
मीठापुर कृषि भवन में जल संरक्षण का संकल्प: 68 हजार एकड़ में फैली सूक्ष्म सिंचाई की तकनीक, जैविक खेती और चेक डैम से बदल रही बिहार की तस्वीर
पटना। धरती की कोख से जिस तेजी के साथ पानी निचोड़ा जा रहा है और प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ जारी है, उसके परिणाम आने वाले समय में भयावह हो सकते हैं। बिहार की धरती, जो कभी अपनी नदियों और तालाबों के लिए जानी जाती थी, आज गिरते भूजल स्तर और जलवायु परिवर्तन की दोहरी मार झेल रही है। इसी गंभीर संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने और समाधान तलाशने के उद्देश्य से मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को राजधानी पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में ‘जल-जीवन-हरियाली’ दिवस का भव्य आयोजन किया गया। महीने के प्रत्येक पहले मंगलवार को मनाए जाने वाले इस दिवस ने इस बार एक नए संकल्प की रूपरेखा तैयार की है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि हमने आज अपनी जल नीति और पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण नहीं बदला, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन दूभर हो जाएगा।
यह आयोजन केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं था, बल्कि बिहार की कृषि और पर्यावरण को बचाने के लिए चल रहे एक महा-अभियान की समीक्षा का मंच भी बना। कृषि मंत्री ने कहा कि हमारी पारंपरिक जल संरचनाएं जैसे तालाब, पोखर और कुएं धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार होकर विलुप्त हो रहे हैं। यह स्थिति उस राज्य के लिए और भी खतरनाक है जहां खेती-बारी काफी हद तक वर्षा जल और प्राकृतिक संसाधनों पर टिकी है।
जलवायु परिवर्तन के चक्रव्यूह से निकलने की छटपटाहट
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभावों को बिहार की अर्थव्यवस्था और किसानों के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने इस संकट की गंभीरता को भांपते हुए ही ‘जल-जीवन-हरियाली’ जैसा महत्वाकांक्षी मिशन शुरू किया था। आज प्राकृतिक आपदाएं अब पहले जैसी अनिश्चित नहीं रहीं, बल्कि वे जलवायु परिवर्तन का स्थायी लक्षण बनती जा रही हैं। उन्होंने भूमिगत जल के बेतहाशा दोहन पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्षा जल के संचयन के बिना हम अपनी आने वाली प्यास को नहीं बुझा सकते।
सरकार की कार्ययोजना का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि कृषि विभाग अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। अब सारा ध्यान जैविक खेती, जल स्रोतों के नए सृजन, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन) और स्प्रिंकल सिंचाई जैसी अत्याधुनिक और पर्यावरण-मित्र योजनाओं पर है। इन योजनाओं के माध्यम से न केवल पानी की बचत की जा रही है, बल्कि धरती की उर्वरा शक्ति को भी पुनर्जीवित किया जा रहा है।
किसानों को राहत: स्प्रिंकल सिंचाई पर 90 फीसदी का भारी अनुदान
पानी की हर बूंद की अहमियत समझते हुए कृषि मंत्री ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सिंचाई में पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार स्प्रिंकल (फव्वारा) सिंचाई पद्धति को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। प्रोत्साहन के तौर पर किसानों को इस पद्धति को अपनाने के लिए 90 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसान बहुत कम लागत में अपनी फसलों को पर्याप्त पानी दे सकते हैं और साथ ही भूमिगत जल की भारी बचत भी कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पुरानी तकनीकों के बजाय सूक्ष्म सिंचाई और जलवायु अनुकूल खेती को अपनाएं। सरकार का लक्ष्य बिहार को एक ऐसे कृषि राज्य के रूप में विकसित करना है जहां कम पानी में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन संभव हो सके। जैविक खेती के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मिट्टी को रसायनों से बचाना भी जल संरक्षण का ही एक हिस्सा है, क्योंकि रासायनिक खाद भूजल को भी प्रदूषित करते हैं।
