
पटना। बिहार में पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग की छात्राओं को सशक्त बनाने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य के 39 अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन की प्रक्रिया को एक बार फिर गति दी गई है। यह उन मेधावी छात्राओं के लिए एक स्वर्णिम अवसर की तरह है, जिन्होंने प्रवेश परीक्षा की बाधा तो पार कर ली थी, लेकिन किन्हीं कारणों से प्रथम मेधा सूची में अपना स्थान सुरक्षित नहीं कर पाई थीं। विभाग ने ऐसी छात्राओं की प्रतिभा को सम्मान देते हुए नामांकन पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्णय लिया है, जिससे अब राज्य की सैंकड़ों बेटियों के आवासीय विद्यालय में पढ़ने का सपना साकार हो सकेगा।
इस विशेष पहल के तहत, आवेदन की खिड़की 3 अप्रैल से खुल चुकी है और छात्राएं आगामी 10 अप्रैल 2026 तक अपना विकल्प दर्ज करा सकेंगी। यह दूसरा मौका न केवल सीटों को भरने की एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि यह बिहार की ग्रामीण और पिछड़ी पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं को एक सुरक्षित और शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक भी है।
नामांकन का गणित: 760 सीटों पर फिर छिड़ी होड़
बिहार के विभिन्न जिलों में फैले इन 39 आधुनिक कन्या आवासीय विद्यालयों में इस बार कुल 760 सीटों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रिक्तियों का वितरण विभिन्न कक्षाओं के आधार पर किया गया है ताकि अधिक से अधिक छात्राओं को उनकी पात्रता के अनुसार मौका मिल सके।
सबसे अधिक अवसर कक्षा 6 की छात्राओं के लिए उपलब्ध हैं, जहां कुल 464 सीटों पर नामांकन होना बाकी है। इसके अतिरिक्त, कक्षा 7 के लिए 164 सीटें, कक्षा 8 के लिए 52 सीटें और कक्षा 9 के लिए 80 सीटों पर आवेदन लिए जा रहे हैं। सीटों का यह बड़ा आंकड़ा यह दर्शाता है कि पहले चरण के बाद भी राज्य के कई प्रमुख विद्यालयों में मेधावी छात्राओं के लिए पर्याप्त स्थान रिक्त हैं। इन सीटों पर चयन पूरी तरह से प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों और विभाग द्वारा निर्धारित आरक्षण नियमों के आधार पर किया जाएगा।
विद्यालय चयन की नई रणनीति: 10 वैकल्पिक स्कूलों का विकल्प
इस बार विभाग ने छात्राओं और उनके अभिभावकों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब छात्राएं केवल एक स्कूल के भरोसे रहने के बजाय अपनी पसंद के 10 वैकल्पिक विद्यालयों का चयन कर सकेंगी। यह ‘मल्टीपल चॉइस’ सिस्टम छात्राओं के नामांकन की संभावनाओं को काफी बढ़ा देता है। अक्सर देखा जाता है कि किसी एक विशेष विद्यालय में प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण योग्य छात्राएं भी पीछे रह जाती हैं, लेकिन अब वे अपने जिले के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों में स्थित विद्यालयों को भी अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल कर सकती हैं।
विभाग ने छात्राओं को सचेत किया है कि वे विद्यालय का चयन करते समय पूरी सावधानी बरतें। अभ्यर्थियों को अपने लॉगिन आईडी के माध्यम से पोर्टल पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा कि किस विद्यालय में, किस कक्षा में और किस कोटि (कैटेगरी) के तहत कितनी सीटें रिक्त हैं। आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे उन विद्यालयों को प्राथमिकता दें जहां उनकी श्रेणी में रिक्तियों की संख्या अधिक है, ताकि उनकी सफलता की संभावना बढ़ सके।
आवासीय विद्यालयों की खूबियां: मुफ्त शिक्षा और सुरक्षित आवास
राज्य सरकार द्वारा संचालित ये अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये छात्राओं के सर्वांगीण विकास की एक कार्यशाला हैं। इन विद्यालयों में नामांकन पाने वाली छात्राओं को सरकार की ओर से पूरी तरह निःशुल्क सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इनमें आधुनिक छात्रावास में रहने की व्यवस्था, पौष्टिक और स्वच्छ भोजन, उच्च स्तरीय शिक्षा, और खेलकूद के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा शामिल है।
