फर्जी शिक्षकों की बहाली पर बड़ी कार्रवाई: पूर्व BEO की पेंशन में 40% कटौती, भ्रष्टाचार पर सरकार का कड़ा संदेश

पटना/समस्तीपुर, 7 अप्रैल 2026: बिहार सरकार ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर के पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) कृष्णदेव महतो पर सख्त दंड लगाया है। सरकार ने उनकी पेंशन में 40% की स्थायी कटौती करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उनके कार्यकाल के दौरान फर्जी शिक्षकों की बहाली और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सिद्ध होने के बाद की गई है।

8 फर्जी शिक्षकों की कराई गई थी बहाली
विभागीय जांच में सामने आया कि कृष्णदेव महतो ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 8 फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति कराई। आरोप है कि उन्होंने विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाकर इन फर्जी शिक्षकों का योगदान (जॉइनिंग) और सत्यापन कराया। जांच के दौरान संबंधित स्कूलों की प्रभारी प्रधानाध्यापिकाओं ने लिखित रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने दबाव में आकर फर्जी नियुक्तियां स्वीकार की थीं।

थम्ब इम्प्रेशन में गड़बड़ी, फिर भी नहीं की कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी शिक्षकों के अंगूठे के निशान (थम्ब इम्प्रेशन) में भी गड़बड़ी पाई गई थी। इसके बावजूद अधिकारी ने न तो इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी और न ही कोई कार्रवाई की। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश माना है।

नियोजन रद्द होने के बाद भी कराई दोबारा जॉइनिंग
मामले में यह भी खुलासा हुआ कि एक शिक्षिका, जिसका नियोजन पहले ही रद्द किया जा चुका था, उसे बिना किसी वैध आदेश के दोबारा नियुक्त करा दिया गया। विभाग ने इसे मनमानी और नियमों की खुली अवहेलना बताया है।

वेतन भुगतान और शिकायत निवारण में भी लापरवाही
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी की लापरवाही के कारण कई कर्मचारियों का वेतन भुगतान लंबित रहा। इसके अलावा उन्होंने लोक शिकायत निवारण से जुड़े आदेशों का पालन नहीं किया और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में भी लगाया, जो नियमों के खिलाफ है।

9 आरोप साबित, विभाग ने सुनाया कड़ा दंड
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कुल 10 में से 9 आरोप पूरी तरह साबित पाए गए हैं। इसके आधार पर बिहार पेंशन नियमावली के तहत उनकी पेंशन में 40% की कटौती का दंड दिया गया है।

सरकार का सख्त संदेश
इस कार्रवाई के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खास बात यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अधिकारी को दंडित किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जिम्मेदारी से बचना संभव नहीं है।

निष्कर्ष
समस्तीपुर का यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार की इस कार्रवाई से अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है।

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