
नशे के सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाने की मिली सजा; धनकुंड थाना क्षेत्र के बबुरा चौक पर अपराधियों का उपद्रव, दहशत में पूरा इलाका; पुलिस की रडार पर नशे का मास्टरमाइंड भावेश चौधरी
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के ग्रामीण अंचलों में नशे के बढ़ते कारोबार ने अब सीधे व्यवस्था को चुनौती देना शुरू कर दिया है। ताजा मामला धनकुंड थाना क्षेत्र के बबुरा गांव का है, जहां मंगलवार को एक जनप्रतिनिधि के कार्यालय को अपराधियों ने रणक्षेत्र बना दिया। नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस को सूचना देने के शक में अपराधियों ने बबुरा चौक स्थित कार्यालय में घुसकर न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि जनप्रतिनिधि के साथ बेरहमी से मारपीट कर उन्हें सरेआम जान से मारने की धमकी दी। इस दुस्साहसिक घटना ने स्थानीय पुलिसिंग और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित मोहम्मद नौशाद, जो क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि हैं, अब खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। अपराधियों की यह हिमाकत केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह उस हर नागरिक के लिए चेतावनी है जो नशे के काले साम्राज्य के खिलाफ खड़ा होने का साहस जुटाता है। घटना के बाद से बबुरा गांव और आसपास के व्यापारिक केंद्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि पुलिस इस संगठित गिरोह के सरगना को पकड़ने के लिए हाथ-पांव मार रही है।
दोपहर की तपिश और अचानक उतरी दहशत की टोली
मंगलवार की दोपहर बबुरा चौक पर चहल-पहल सामान्य थी। मोहम्मद नौशाद अपने कार्यालय में बैठे जनसमस्याओं की सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान 4 से 5 की संख्या में नकाबपोश अपराधी मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां पहुंचे। उनके हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे। चश्मदीदों के अनुसार, अपराधियों ने कार्यालय में प्रवेश करते ही गालियां देनी शुरू कर दीं। इससे पहले कि नौशाद कुछ समझ पाते, हमलावरों ने उन पर हमला बोल दिया।
कार्यालय के भीतर रखे फर्नीचर, कंप्यूटर और अन्य दस्तावेजों को तहस-नहस कर दिया गया। तोड़फोड़ की आवाजें सुनकर बाहर खड़े लोग सहम गए और किसी ने बीच-बचाव की हिम्मत नहीं की। हमलावरों ने मोहम्मद नौशाद को घेरकर पीटा और जाते-जाते जो धमकी दी, उसने पुलिस के होश उड़ा दिए। अपराधियों ने चिल्लाकर कहा, “अभी तो सिर्फ इतना ही हुआ है, यह ट्रेलर है। अगर आगे भी अपनी जुबान बंद नहीं रखी, तो तुम्हारी हत्या कर दी जाएगी।” यह धमकी उस ‘रंजिश’ की पुष्टि करती है जो पिछले कुछ दिनों से परदे के पीछे पक रही थी।
’मुखबिरी’ का शक और 15 दिन पुरानी वह घटना
इस खूनी रंजिश की जड़ें 15 दिन पुरानी एक घटना में छिपी हैं। मोहम्मद नौशाद के अनुसार, अपराधियों का मानना है कि गोराडीह थाना क्षेत्र में गांजा से लदी एक गाड़ी को पकड़वाने में उनकी मुख्य भूमिका थी। लगभग दो सप्ताह पहले गोराडीह पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप बरामद की थी। नशे के सौदागरों को शक है कि वह सूचना नौशाद ने ही पुलिस तक पहुंचाई थी।
प्रतिनिधि होने के नाते नौशाद अक्सर पुलिस और जनता के बीच कड़ी का काम करते हैं, और इसी को अपराधियों ने अपनी बर्बादी का कारण मान लिया। नशे के इस सिंडिकेट ने अपनी आर्थिक क्षति का बदला लेने के लिए नौशाद को निशाने पर लिया। यह हमला संदेश देने के लिए था कि जो भी उनके धंधे में बाधा बनेगा, उसका अंजाम बुरा होगा।
भावेश चौधरी: नशे के कारोबार का उभरता ‘डॉन’
मोहम्मद नौशाद ने इस हमले के पीछे मुख्य साजिशकर्ता के रूप में भावेश चौधरी का नाम लिया है। पुलिस के रिकॉर्ड और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, भावेश चौधरी लंबे समय से गांजा और ‘ब्राउन शुगर’ जैसे घातक नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार में संलिप्त रहा है। पहले वह धनकुंड थाना क्षेत्र में अपना नेटवर्क चलाता था, लेकिन पुलिस की बढ़ती दबिश के कारण उसने अपना ठिकाना बदल लिया।
