मुजफ्फरपुर : टैंकर से अवैध गैस कटिंग के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़, डीएसपी सुचित्रा की टीम ने जब्त किया सिलेंडरों का जखीरा

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक बार फिर ‘ब्लैक मार्केटिंग’ और जानलेवा अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। मोतीपुर थाना क्षेत्र के नरियार इलाके में सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अवैध गैस कटिंग (टैंकर से सिलेंडरों में गैस चोरी) के एक बहुत बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी वेस्ट-1 सुचित्रा कर रही थीं। पुलिस की इस दबिश ने उस ‘खूनी खेल’ को उजागर कर दिया है जो रात के अंधेरे में नेशनल हाईवे के किनारे बेधड़क चल रहा था।

​मौके से पुलिस ने गैस से भरा एक बड़ा टैंकर, 54 गैस सिलेंडर और तस्करी के काम में इस्तेमाल होने वाली बोलेरो, पिकअप वैन समेत कई गाड़ियां जब्त की हैं। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही मुख्य तस्कर और गिरोह के गुर्गे अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। यह पूरी कार्रवाई मुजफ्फरपुर पुलिस के उस संकल्प को दर्शाती है जिसमें वह अवैध संसाधनों की चोरी और आम लोगों की जान को खतरे में डालने वाले अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

​आधी रात को नरियार में बिछाई गई पुलिस की बिसात

​मोतीपुर थाना क्षेत्र का नरियार इलाका अक्सर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए जाना जाता है। पुलिस को काफी समय से यह सूचना मिल रही थी कि इस क्षेत्र में कुछ शातिर तस्कर पेट्रोलियम कंपनियों के गैस टैंकरों से अवैध तरीके से गैस चोरी कर उसे घरेलू सिलेंडरों में भरने का काला कारोबार कर रहे हैं। इस सूचना को पुख्ता करने के बाद डीएसपी वेस्ट-1 सुचित्रा ने मोतीपुर पुलिस के साथ मिलकर एक विशेष टीम बनाई।

​सोमवार की देर रात जब पूरा इलाका नींद की आगोश में था, तब पुलिस की टीम ने नरियार के पास एक संदिग्ध ठिकाने की घेराबंदी शुरू की। पुलिस की गाड़ियों की आहट मिलते ही वहां मौजूद तस्करों के बीच भगदड़ मच गई। अपराधी इतने शातिर थे कि वे गाड़ियां और गैस टैंकर चालू हालत में छोड़कर खेतों की ओर भाग निकले। पुलिस ने तुरंत पूरे परिसर को अपने नियंत्रण में लिया और वहां चल रहे अवैध गैस कटिंग के सेटअप को देखकर दंग रह गई।

​मौत का खेल: टैंकर से सिलेंडरों में गैस भरने का खतरनाक तरीका

​गैस कटिंग का यह अवैध धंधा न केवल कानून की नजर में अपराध है, बल्कि यह पूरे इलाके के लिए एक ‘टाइम बम’ की तरह था। तस्कर मुख्य टैंकर के वाल्व से छेड़छाड़ कर एक पाइप के जरिए बड़े व्यावसायिक और घरेलू सिलेंडरों में गैस भरते थे। यह काम बिना किसी सुरक्षा मानक और रिस्क मैनेजमेंट के किया जा रहा था। एक छोटी सी चिंगारी भी उस पूरे इलाके को राख के ढेर में बदल सकती थी।

​डीएसपी सुचित्रा ने बताया कि जिस स्थान पर यह काम हो रहा था, वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। तस्कर मुनाफे के लालच में गैस चोरी कर सिलेंडरों को रिफिल करते थे और फिर उन्हें बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। यह गिरोह गैस वितरण कंपनियों की आंखों में धूल झोंककर सरकार को राजस्व का चूना तो लगा ही रहा था, साथ ही आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होने वाली गैस की किल्लत भी पैदा कर रहा था।

​जब्त किए गए सामानों की सूची: तस्करी का पूरा नेटवर्क आया सामने

​पुलिस की इस छापेमारी में केवल गैस ही नहीं, बल्कि वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों का एक बड़ा बेड़ा भी पकड़ा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट था जो मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में अवैध गैस की सप्लाई कर रहा था।

पुलिस द्वारा जब्त की गई सामग्रियों का विवरण:

  • गैस टैंकर: एक बड़ा टैंकर जो गैस से पूरी तरह भरा हुआ था, जिससे कटिंग की जा रही थी।
  • सिलेंडर: कुल 54 गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं, जिनमें से कई खाली थे और कई भरे हुए थे।
  • पिकअप वैन: सिलेंडरों की बड़ी खेप को इधर-उधर ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली वैन।
  • बोलेरो: गिरोह के सदस्यों और तस्करों के आने-जाने के लिए प्रयोग होने वाली लग्जरी गाड़ी।
  • ई-रिक्शा: स्थानीय स्तर पर छोटे बाजारों और मोहल्लों में गुपचुप तरीके से गैस पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वाहन।

​ये तमाम गाड़ियां इस बात का प्रमाण हैं कि तस्करों ने अपना एक समानांतर वितरण तंत्र खड़ा कर रखा था। पुलिस अब इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के जरिए उनके मालिकों का पता लगा रही है ताकि मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।

​डीएसपी सुचित्रा की चेतावनी: रडार पर हैं सफेदपोश मददगार

​कार्रवाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए डीएसपी वेस्ट-1 सुचित्रा ने कहा कि अवैध गैस कटिंग का यह धंधा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ने सभी जब्त सामानों की सूची बनाकर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भागने वाले तस्करों की पहचान की जा रही है और उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

​पुलिस इस कोण से भी जांच कर रही है कि क्या टैंकर चालक की मर्जी से यह काम हो रहा था या गिरोह ने टैंकर को कहीं रास्ते में बंधक बनाया था। इसके अलावा, उन गैस एजेंसियों और स्थानीय विक्रेताओं की भी जांच की जाएगी जो इन अवैध सिलेंडरों को खरीदकर आम जनता को ब्लैक में बेचते थे। डीएसपी ने कहा कि इस रैकेट के पीछे जो भी मास्टरमाइंड होगा, उसे बहुत जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि वे अधिकृत डीलरों से ही गैस खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

​गैस संकट और अवैध धंधे के बीच का गहरा संबंध

​मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से रसोई गैस की किल्लत और बढ़ते बैकलाग की खबरें आ रही हैं। ऐसे में इस तरह के अवैध कटिंग रैकेट का पकड़ा जाना यह साबित करता है कि गैस की कमी का एक बड़ा कारण इसकी रास्ते में होने वाली चोरी भी है। जब टैंकरों से गैस निकाल ली जाती है, तो उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम हो जाती है या सप्लाई चेन बाधित होती है।

​मोतीपुर में हुई इस कार्रवाई ने तस्करों की कमर तोड़ दी है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस तत्परता की सराहना की है, क्योंकि नरियार जैसे व्यस्त इलाके में गैस कटिंग की गतिविधि किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे रही थी। फिलहाल, पुलिस की टीमें फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं और जब्त गाड़ियों के कागजातों की बारीकी से जांच की जा रही है। मुजफ्फरपुर पुलिस का यह प्रहार आने वाले दिनों में गैस कालाबाजारी पर लगाम कसने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

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