
मनिहारी के तीन चचेरे भाइयों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत, रोजितपुर के पास पांच घंटे तक आक्रोश की आग में जलता रहा हाईवे; पुलिस की मिन्नतों के बाद खुला जाम
कटिहार। 08 अप्रैल 2026 : बिहार के कटिहार जिले में सड़क सुरक्षा के दावों और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 की शाम जब सूरज ढल चुका था और सड़कों पर रोशनी की धुंधली चादर फैल रही थी, तभी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रोजितपुर के पास फोरलेन हाईवे पर मौत ने अपना वीभत्स तांडव मचाया। तेज रफ्तार और नियमों को ताक पर रखकर ‘रांग साइड’ से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने एक मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया। इस टक्कर की विभीषिका इतनी तीव्र थी कि बाइक पर सवार तीन युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा केवल तीन मौतों का आंकड़ा नहीं है, बल्कि मनिहारी के महियारपुर गांव के तीन परिवारों के उन चिरागों के बुझने की दास्तां है, जिनकी उम्र अभी महज 21-22 साल थी। घटना के बाद जो आक्रोश भड़का, उसने पांच घंटे तक मुख्य राजमार्ग की धड़कनें रोक दीं।
अंधेरे में लिपटी मौत: महियारपुर के तीन भाइयों का आखिरी सफर
हादसे की पटकथा मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे लिखी गई। मनिहारी के महियारपुर गांव के रहने वाले तीन चचेरे भाई—राजीव उरांव (21 वर्ष), निकेश उरांव (22 वर्ष) और राहुल उरांव (22 वर्ष)—अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर किसी काम से जा रहे थे। तीनों युवक अपने भविष्य को लेकर नई उम्मीदें बुन रहे थे और परिवार के लिए सहारा बनने की तैयारी में थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही उनकी बाइक रोजितपुर के समीप नारायणपुर-पूर्णिया फोरलेन पर पहुँची, सामने से मौत बनकर एक ट्रक तेज रफ्तार में गलत दिशा से आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो ट्रक की रफ्तार इतनी अधिक थी कि बाइक सवार युवकों को संभलने का एक पल भी मौका नहीं मिला। जोरदार टक्कर के बाद बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों भाई सड़क पर इधर-उधर जा गिरे। सिर और शरीर के अन्य अंगों में लगी गंभीर चोटों के कारण उनकी सांसों की डोर वहीं टूट गई। हाईवे पर बहता खून और बिखरी हुई मोटरसाइकिल इस बात की गवाही दे रही थी कि टक्कर कितनी भीषण रही होगी।
आक्रोश का ज्वालामुखी: हाईवे पर पांच घंटे का ‘चक्का जाम’
जैसे ही हादसे की खबर आसपास के ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों तक पहुँची, पूरे महियारपुर और रोजितपुर इलाके में कोहराम मच गया। अपनों को खोने का गम देखते ही देखते उग्र आक्रोश में तब्दील हो गया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और आक्रोशित लोग घटनास्थल पर जमा हो गए और नारायणपुर-पूर्णिया फोरलेन को पूरी तरह जाम कर दिया। लोगों का गुस्सा मुख्य रूप से पुलिस की ढीली गश्ती और हाईवे पर ‘रांग साइड’ चलने वाले वाहनों के खिलाफ था।
हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया, जिसने आग में घी डालने का काम किया। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि ट्रक मालिक और फरार चालक की तुरंत गिरफ्तारी हो और मृतकों के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। जाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। रात का वक्त होने के कारण यात्रियों और मालवाहक वाहनों के चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हाईवे पर जलते टायर और लोगों की चीख-पुकार ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया।
पुलिसिया घेराबंदी और मिन्नतों का दौर
हालात को बेकाबू होते देख जिला प्रशासन हरकत में आया। सूचना मिलते ही एएसपी अभिजीत कुमार सिंह, यातायात डीएसपी समेत मनसाही, मुफस्सिल और नगर थाने की भारी पुलिस बल मौके पर पहुँच गई। पुलिस अधिकारियों के सामने दोहरा संकट था—एक तरफ आक्रोशित भीड़ को शांत करना था और दूसरी तरफ महत्वपूर्ण राजमार्ग पर यातायात को फिर से बहाल करना था। एएसपी अभिजीत कुमार सिंह ने खुद कमान संभाली और प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर उनसे बात की।
करीब पांच घंटे तक पुलिस और जनता के बीच ‘खींचतान’ चलती रही। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि ट्रक के नंबर के आधार पर मालिक और चालक की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जिला प्रशासन की ओर से मिलने वाली सरकारी सहायता राशि को भी जल्द से जल्द दिलाने का आश्वासन दिया गया। काफी जद्दोजहद और आधी रात के बीतने के बाद, लोगों का गुस्सा कुछ कम हुआ और उन्होंने सड़क से हटने का फैसला किया। लगभग 12:30 बजे के आसपास हाईवे पर आवाजाही फिर से शुरू हो सकी।
रांग साइड की संस्कृति: हाईवे या मौत का कुआं?
यह हादसा कटिहार के फोरलेन पर होने वाला कोई पहला हादसा नहीं है। कटिहार-पूर्णिया मार्ग पर ‘रांग साइड’ वाहन चलाना एक जानलेवा फैशन बन चुका है। ट्रक और भारी वाहन चालक कुछ दूरी बचाने या शॉर्टकट लेने के चक्कर में गलत दिशा में वाहन दौड़ाते हैं, जिसकी कीमत निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। रोजितपुर की घटना ने पुलिस और यातायात विभाग के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें हाईवे पर निरंतर गश्ती और नियमों के पालन की बात कही जाती है।
एएसपी अभिजीत कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि ट्रक गलत दिशा से आ रहा था, जो कि एक जघन्य लापरवाही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल एक प्राथमिकी दर्ज कर लेने या ट्रक जब्त कर लेने से उन तीन माताओं की कोख फिर से भर जाएगी जिनके बेटे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे? महियारपुर गांव में आज मातमी सन्नाटा है। राजीव, निकेश और राहुल की अर्थियां जब एक साथ उठेंगी, तो पूरा जिला उनकी मौत का मातम मनाएगा। यह हादसा समाज के लिए एक चेतावनी है कि सड़क पर आपकी एक छोटी सी लापरवाही किसी के घर का चिराग बुझा सकती है।
निष्कर्ष: जवाबदेही और न्याय की दरकार
कटिहार के इस तिहरे हत्याकांड (हादसे के रूप में) ने प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या फोरलेन पर रांग साइड चलने वाले वाहनों पर नकेल कसने के लिए कोई ठोस योजना है? मृतकों के परिजनों को क्या केवल आश्वासन मिलेगा या उन्हें वास्तव में न्याय मिल पाएगा? 21-22 साल की उम्र जीवन की शुरुआत होती है, लेकिन महियारपुर के उरांव परिवार के लिए यह अंत साबित हुआ।
पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन न्याय तब माना जाएगा जब फरार चालक को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और हाईवे पर इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। ‘द वॉइस ऑफ बिहार’ इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और प्रशासन से मांग करता है कि सड़क सुरक्षा को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा जाए, ताकि कल किसी और परिवार को पांच घंटे तक हाईवे पर न्याय की भीख न मांगनी पड़े।
राजीव, निकेश और राहुल की याद में महियारपुर की गलियां आज सिसक रही हैं। यह हादसा एक दुखद याद बनकर कटिहार के इतिहास में दर्ज हो गया है, जो हमें हमेशा नियमों के पालन और जिम्मेदारी का अहसास कराता रहेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉइस ऑफ बिहार


