बापू सभागार में गूँजेगी ‘शिक्षित बनो’ की हुंकार: 13 अप्रैल को ‘आंबेडकर समग्र शिक्षा समागम’ से सामाजिक न्याय को नई धार देगी बिहार सरकार

123 बेटियों की सफलता बनी विभाग का गौरव, अब विदेश में पढ़ाई के लिए सरकार देगी स्कॉलरशिप

  • ​बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में 13 अप्रैल 2026 को एक विशाल ‘आंबेडकर समग्र शिक्षा समागम’ का आयोजन होने जा रहा है, जो बाबा साहेब की जयंती के उपलक्ष्य में प्रदेश का सबसे बड़ा शैक्षणिक उत्सव होगा।
  • ​अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने इस भव्य आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को शिक्षा के प्रकाश से जोड़ना है।
  • ​समागम में मुख्यमंत्री के साथ-साथ राज्य के तमाम नीति-निर्धारक और छात्र हिस्सा लेंगे, जहाँ शिक्षा को सशक्तिकरण का हथियार बनाने के बाबा साहेब के विजन पर गहन विमर्श होगा।
  • ​विभाग के लिए गौरव का क्षण तब आया जब गायघाट स्थित आंबेडकर आवासीय विद्यालय की सभी 123 छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रथम श्रेणी हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
  • ​मेधावी अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के लिए ‘नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप’ के तहत विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का रास्ता अब और सुगम होगा, क्योंकि राज्य सरकार अब स्वयं इसके लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

वैचारिक क्रांति का शंखनाद: जब शिक्षा बनेगा सामाजिक समरसता का सेतु

संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि शिक्षा उस शेरनी का दूध है जो पिएगा वह दहाड़ेगा। इसी दहाड़ को बिहार के हर गांव और हर घर तक पहुँचाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार ने ‘आंबेडकर समग्र शिक्षा समागम’ की योजना तैयार की है। 13 अप्रैल को होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक जयंती समारोह नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों के लिए एक संदेश है जो आज भी संसाधनों के अभाव में मुख्यधारा से दूर हैं। एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बुधवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए साफ कर दिया कि सरकार अब प्रतीकों से आगे बढ़कर वास्तविक धरातल पर बदलाव लाना चाहती है। बापू सभागार में होने वाला यह समागम इसी बदलाव की एक झांकी पेश करेगा।

समागम का उद्देश्य: अंतिम व्यक्ति का उदय और शैक्षणिक सशक्तिकरण

इस समागम की योजना इस तरह बनाई गई है कि इसमें बौद्धिक विमर्श और जमीनी उपलब्धियों का संगम दिखे। मंत्री ने बताया कि अक्सर समाज के वंचित वर्गों को लगता है कि उच्च शिक्षा उनके लिए एक सपना है। इस समागम के माध्यम से सरकार यह बताना चाहती है कि शिक्षा पर किसी वर्ग विशेष का एकाधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की उपस्थिति यह दर्शाएगी कि दलित और पिछड़े वर्गों का उत्थान सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। कार्यक्रम में राज्य भर के आंबेडकर छात्रावासों से आए हजारों छात्र अपनी आकांक्षाएं और अपनी सफलता की कहानियाँ साझा करेंगे। यह समागम एक मंच प्रदान करेगा जहाँ छात्र सीधे सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों से अपनी चुनौतियां साझा कर सकेंगे।

सफलता की नई इबारत: गायघाट की 123 बेटियों ने रचा इतिहास

प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन का चेहरा उस समय गर्व से चमक उठा जब उन्होंने गायघाट स्थित आंबेडकर आवासीय विद्यालय की चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक क्रांति हैं। विद्यालय की 123 छात्राओं ने परीक्षा दी और शत-प्रतिशत परिणाम रहा। सबसे बड़ी बात यह है कि सभी 123 बेटियां प्रथम श्रेणी (First Division) से उत्तीर्ण हुईं। यह सफलता उन लोगों के गाल पर एक तमाचा है जो सरकारी आवासीय विद्यालयों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं। यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों को सही वातावरण और संसाधन मिलें, तो वे किसी भी संभ्रांत निजी स्कूल के बच्चों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। सरकार ने इस सफलता को ‘समाग्र शिक्षा समागम’ का मुख्य प्रेरणा स्रोत माना है।

