बेगूसराय : पेप्सी प्लांट के गार्ड की संदेहास्पद स्थिति में मौत, बंद मकान के भीतर दफन हुए कई राज

बेगूसराय। औद्योगिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बेगूसराय जिले की आबोहवा में सोमवार की रात एक ऐसी सनसनी घुल गई, जिसने मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव को सिहरने पर मजबूर कर दिया। गांव के वार्ड नंबर 10 में स्थित एक मकान के भीतर, जो बाहर से बंद था लेकिन अंदर से मौत के साये में खुला था, परिवार के इकलौते वारिस राहुल कुमार का शव बरामद हुआ। पेप्सी प्लांट में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर अपने परिवार के भविष्य को संवारने का सपना देखने वाला यह युवक अब केवल एक पुलिसिया फाइल का हिस्सा बन कर रह गया है।

​इस घटना ने न केवल एक पिता के बुढ़ापे की लाठी छीन ली है, बल्कि पूरे इलाके में भय और संशय का ऐसा वातावरण पैदा कर दिया है कि ग्रामीण अब अपनी ही परछाईं से डरने लगे हैं। मौत का यह मंजर जितना रहस्यमयी है, उससे कहीं अधिक पेचीदा वह परिस्थितियां हैं जिसमें राहुल का शव मिला। परिजनों ने इसे साफ़ तौर पर हत्या का मामला करार दिया है, जबकि पुलिस फिलहाल ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ की ढाल के पीछे खड़ी होकर किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

​पेप्सी प्लांट की ड्यूटी और मोहनपुर की वह काली रात

​राहुल कुमार, जो अपनी मेहनत और अनुशासन के कारण पेप्सी प्लांट में गार्ड की नौकरी कर रहा था, अपने परिवार का इकलौता बेटा था। इकलौता वारिस होने के नाते उस पर न केवल आर्थिक बल्कि भावनात्मक जिम्मेदारियों का भी भारी बोझ था। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, राहुल कुछ ही समय पहले वापस अपने गांव मोहनपुर लौटा था। सोमवार की रात तकरीबन 10 से 11 बजे के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने जीवन और मृत्यु के बीच की लकीर को मिटा दिया।

​ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, जिस घर में राहुल का शव मिला, वह बाहर से बंद था। लेकिन घर के भीतर का एक कमरा खुला हुआ था, जहां राहुल की सांसे थम चुकी थीं। बंद मकान के भीतर खुले कमरे में हुई यह मौत किसी शातिर दिमाग की साजिश की ओर इशारा कर रही है या फिर यह अवसाद का कोई चरम क्षण था, यह गुत्थी सुलझाने में बेगूसराय पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही मोहनपुर गांव के वार्ड नंबर 10 में सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, जिसमें हर चेहरा एक नए सवाल के साथ खड़ा था।

​परिजनों का वज्रपात और हत्या के गंभीर आरोप

​राहुल की मौत की खबर जैसे ही उसके घर में पहुंची, कोहराम मच गया। चीख-पुकार और रुदन के बीच परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि राहुल की हत्या की गई है। उनका तर्क है कि कोई व्यक्ति बाहर से घर बंद करके भीतर जाकर खुद अपनी जान कैसे ले सकता है? परिजनों का मानना है कि हत्यारों ने राहुल को निशाना बनाया, उसे मौत के घाट उतारा और फिर साक्ष्य मिटाने या मामले को उलझाने के लिए घर को बाहर से बंद कर दिया।

​इकलौते वारिस को खोने का गम पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के चेहरों पर साफ देखा जा सकता था। उनका कहना है कि राहुल का किसी से कोई बड़ा विवाद नहीं था, वह अपनी नौकरी में व्यस्त रहता था। ऐसे में उसकी जान लेने के पीछे कौन सी ऐसी दुश्मनी हो सकती है, यह समझ से परे है। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब किया जाए जिन्होंने इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया है।

​एसपी मनीष की मौजूदगी और पुलिस की कछुआ चाल

​मामले की गंभीरता और गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक (SP) मनीष स्वयं दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसपी ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक इनपुट्स पर ध्यान देने के निर्देश दिए। हालांकि, मुफ्फसिल थाना की पुलिस और आला अधिकारी फिलहाल इस मामले में मीडिया के तीखे सवालों से बचते नजर आए।

​जब मीडिया कर्मियों ने इंस्पेक्टर दिवाकर कुमार और अन्य अधिकारियों से यह पूछा कि प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का लग रहा है या आत्महत्या का, तो पुलिस की ओर से केवल एक ही रटा-रटाया जवाब मिला—”पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है।” पुलिस का यह टालमटोल वाला रवैया ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि शव को कब्जे में लेकर बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही वैज्ञानिक तरीके से यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत का असली कारण क्या है।

​ग्रामीणों के बीच चर्चाओं का बाजार और सुरक्षा पर सवाल

​मोहनपुर गांव में इस घटना के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। गांव की चौपालों और गलियों में केवल राहुल की मौत के तरीके को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे आपसी रंजिश मान रहे हैं, तो कुछ इसे पेप्सी प्लांट की नौकरी से जुड़ी किसी पेशेवर खुन्नस से जोड़कर देख रहे हैं। “इकलौते वारिस की मौत” का यह मुद्दा भावनात्मक रूप से लोगों को झकझोर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव के भीतर एक युवक सुरक्षित नहीं है, तो फिर पुलिस की गश्त और सुरक्षा दावों का क्या मतलब?

​घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने दबी जुबान में यह भी कहा कि पुलिस को आसपास के सीसीटीवी कैमरों और राहुल के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) को तत्काल खंगालना चाहिए। 10 से 11 बजे के बीच राहुल किन लोगों के संपर्क में था और उसे आखिरी बार किसके साथ देखा गया था, ये ऐसे सवाल हैं जो हत्या की साजिश की कड़ियों को जोड़ सकते हैं।

​पोस्टमार्टम रिपोर्ट: न्याय की एकमात्र उम्मीद या जांच को लटकाने का बहाना?

​फिलहाल, राहुल का शव सदर अस्पताल के मर्चुरी में रखा है और पुलिस की पूरी जांच इस वक्त एक ‘मेडिकल रिपोर्ट’ पर टिकी है। बेगूसराय में बढ़ते अपराध ग्राफ के बीच इस तरह की संदिग्ध मौतें पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा दबाव बनाती हैं। मुफस्सिल इंस्पेक्टर दिवाकर कुमार का कहना है कि वे हर पहलू की जांच कर रहे हैं और परिजनों के बयानों को भी दर्ज किया जा रहा है।

​लेकिन सवाल वही खड़ा है—क्या एक पेप्सी प्लांट के गार्ड की मौत के पीछे कोई बड़ा गिरोह है या फिर यह किसी पारिवारिक रंजिश का खूनी अंत? बेगूसराय की जनता और विशेष रूप से मोहनपुर गांव के लोग अब केवल एक ही चीज का इंतजार कर रहे हैं, और वह है ‘इंसाफ’। राहुल की मौत ने जो राज बंद मकान में कैद किए हैं, उन्हें बेनकाब करना बेगूसराय पुलिस के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है। आने वाले 48 घंटे इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट ही पुलिस की जांच की दिशा तय करेगी।

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