खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 13वीं बैठक, नीतीश कुमार ने दिए बड़ी राहत के निर्देश

बाढ़, सुखाड़ और हीटवेव जैसी चुनौतियों के लिए बनी नई मानक संचालन प्रक्रिया, आधुनिक तकनीक से लैस सरदार पटेल भवन बनेगा सुरक्षा का केंद्र

​’बिहार की आपदा प्रबंधन यात्रा’ पुस्तक का विमोचन, फसल और पशु क्षति अनुदान को और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर

पटना। बिहार में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन और पीड़ितों को तत्काल राहत पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ सभागार में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 13वीं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में न केवल पिछले निर्णयों की समीक्षा की गई, बल्कि आने वाले समय में राज्य के सामने आने वाली मौसमी और भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक रोडमैप भी तैयार किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में इस बात को रेखांकित किया कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए खजाने का सबसे पहला उपयोग उन लोगों के लिए होना चाहिए जो प्रकृति के प्रकोप से जूझ रहे हैं।

​बैठक के दौरान बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस प्रस्तुतीकरण में प्राधिकरण की 12वीं बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की अद्यतन स्थिति और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन का कार्य केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका सीधा लाभ धरातल पर उन पीड़ितों को मिलना चाहिए जिन्हें समय पर सहायता की सर्वाधिक आवश्यकता होती है।

​आपदा प्रबंधन का ऐतिहासिक बदलाव और मानक संचालन प्रक्रिया

​मुख्यमंत्री ने बैठक को संबोधित करते हुए राज्य में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि 24 नवम्बर 2005 को जब नई सरकार ने कमान संभाली थी, तब से ही आपदा प्रबंधन को सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा गया है। उन्होंने कहा कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहां भौगोलिक विविधता के कारण बाढ़, सुखाड़, अगलगी, भूकंप और हाल के वर्षों में बढ़ती हीटवेव जैसी समस्याएं एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अब राज्य में एक सुदृढ़ ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) बनाई गई है।

​इस प्रक्रिया के तहत अब प्रत्येक आपदा के लिए जिम्मेदारियों का बंटवारा और राहत कार्यों की समय सीमा तय की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को केवल मुफ्त भोजन और नकद अनुदान ही नहीं दिया जाता, बल्कि उनकी आजीविका की सुरक्षा के लिए फसल क्षति अनुदान, गृह क्षति अनुदान और पशु क्षति अनुदान की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आपदा के बाद कोई भी परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह न टूटे और उसे पुनः खड़ा होने के लिए सरकारी तंत्र का पूरा सहयोग मिले।

​सरदार पटेल भवन: आधुनिक तकनीक और आपातकालीन सुरक्षा का नया किला

​बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना में नवनिर्मित सरदार पटेल भवन की विशिष्टताओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि गृह विभाग के साथ-साथ आपदा प्रबंधन विभाग और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कार्यालय अब इसी आधुनिक भवन में संचालित किया जा रहा है। यह भवन न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है, बल्कि यह पूरी तरह से भूकंपरोधी तकनीक पर आधारित है।

​इस भवन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी छत पर बना हेलीपैड है, जिसका उपयोग किसी भी आपातकालीन स्थिति में बचाव और राहत कार्यों के लिए किया जा सकता है। यहां स्थापित राज्यस्तरीय आपदा नियंत्रण केंद्र (State Disaster Control Center) चौबीसों घंटे सक्रिय रहता है, जहां से पूरे राज्य की मौसमी गतिविधियों और संभावित खतरों की निगरानी की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की आधुनिक अवसंरचना से आपदा प्रबंधन की गति और सटीकता में काफी इजाफा हुआ है। अब किसी भी आपदा की सूचना मिलते ही राहत दलों को तत्काल रवाना करना और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बिठाना आसान हो गया है।

​’बिहार की आपदा प्रबंधन यात्रा’ का विमोचन और फिल्म प्रदर्शन

​बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पिछले दो दशकों के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह बिहार ने आपदा के दौर से निकलकर एक सुरक्षित और जागरूक समाज की ओर कदम बढ़ाए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘बिहार की आपदा प्रबंधन यात्रा’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। यह पुस्तक बिहार में आपदा प्रबंधन के क्रमिक विकास, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

​मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण के सदस्यों और अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे आपदा प्रबंधन के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाएं। उन्होंने बल देकर कहा कि आपदा पीड़ितों को समय से सहायता उपलब्ध कराना केवल एक प्रशासनिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय सेवा है। सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि राहत राशि के वितरण में कोई देरी न हो और तकनीकी खामियों के कारण कोई भी पीड़ित सहायता से वंचित न रह जाए।

​बैठक में उपस्थित कैबिनेट और प्रशासनिक नेतृत्व

​इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य सरकार का पूरा शीर्ष नेतृत्व उपस्थित रहा। बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी और आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद ने भी अपने सुझाव साझा किए। इसके अलावा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत सहित प्राधिकरण के अन्य सदस्य पी.एन. राय, के.के. मिश्र, नरेन्द्र कुमार सिंह, प्रकाश कुमार और एस.डी. झा भी मौजूद रहे।

​प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, कुमार रवि, विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह और आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह भी बैठक में शामिल थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के विभिन्न विभागों के मंत्रीगण और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी जुड़े रहे। अधिकारियों के इस बड़े जमावड़े ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार सरकार आने वाले मानसून और गर्मी के मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन के प्रति कितनी संजीदा है।

​भावी रणनीति: फसल और पशु सुरक्षा पर विशेष फोकस

​बैठक के समापन सत्र में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि आगामी महीनों में होने वाली संभावित आपदाओं को लेकर सभी विभाग ‘अलर्ट मोड’ पर रहें। विशेष रूप से पशु क्षति अनुदान और फसल क्षति अनुदान की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने का निर्देश दिया गया ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग कर राहत राशि सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में पहुंचाई जाए।

​बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करें ताकि स्थानीय लोग भी आपदा के समय प्राथमिक बचाव कार्यों में पारंगत हो सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हीटवेव (लू) की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करें। यह बैठक बिहार के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जहां सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विपदा की घड़ी में पूरा सरकारी तंत्र जनता के साथ खड़ा है।

  • ये भी पढ़े..

    एलडीपी क्रिकेट क्लब के खिलाड़ियों को मिला नया ड्रेस सेट, अनुशासन और मेहनत को बताया सफलता की कुंजी

    Share Add as a preferred…

    डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह विवाद पर स्वास्थ्य विभाग का जवाब, जांच कमिटी गठित कर कार्रवाई की तैयारी

    Share Add as a preferred…