वर्तमान में वह गोराडीह थाना क्षेत्र के एक सुनसान बहियार (खेतों के बीच का इलाका) में छोटा सा घर बनाकर रह रहा है। वहीं से वह अपने गुर्गों के माध्यम से पूरे जिले में नशे की सप्लाई को नियंत्रित करता है। बहियार में घर बनाने के पीछे का उद्देश्य पुलिस की नजरों से बचना और किसी भी संभावित छापेमारी के समय खेतों के रास्ते फरार होना है। भावेश चौधरी के इस नेटवर्क में कई स्थानीय अपराधी भी शामिल हैं, जो डराने-धमकाने और वसूली का काम करते हैं।
भागलपुर में ब्राउन शुगर का बढ़ता मकड़जाल
बबुरा की यह घटना भागलपुर जिले में मादक पदार्थों, विशेषकर ‘ब्राउन शुगर’ के बढ़ते प्रभाव की एक छोटी सी झलक है। पिछले एक साल में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से ब्राउन शुगर की बड़ी बरामदगी हुई है। यह नशा न केवल युवाओं को बर्बाद कर रहा है, बल्कि अपराध के ग्राफ को भी बढ़ा रहा है।
नशे के सौदागर अब इतने ताकतवर हो गए हैं कि वे जनप्रतिनिधियों पर हमला करने से भी नहीं हिचक रहे। पुलिस की हालिया कार्रवाइयों से इस सिंडिकेट को तगड़ा झटका लगा है, जिससे बौखलाकर वे अब मुखबिरी के शक में लोगों को निशाना बना रहे हैं। मोहम्मद नौशाद जैसे लोगों पर हमला करना दरअसल उस तंत्र को कमजोर करने की कोशिश है जो पुलिस का सहयोग करता है।
पुलिसिया कार्रवाई और फरार अपराधियों की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही धनकुंड थाना पुलिस सक्रिय हो गई है। थानाध्यक्ष ने दल-बल के साथ घटनास्थल का मुआयना किया और तोड़फोड़ के साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मोहम्मद नौशाद का बयान दर्ज कर लिया है और भावेश चौधरी सहित उसके 4-5 गुर्गों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
वरीय पुलिस अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया है, जो गोराडीह और धनकुंड के सीमावर्ती इलाकों में छापेमारी कर रही है। पुलिस भावेश चौधरी के उस ‘बहियार’ वाले ठिकाने पर भी पहुंची, लेकिन वहां सन्नाटा पसरा मिला। अंदेशा है कि हमले के बाद सभी अपराधी जिले की सीमा से बाहर या किसी सुरक्षित ठिकाने पर दुबक गए हैं। पुलिस तकनीकी सेल की मदद से अपराधियों के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है।
जनप्रतिनिधि की सुरक्षा और प्रशासन के सामने चुनौती
बबुरा गांव की इस घटना ने जनप्रतिनिधियों के बीच असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है। यदि एक निर्वाचित या क्षेत्र का प्रतिष्ठित व्यक्ति अपने ही कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? मोहम्मद नौशाद ने प्रशासन से अपनी और अपने परिवार की जान की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भावेश चौधरी जैसे लोगों की संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए जो नशे के अवैध धंधे से बनाई गई हैं। जब तक अपराधियों के आर्थिक स्रोतों पर प्रहार नहीं होगा, वे इसी तरह की वारदातों को अंजाम देते रहेंगे।
निष्कर्ष: समाज बनाम नशे का सिंडिकेट
बबुरा की यह वारदात भागलपुर के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। यह समय है जब समाज के हर वर्ग को नशे के खिलाफ एकजुट होना पड़ेगा। पुलिस की अकेले की लड़ाई तब तक सफल नहीं होगी जब तक जनता और जनप्रतिनिधियों का अटूट सहयोग न मिले। अपराधियों ने मोहम्मद नौशाद के कार्यालय पर हमला करके यह साबित कर दिया है कि वे अपनी जड़ें बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
अब गेंद भागलपुर पुलिस के पाले में है। भावेश चौधरी और उसके गिरोह की गिरफ्तारी न केवल नौशाद को न्याय दिलाएगी, बल्कि उन तमाम लोगों के भीतर विश्वास भरेगी जो नशे के खिलाफ खड़े होना चाहते हैं। आने वाले कुछ दिन भागलपुर पुलिस के लिए कड़ी परीक्षा के होंगे। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी सूरत में अपराधियों का मनोबल न बढ़े और बबुरा चौक पर फिर से शांति और कानून का राज स्थापित हो सके।


