में कोई भी ऐसी कमी न रहे जिससे अपराधी को कानून की पकड़ से बचने का मौका मिले। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी कराया जा रहा है ताकि दुष्कर्म की पुष्टि कानूनी रूप से की जा सके।
सामाजिक पतन और किशोर अपराध: एक चिंताजनक रुझान
मनेर की यह घटना किशोर अपराधों (Juvenile Crimes) की बढ़ती संख्या की ओर इशारा करती है। एक किशोर का इतनी छोटी बच्ची के साथ ऐसा कृत्य करना यह दर्शाता है कि इंटरनेट, अश्लील सामग्री की सुलभता और नैतिक शिक्षा का अभाव युवा पीढ़ी को किस ओर धकेल रहा है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि जब घर के भीतर ही ऐसे अपराध पनपने लगें, तो यह सामूहिक विफलता का संकेत है। इस मामले में आरोपी और पीड़िता दोनों ही नाबालिग हैं, जो कानूनी प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना देता है, लेकिन जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत भी जघन्य अपराधों के लिए कड़े प्रावधान मौजूद हैं।
सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह का बयान: “न्याय सुनिश्चित होगा”
सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस इस घटना को लेकर अत्यंत गंभीर है। उन्होंने बताया कि परिजनों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आरोपी से पूछताछ की जा रही है। एसपी ने आश्वस्त किया कि मामले में ‘स्पीडी ट्रायल’ चलाया जाएगा ताकि पीड़ित मासूम को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके आसपास के माहौल पर पैनी नजर रखें।
कब तक सुलगती रहेगी मासूमियत?
मनेर की यह सात वर्षीय बच्ची आज पटना के एक अस्पताल में अपनी शारीरिक और मानसिक चोटों से लड़ रही है। उसका इलाज तो हो जाएगा, लेकिन उसके मन पर जो घाव लगा है, वह शायद ताउम्र नहीं भरेगा। समाज के लिए यह समय आत्ममंथन का है। कानून अपना काम करेगा, आरोपी को सजा भी मिलेगी, लेकिन क्या हम एक ऐसा समाज बना पा रहे हैं जहाँ सात साल की बच्ची अपने घर के आंगन में सुरक्षित महसूस कर सके? जब तक रिश्तों की गरिमा और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता हमारे संस्कारों में नहीं रचेगी, तब तक ऐसी खबरें हमारे अखबारों की सुर्खियां बनती रहेंगी।


