
भभुआ/पटना। 08 अप्रैल 2026: बिहार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण मंत्री संजय सिंह टाइगर ने राज्य के मज़दूरों के हितों को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक सक्रियता दिखाई है। भभुआ परिसदन में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने न केवल विभागीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया, बल्कि अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी भी दी कि मज़दूरों के हक में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बैठक का मुख्य केंद्र राज्य में बढ़ी हुई मज़दूरी दरों को धरातल पर उतारना और असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों का शत-प्रतिशत निबंधन सुनिश्चित करना रहा। विभाग का मानना है कि जब तक हर मज़दूर सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनेगा, तब तक योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचाना मुमकिन नहीं है।
मज़दूरी दर में ऐतिहासिक वृद्धि: अब अकुशल मज़दूर को मिलेंगे ₹436 प्रतिदिन
श्रम विभाग ने मज़दूरों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2026 से मज़दूरी की नई दरों को प्रभावी कर दिया है। मंत्री संजय सिंह टाइगर ने बैठक में स्पष्ट किया कि वेतन संहिता 2019 के प्रावधानों के तहत अब सभी नियोजनों के लिए न्यूनतम मज़दूरी का भुगतान करना अनिवार्य है। विभाग द्वारा तय की गई नई दरें कुछ इस प्रकार हैं:
- अकुशल मज़दूर (Unskilled): 436 रुपये प्रतिदिन।
- अर्द्धकुशल मज़दूर (Semi-skilled): 455 रुपये प्रतिदिन।
- कुशल मज़दूर (Skilled): 551 रुपये प्रतिदिन।
- अतिकुशल मज़दूर (Highly Skilled): 672 रुपये प्रतिदिन।
संजय सिंह टाइगर ने श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों (LEO) और श्रम अधीक्षकों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन दरों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। उन्होंने कहा कि मज़दूरों के पसीने की कीमत तय समय पर और तय दर के अनुसार ही मिलनी चाहिए। यदि कहीं भी तय सीमा से कम मज़दूरी दिए जाने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित नियोक्ता (Employer) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
”जन्म से मृत्यु तक” मज़दूरों के साथ खड़ा है विभाग
बैठक को संबोधित करते हुए श्रम संसाधन मंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि यह देश का इकलौता ऐसा विभाग है जो इंसान के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक की सुरक्षा की गारंटी देता है। उन्होंने बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (BOCW) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाग के पास ऐसी कई योजनाएं हैं जो मज़दूर के बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी, बीमारी के इलाज और बुढ़ापे में पेंशन के साथ-साथ मृत्यु के उपरांत अंत्येष्टि और अनुदान की व्यवस्था करती हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कागजों से बाहर निकलकर सीधे गांवों तक पहुँचें। मंत्री ने कहा, “अधिकारी हर गांव में जाएं और कैंप लगाकर मज़दूरों का निबंधन बोर्ड में करवाएं।” उन्होंने योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर ज़ोर देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर जानकारी के अभाव में पात्र मज़दूर लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसके लिए दीवारों पर पेंटिंग, लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं और पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रवासी मज़दूरों के लिए बनेगा सटीक डेटाबेस
बिहार के लिए प्रवासी मज़दूर हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहे हैं। मंत्री संजय सिंह टाइगर ने इस पर विशेष ध्यान देते हुए अधिकारियों से कहा कि वे क्षेत्र भ्रमण के दौरान प्रवासी मज़दूरों का डेटा संग्रहित करें।
- डेटा संकलन: कौन सा मज़दूर किस राज्य में काम करने गया है, उसका परिवार कहाँ है और उसकी स्थिति क्या है—इन सबका रिकॉर्ड विभाग के पास होना चाहिए।
- दुर्घटना अनुदान योजना: उन्होंने ‘बिहार राज्य प्रवासी मज़दूर दुर्घटना अनुदान योजना, 2008’ का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के बाहर किसी भी दुर्घटना की स्थिति में मज़दूर या उसके परिवार को तुरंत सहायता मिलनी चाहिए।
- सामाजिक सुरक्षा: ‘बिहार शताब्दी असंगठित कार्यक्षेत्र एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना, 2024’ (संशोधित) के तहत दी जाने वाली सुविधाओं को धरातल पर उतारने की बात कही गई, ताकि मज़दूरों को यह महसूस हो कि उनकी सरकार उनके साथ हर कदम पर खड़ी है।
बाल श्रम उन्मूलन: ईंट-भट्ठों पर रहेगी पैनी नज़र
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बाल श्रम का खात्मा रहा। संजय सिंह टाइगर ने कहा कि मज़बूरीवश ईंट-भट्ठों या अन्य खतरनाक कामों में लगे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से छापेमारी और निरीक्षण करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बच्चों को काम से हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिवारों को भी सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना होगा ताकि वे दोबारा अपने बच्चों को काम पर भेजने के लिए मजबूर न हों। विभाग की योजना है कि ऐसे बच्चों को विशेष शिक्षण केंद्रों के माध्यम से स्कूल तक पहुँचाया जाए।
हेल्पलाइन नंबरों को बनाया जाएगा और भी प्रभावी
मज़दूरों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए जारी हेल्पलाइन नंबरों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि इन्हें और अधिक प्रभावी बनाने की ज़रूरत है। उन्होंने निर्देश दिया कि हेल्पलाइन पर आने वाली हर कॉल का रिकॉर्ड रखा जाए और उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसका फॉलोअप लिया जाए। मज़दूरों को यह विश्वास होना चाहिए कि अगर वे अपनी समस्या बता रहे हैं, तो उसका समाधान निश्चित है।
निष्कर्ष: श्रम प्रवर्तन की नई दिशा
भभुआ की इस समीक्षा बैठक ने यह साफ कर दिया है कि बिहार सरकार मज़दूरों के मुद्दों को लेकर अब कड़ा रुख अपनाने जा रही है। न्यूनतम मज़दूरी में वृद्धि और ईएसआई (ESI) जैसी सुविधाओं को मज़दूरों तक पहुँचाने का संकल्प बिहार की अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले श्रमिक वर्ग को नई ताकत देगा। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे ‘फील्ड’ में सक्रिय रहें और भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करें।
संजय सिंह टाइगर के नेतृत्व में विभाग अब उन क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है जहाँ अब तक सरकारी योजनाओं की पहुँच कम थी। मज़दूरों का डेटाबेस तैयार होना और उनकी दिहाड़ी में बढ़ोतरी होना, बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है।