सात समंदर पार का सपना: अब विदेश में पढ़ना हुआ आसान

बिहार सरकार ने इस वर्ष एक और ऐतिहासिक घोषणा की है जो एससी-एसटी छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच के द्वार खोल देगी। नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना को लेकर अब राज्य सरकार ने अपनी ओर से विशेष अनुदान देने का फैसला किया है। अब तक विदेश जाकर पढ़ने का सपना केवल अमीर घरों के बच्चे ही देख पाते थे, लेकिन अब बिहार का एक दलित या आदिवासी छात्र भी ऑक्सफोर्ड या हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकेगा और इसका आर्थिक बोझ बिहार सरकार उठाएगी। यह स्कॉलरशिप उन मेधावी छात्रों के लिए होगी जिनके पास प्रतिभा तो है लेकिन विदेश जाने का किराया और वहां रहने का खर्च उठाने की क्षमता नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह योजना मेधावी युवाओं को वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करने का एक माध्यम है।

आंबेडकर छात्रावासों का कायाकल्प और भविष्य की राह

समागम में भाग लेने वाले छात्रावास के छात्रों के लिए भी सरकार ने कई नई घोषणाओं के संकेत दिए हैं। राज्य भर में संचालित आंबेडकर छात्रावासों की स्थिति सुधारने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। पुस्तकालयों का आधुनिकरण, वाईफाई की सुविधा और बेहतर भोजन प्रबंधन जैसी बुनियादी जरूरतों पर विशेष बजट आवंटित किया गया है। लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि सरकार चाहती है कि छात्र जब छात्रावास में रहें, तो उन्हें केवल अपनी पढ़ाई की चिंता हो, अन्य सुविधाओं की नहीं। 13 अप्रैल के कार्यक्रम में इन छात्रावासों के बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रबंधकों को सम्मानित भी किया जाएगा, ताकि अन्य लोगों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बने।

शिक्षा के प्रति जागरूकता: एक सामाजिक अभियान

मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में एक महत्वपूर्ण बात कही कि कोई भी सरकारी योजना तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक समाज उसे अपना न ले। इसी सोच के तहत समागम में केवल अधिकारियों और राजनेताओं को ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को भी आमंत्रित किया गया है। 13 अप्रैल को बापू सभागार से यह अपील की जाएगी कि हर शिक्षित व्यक्ति अपने आस-पड़ोस के कम से कम एक वंचित बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करे। सरकार स्कूलों और हॉस्टलों की दीवारें तो खड़ी कर सकती है, लेकिन उन कमरों में छात्रों को लाने के लिए एक सामाजिक जागरूकता अभियान की आवश्यकता है।

निष्कर्ष: 13 अप्रैल—एक नई शुरुआत की तारीख

डॉ. भीमराव आंबेडकर समग्र शिक्षा समागम केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह बिहार की शिक्षा नीति में आने वाले बड़े बदलाव का संकेतक है। गायघाट की बेटियों की शत-प्रतिशत सफलता और विदेश में पढ़ाई के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप यह दर्शाती है कि राज्य सरकार अब केवल ‘बसाने’ की नहीं, बल्कि ‘बढ़ाने’ की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होने वाला यह भव्य आयोजन पटना की सड़कों से लेकर दिल्ली की सत्ता तक यह संदेश भेजेगा कि बिहार का दलित और पिछड़ा समाज अब अपने अधिकारों के लिए जागरूक है और शिक्षा को ही अपनी तरक्की की सीढ़ी मान रहा है। 13 अप्रैल को बापू सभागार में होने वाली हर गूँज आने वाले वर्षों में बिहार के हजारों गांवों में रोशनी बनकर फैलेगी।

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