मधेपुरा में खाकी पर लगा रिश्वत का दाग: पुरैनी थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह रंगे हाथ गिरफ्तार, निगरानी विभाग की बड़ी स्ट्राइक

पटना से आई टीम ने थाने के भीतर ही बिछाया था जाल, घूस लेते दबोचे गए थानेदार; महकमे में मची अफरा-तफरी

मधेपुरा। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर मंगलवार को मधेपुरा जिले में साफ तौर पर देखने को मिला। जिले के पुरैनी थाना में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। निगरानी विभाग ने पुरैनी थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी किसी गुप्त स्थान पर नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था के केंद्र यानी थाने के भीतर ही हुई, जिसने पूरे जिले के प्रशासनिक और पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है।

​जैसे ही निगरानी की टीम ने अनिल कुमार सिंह के हाथों में अपनी पकड़ बनाई, थाने के अन्य पुलिसकर्मियों के बीच सन्नाटा पसर गया। खाकी वर्दी पहनकर न्याय की रक्षा करने का दावा करने वाले एक जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह भ्रष्टाचार के दलदल में फंसना विभाग के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी का सबब बन गया है। इस कार्रवाई ने यह साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे थाने के भीतर हो या बाहर, निगरानी की नजरों से बचना नामुमकिन है।

​पटना से पहुंची स्पेशल टीम और ऐसे बिछाया गया ‘हनीट्रैप’

​निगरानी विभाग की इस सफल छापेमारी के पीछे कई दिनों की योजना और सटीक सूचना का हाथ था। जानकारी के मुताबिक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को एक व्यक्ति ने लिखित शिकायत दी थी कि पुरैनी थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह एक मामले में कानूनी कार्रवाई करने या केस को रफा-दफा करने के एवज में मोटी रकम की मांग कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने बताया था कि बिना रिश्वत दिए उसका काम नहीं हो पा रहा है और थानेदार लगातार दबाव बना रहे हैं।

​इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए निगरानी विभाग ने पहले आंतरिक रूप से मामले का सत्यापन कराया। जब यह पुष्टि हो गई कि रिश्वत की मांग वास्तव में की जा रही है, तो विभाग ने एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया। मंगलवार की सुबह पटना से यह टीम गुप्त रूप से मधेपुरा के लिए रवाना हुई। टीम ने बहुत ही पेशेवर तरीके से अपनी पहचान छिपाए रखी और पुरैनी थाना क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जैसे ही शिकायतकर्ता ने निर्धारित स्थान (थाना परिसर के पास) पर अनिल कुमार सिंह को रिश्वत की राशि सौंपी, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया।

​एसपी आसिफ इकबाल मेहंदी ने खुद संभाली कमान, थाने में ही हुई प्रेस ब्रीफिंग

​गिरफ्तारी के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) आसिफ इकबाल मेहंदी स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुरैनी थाना परिसर में ही मौजूद मीडियाकर्मियों को संबोधित किया और इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। एसपी ने स्पष्ट किया कि आरोपी थानाध्यक्ष को रिश्वत की राशि के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया है, जिससे उनके खिलाफ साक्ष्य बेहद मजबूत हैं।

​आसिफ इकबाल मेहंदी ने बताया कि निगरानी विभाग को मिली गुप्त सूचना पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी लोक सेवक को जनता का शोषण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एसपी ने यह भी जानकारी दी कि छापेमारी के दौरान विभाग ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है और गिरफ्तारी के समय पर्याप्त गवाह मौजूद थे। इस दौरान पुलिस अधीक्षक के चेहरे पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती साफ झलक रही थी।

​गिरफ्तारी के बाद पटना ले जाए गए थानेदार, शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया

​रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद अनिल कुमार सिंह के पास बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा था। निगरानी की टीम ने गिरफ्तारी के बाद थाने में आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की। इस दौरान थाने में मौजूद अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मूकदर्शक बने रहे। गिरफ्तारी के बाद आरोपी थाना प्रभारी को निगरानी की टीम अपने साथ पटना ले गई।

​पटना स्थित निगरानी मुख्यालय में उनसे गहन पूछताछ की जाएगी। यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या इस भ्रष्टाचार के खेल में कुछ अन्य लोग भी शामिल थे या यह उनका व्यक्तिगत मामला था। इसके बाद उन्हें निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुरैनी और आसपास के इलाकों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा कि आखिर एक थानेदार इतना बेखौफ कैसे हो गया कि थाने के भीतर ही सौदा करने लगा।

​जिले के पुलिस महकमे में खलबली और ‘सर्च ऑपरेशन’ की आहट

​अनिल कुमार सिंह की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही मधेपुरा के अन्य थानों और जिला पुलिस मुख्यालय तक पहुंची, अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई पुलिसकर्मी इस डर से सहमे हुए हैं कि कहीं निगरानी की रडार पर उनके नाम भी तो नहीं हैं। मधेपुरा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है, लेकिन आंतरिक रूप से यह आदेश जारी किए गए हैं कि विभाग की छवि को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।

​निगरानी विभाग की टीम केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने आरोपी थानेदार के कार्यालय और उनके आवास की भी तलाशी ली है। सूत्रों का कहना है कि तलाशी के दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य सामग्रियां बरामद हुई हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। यह भी जांचा जा रहा है कि अनिल कुमार सिंह का पिछला कार्यकाल कैसा रहा है और क्या पहले भी उनके खिलाफ इस तरह की शिकायतें आई थीं।

​भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार: स्थानीय लोगों ने की सराहना

​मधेपुरा के पुरैनी और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी विभाग की इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने दिल खोलकर स्वागत किया है। आम जनता का कहना है कि अक्सर थानों में बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता और गरीब लोग न्याय के लिए दर-दर भटकते रहते हैं। अनिल कुमार सिंह की गिरफ्तारी ने लोगों में यह विश्वास पैदा किया है कि यदि कोई अधिकारी गलत करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुरैनी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ समय से पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। लोगों ने उम्मीद जताई है कि इस गिरफ्तारी के बाद अब अन्य अधिकारी भी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचेंगे। सोशल मीडिया पर भी इस खबर के वायरल होने के बाद लोग बिहार सरकार और निगरानी विभाग की सक्रियता की तारीफ कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक से व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद जगी है।

​आगे की राह: क्या सुधरेगी थानों की सूरत?

​अनिल कुमार सिंह की गिरफ्तारी मधेपुरा पुलिस के लिए एक बड़ा सबक है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे एक अधिकारी की निजी लालच पूरे विभाग की साख को बट्टा लगा देती है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह की गिरफ्तारियों से थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी? जानकारों का मानना है कि जब तक निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और निगरानी विभाग इसी तरह सक्रिय नहीं रहेगा, तब तक आम आदमी को भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन मिलना मुश्किल है।

​फिलहाल, मधेपुरा का पुरैनी थाना एक नए प्रभारी की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन अनिल कुमार सिंह द्वारा छोड़े गए भ्रष्टाचार के दाग इतनी जल्दी धुलने वाले नहीं हैं। पटना में होने वाली पूछताछ में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में बिहार पुलिस के भीतर कुछ और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। निगरानी विभाग ने यह साबित कर दिया है कि वह भ्रष्टाचार के दानव को निगलने के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे वह दानव खाकी वर्दी में ही क्यों न छिपा हो।

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