जागरूकता का महायोजन: जल-जीवन-हरियाली मिशन का विजन
कार्यक्रम में मौजूद जल-जीवन-हरियाली मिशन के निदेशक सुमित कुमार ने मिशन की बारीकियों और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिवस मनाने का मूल उद्देश्य केवल सरकारी फाइलों को भरना नहीं, बल्कि आम जन और विशेषकर किसानों के बीच पर्यावरण के प्रति गहरी जागरूकता पैदा करना है। जब तक समाज का हर व्यक्ति जल और हरियाली की कीमत नहीं समझेगा, तब तक कोई भी मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो सकता।
सुमित कुमार ने जानकारी दी कि वन आच्छादन (ग्रीन कवर) बढ़ाने के लिए कृषि विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत चेक डैम का निर्माण, पुराने जल स्रोतों का पुनरुद्धार और नए जल संचयन क्षेत्रों का सृजन किया जा रहा है। उन्होंने ‘कम पानी में अधिक उत्पादन’ के सूत्र को बिहार की कृषि का आधार बताया। सूक्ष्म सिंचाई के बढ़ते दायरे से पानी के उपयोग की दक्षता (Efficiency) में सुधार हुआ है, जिससे सिंचाई के लिए आवश्यक पानी की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आई है।
68 हजार एकड़ का कीर्तिमान और सूक्ष्म सिंचाई की धमक
कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कार्यक्रम के दौरान एक उत्साहजनक डेटा साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य में जल-जीवन-हरियाली अभियान अत्यंत सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। अब तक राज्य के करीब 68 हजार एकड़ भूमि में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति (ड्रिप और स्प्रिंकल सिंचाई) का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा चुका है। यह आंकड़ा बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो यह दर्शाता है कि बिहार का किसान अब आधुनिक और स्मार्ट तकनीक को अपनाने के लिए तैयार है।
सौरभ सुमन यादव ने आगे बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि योजना के तहत किसानों को उन फसलों की ओर मोड़ा जा रहा है जो मौसम की अनिश्चितताओं को झेल सकें। इसके लिए प्रशिक्षण और प्रदर्शनी खेतों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि ‘बिहार राज्य जैविक मिशन’ का गठन किया जा चुका है, जो आने वाले समय में बिहार को एक जैविक राज्य के रूप में वैश्विक पटल पर स्थापित करने में मदद करेगा। इस मिशन के माध्यम से गंगा के किनारे वाले जिलों और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ‘जैविक कॉरिडोर’ का विस्तार किया जा रहा है।
प्रशासनिक सक्रियता और भविष्य की रूपरेखा
मीठापुर कृषि भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने इस मिशन के प्रति विभाग की गंभीरता को दर्शाया। इस अवसर पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव, एमडी बीआरबीएन स्पर्श गुप्ता, अपर सचिव कल्पना कुमारी और अपर निदेशक धनंजय पति त्रिपाठी सहित विभाग के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। इन अधिकारियों ने भी विभिन्न तकनीकी सत्रों में जल संरक्षण के नए तरीकों और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि बिहार की कृषि अब एक संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां उसे अपनी परंपराओं को बचाते हुए आधुनिक विज्ञान से हाथ मिलाना होगा। ‘जल-जीवन-हरियाली’ केवल एक विभाग का नारा नहीं है, बल्कि यह बिहार के अस्तित्व की लड़ाई है। सरकार का यह संदेश स्पष्ट है—खेतों में पानी तब तक रहेगा, जब तक हम जल स्रोतों का सम्मान करेंगे। आने वाले समय में इस अभियान को जिला स्तर से ब्लॉक और पंचायत स्तर तक और अधिक सघन बनाने की योजना है। कुल मिलाकर, कृषि भवन में आयोजित इस दिवस ने यह साबित कर दिया कि बिहार अपनी कृषि संपदा और प्राकृतिक वैभव को बचाने के लिए पूरी तरह सजग और सक्रिय है।