इसके अलावा, इन विद्यालयों में छात्राओं को स्टेशनरी, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री भी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इन आवासीय विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य उन छात्राओं को घर से दूर एक ऐसा सुरक्षित परिवेश देना है, जहां वे बिना किसी सामाजिक या आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। +2 स्तर तक की शिक्षा उपलब्ध होने के कारण ये स्कूल छात्राओं के करियर निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
समय सीमा और महत्वपूर्ण तिथियां: 12 अप्रैल को आएगी दूसरी सूची
नामांकन के इस दूसरे चरण के लिए समय सारिणी बहुत ही सख्त रखी गई है ताकि शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके। 10 अप्रैल तक आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद, विभाग त्वरित गति से प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करेगा। इसके ठीक दो दिन बाद, यानी 12 अप्रैल 2026 को द्वितीय मेधा सूची (Second Merit List) जारी कर दी जाएगी।
मेधा सूची जारी होने के बाद नामांकन की मुख्य प्रक्रिया 13 अप्रैल से शुरू होगी, जो 20 अप्रैल 2026 तक चलेगी। इस आठ दिवसीय अवधि के दौरान चयनित छात्राओं को अपने संबंधित विद्यालयों में जाकर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा और नामांकन की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। विभाग ने निर्देश दिया है कि निर्धारित तिथि के बाद किसी भी आवेदन या नामांकन पर विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए छात्राओं को समय रहते अपनी तैयारी पूरी रखनी चाहिए।
सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की यह पहल बिहार में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लड़कियां प्राथमिक शिक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं क्योंकि उनके पास उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित और किफायती विकल्प नहीं होते। सरकार के ये 39 आवासीय विद्यालय इसी कमी को पूरा कर रहे हैं।
नामांकन के लिए पोर्टल को दोबारा खोलना यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़ी छात्रा तक पहुंचे। 760 रिक्त सीटों को भरने के लिए दिया गया यह दूसरा मौका न केवल शैक्षणिक रिक्तियों को भरने की कोशिश है, बल्कि यह उन 760 परिवारों की उम्मीदों को जिंदा रखने की कोशिश भी है, जो अपनी बेटियों को अफसर, डॉक्टर या इंजीनियर बनते देखना चाहते हैं।
छात्राओं के लिए विशेष निर्देश और सावधानी
आवेदन करने वाली छात्राओं को तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा। पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद अपनी कक्षा और कोटि (BC/EBC) के अनुसार उपलब्ध सीटों का मिलान करना अनिवार्य है। यदि कोई छात्रा ऐसी सीट के लिए आवेदन करती है जो उसकी कोटि में रिक्त नहीं है, तो उसका आवेदन स्वतः निरस्त माना जा सकता है। इसके अलावा, आवेदन पत्र में व्यक्तिगत जानकारी और पूर्व में दी गई प्रवेश परीक्षा के रौल नंबर को सही-सही भरना आवश्यक है।
बिहार की यह शिक्षा प्रणाली आने वाले वर्षों में राज्य के मानव संसाधन को और अधिक समृद्ध करेगी। फिलहाल, राज्य भर की हजारों छात्राएं 10 अप्रैल तक अपने बेहतर भविष्य के लिए आवेदन करने की तैयारी में जुट गई हैं। 12 अप्रैल को आने वाली मेधा सूची तय करेगी कि बिहार की कितनी और बेटियों को इन प्रतिष्ठित सरकारी आवासीय विद्यालयों के प्रांगण में कदम रखने का सौभाग्य प्राप्त होगा। सरकार की इस मुस्तैदी से यह स्पष्ट है कि राज्य में अब कोई भी योग्य छात्रा केवल इसलिए शिक्षा से वंचित नहीं रहेगी क्योंकि वह पहली सूची में जगह नहीं बना पाई थी।


