
पटना। 08 अप्रैल 2026 : राजधानी पटना के पॉश इलाके शास्त्रीनगर में पिछले दिनों हुए बहुचर्चित शिवपुरी गोलीकांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। 31 मार्च की उस खौफनाक सुबह, जब अपराधियों ने अधेड़ उम्र के दिलीप कुमार सिंह को निशाना बनाया था, उस गुत्थी को पटना पुलिस की एसआईटी (SIT) ने सुलझा लिया है। एसटीएफ, डायल 100 और डीआईयू की तकनीकी मदद से चलाए गए एक व्यापक तलाशी अभियान के बाद पुलिस ने दो पेशेवर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन पिस्टल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि ये अपराधी राजधानी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। ‘द वॉइस ऑफ बिहार’ की विशेष रिपोर्ट में पढ़िए इस पूरे ऑपरेशन की अंदरूनी कहानी।
क्या था पूरा घटनाक्रम: शिवपुरी में गोलियों की तड़तड़ाहट
घटना की शुरुआत 31 मार्च 2026 को हुई थी। शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के शिवपुरी स्थित जी.एस. एनक्लेव के निवासी दिलीप कुमार सिंह (49 वर्ष), जो पी.एन. सिंह के पुत्र हैं, अपने रोजमर्रा के काम से बाहर थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर अचानक गोलियों की बौछार कर दी। दिलीप कुमार सिंह को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस वारदात ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था, क्योंकि दिनदहाड़े हुई इस फायरिंग ने पुलिस की गश्ती और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
पीड़ित दिलीप कुमार सिंह के फर्द बयान के आधार पर शास्त्रीनगर थाने में 01 अप्रैल 2026 को कांड संख्या 280/26 दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 109(1)/3(5) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामला हाई-प्रोफाइल होने और राजधानी की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण वरीय पुलिस अधिकारियों ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
एसआईटी का गठन और तकनीकी जाल: सीसीटीवी ने दिया सुराग
इस केस का उद्भेदन करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि हमलावर हेलमेट पहने हुए थे और वारदात के बाद गलियों का फायदा उठाकर फरार हो गए थे। एसआईटी टीम ने सबसे पहले डायल 100 की सीसीटीवी कंट्रोल यूनिट की मदद ली। शहर के दर्जनों कैमरों को खंगाला गया, जिससे अपराधियों के भागने के रूट का पता चला।
डीआईयू (जिला सूचना इकाई) ने मोबाइल टावर डंप डेटा और तकनीकी सर्विलांस के जरिए अपराधियों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। जांच में यह बात सामने आई कि हमलावर स्थानीय नहीं हैं, बल्कि उनका संबंध दरभंगा और औरंगाबाद से है। इसके बाद एसटीएफ (STF) को भी इस ऑपरेशन में शामिल किया गया ताकि अपराधियों को भागने का कोई मौका न मिले।
पाटिलपुत्र और बोरिंग रोड से हुई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
6 अप्रैल 2026 की दोपहर पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि घटना में शामिल मुख्य शूटर शहर के ही दो अलग-अलग इलाकों में छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने दो टीमें बनाईं और एक साथ छापेमारी की:
- शिवम चौधरी की गिरफ्तारी: 26 वर्षीय शिवम चौधरी, जो दरभंगा जिले के नेहरा थाना क्षेत्र का रहने वाला है, उसे पाटलिपुत्र इलाके से घेराबंदी कर पकड़ा गया। वह पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पहले से तैनात जवानों ने उसे दबोच लिया।
- चंदन कुमार की गिरफ्तारी: दूसरी ओर, 33 वर्षीय चंदन कुमार को बोरिंग रोड जैसे व्यस्त इलाके से गिरफ्तार किया गया। चंदन औरंगाबाद जिले के दाउदनगर का रहने वाला है।
पुलिस की पूछताछ में दोनों ने दिलीप कुमार सिंह पर गोली चलाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, इस हमले के पीछे के मुख्य सूत्रधार और ‘सुपारी’ देने वाले व्यक्ति के बारे में पुलिस अभी पूछताछ कर रही है ताकि हत्याकांड की साजिश की तह तक पहुँचा जा सके।
हथियारों का जखीरा बरामद: किसी बड़ी साजिश की थी तैयारी?
गिरफ्तार अपराधियों के पास से जो बरामदगी हुई है, उसने पुलिस के भी कान खड़े कर दिए हैं। अपराधियों के पास से न केवल हत्या में प्रयुक्त हथियार मिले हैं, बल्कि अतिरिक्त असलहे भी बरामद हुए हैं।
- पिस्टल और कट्टा: पुलिस ने कुल 03 आधुनिक पिस्टल और 01 देसी कट्टा बरामद किया है।
- मैगजीन और कारतूस: अपराधियों के पास से 04 मैगजीन और 22 राउंड जिंदा कारतूस मिले हैं।
- अन्य सामग्री: घटना में इस्तेमाल की गई 01 मोटरसाइकिल, 02 मोबाइल फोन और वह हेलमेट भी बरामद कर लिया गया है जिसे पहनकर अपराधी वारदात के समय अपनी पहचान छिपा रहे थे।
इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस और हथियारों का मिलना यह दर्शाता है कि ये अपराधी पेशेवर शूटर हैं और राजधानी में किराए पर हत्या (Contract Killing) जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं।
पुलिस टीम की तत्परता: इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने में शास्त्रीनगर थानाध्यक्ष रविन्द्र कुमार और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। छापेमारी दल में शामिल मुख्य अधिकारी इस प्रकार हैं:
- पु०नि०-सह-थानाध्यक्ष, रविन्द्र कुमार
- पु०अ०नि० अभय कुमार (अपर थानाध्यक्ष)
- पु०अ०नि० वशिष्ठ कुमार महतो, विवेक प्रसाद, और दोनों दीपक कुमार
- पु०अ०नि० रवि रंजन राज और परि०पु०अ०नि० विशाल कुमार पांडेय
इसके साथ ही डीआईयू की टीम, डायल-100 (CCTV कंट्रोल) और एसटीएफ के जवानों ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर समन्वय बिठाया, उसी का नतीजा है कि घटना के मात्र 6 दिनों के भीतर अपराधी सलाखों के पीछे पहुँच गए।
निष्कर्ष: अपराध मुक्त पटना की ओर एक कदम
दिलीप कुमार सिंह गोलीकांड का यह खुलासा पटना पुलिस की व्यावसायिक कार्यक्षमता को दर्शाता है। बीएनएस की नई धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद यह एक महत्वपूर्ण केस था। हथियारों की बरामदगी से यह भी स्पष्ट है कि पुलिस ने एक बड़े गिरोह की कमर तोड़ दी है।
हालांकि, सवाल अभी भी बना हुआ है कि आखिर दिलीप कुमार सिंह की हत्या की कोशिश क्यों की गई? क्या यह कोई आपसी रंजिश थी या इसके पीछे जमीन विवाद का कोई बड़ा खेल है? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी ताकि इस कांड के पीछे छिपे ‘सफेदपोश’ चेहरों को बेनकाब किया जा सके। फिलहाल, शिवपुरी के लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन पुलिस के लिए असली चुनौती अब उन तमाम कड़ियों को जोड़ना है जो इस शूटरों को राजधानी तक लेकर आई थीं।


