
भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर के आदमपुर स्थित दीप प्रभा सिनेमा हॉल का परिसर मंगलवार को एक अलग ही मानवीय संवेदना का गवाह बना। अवसर था रोटरी क्लब ऑफ भागलपुर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कृत्रिम अंग वितरण शिविर का, जिसके पहले दिन लाभार्थियों की भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि समाज में आज भी सेवा और सहयोग की कितनी आवश्यकता है। 7 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ यह शिविर उन लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है, जो किसी न किसी दुर्घटना या शारीरिक बाधा के कारण अपनी गतिशीलता खो चुके थे। इस शिविर के माध्यम से रोटरी क्लब ने न केवल कृत्रिम अंगों के वितरण का बीड़ा उठाया है, बल्कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम भी बढ़ाया है।
सुबह 10 बजे से ही दीप प्रभा सिनेमा हॉल के मुख्य द्वार पर रजिस्ट्रेशन के लिए कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। शिविर का समय दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है, लेकिन पहले दिन की भीड़ को देखते हुए सदस्यों और वालंटियर्स की व्यस्तता काफी बढ़ गई थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन जरूरतमंदों तक पहुंचना है जो संसाधनों के अभाव में आधुनिक कृत्रिम अंगों का लाभ नहीं ले पाते हैं।
दीप प्रभा सिनेमा हॉल बना मानवता का केंद्र: तीन दिवसीय शिविर का आगाज
7 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह तीन दिवसीय आयोजन केवल एक चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक सामूहिक जिम्मेदारी का प्रदर्शन है। रोटरी क्लब ऑफ भागलपुर ने इसके लिए आदमपुर जैसे केंद्रीय स्थल का चुनाव किया ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पहुंचने में कोई कठिनाई न हो। शिविर के पहले दिन ही जिले के विभिन्न प्रखंडों और आसपास के इलाकों से दिव्यांगजन अपने परिजनों के साथ पहुंचे।
आयोजकों ने बताया कि यह शिविर 7, 8 और 9 अप्रैल तक लगातार चलेगा। शिविर के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मियों और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। पहले दिन की व्यवस्था को देखकर यह स्पष्ट था कि रोटरी क्लब ने इसके लिए महीनों पहले से तैयारी की थी। दीप प्रभा सिनेमा हॉल के परिसर को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि मरीजों को धूप और गर्मी से राहत मिले और उनकी जांच प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
पहले दिन 45 लाभार्थियों का हुआ वैज्ञानिक माप: तकनीक और सेवा का संगम
कृत्रिम अंग वितरण की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण ‘माप’ (Measurement) लेना होता है। रोटरी क्लब के विशेषज्ञों ने मंगलवार को कुल 45 मरीजों की शारीरिक जांच की और उनके अंगों का सटीक माप लिया। यह तकनीकी प्रक्रिया इसलिए अनिवार्य है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक बनावट अलग होती है और कृत्रिम अंग का आरामदायक होना उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों की टीम ने आधुनिक उपकरणों की मदद से यह सुनिश्चित किया कि लाभार्थियों को जो अंग प्रदान किए जाएंगे, वे उनके दैनिक कार्यों में सहायक सिद्ध हों। पहले दिन जिन 45 मरीजों का माप लिया गया, उनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे। इनमें से कई ऐसे थे जिन्होंने सालों पहले अपने पैर या हाथ खो दिए थे और अब वे फिर से चलने या काम करने का सपना देख रहे हैं। माप लेने के दौरान मरीजों के चेहरे पर जो मुस्कान और उम्मीद दिखी, उसने इस पुनीत कार्य की सफलता को रेखांकित कर दिया।
9 अप्रैल को होगा वितरण: बैसाखियों के मोहताज अब अपने पैरों पर होंगे खड़े
शिविर की रूपरेखा को बहुत ही व्यवस्थित ढंग से तैयार किया गया है। 7 अप्रैल को सफल माप लेने के बाद, अब 8 अप्रैल यानी बुधवार को शेष बचे लाभार्थियों का पंजीकरण और माप लेने का कार्य किया जाएगा। रोटरी क्लब ने अपील की है कि जो दिव्यांगजन पहले दिन नहीं पहुंच सके, वे बुधवार को निर्धारित समय के भीतर आकर अपना पंजीकरण करा लें।
शिविर का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन 9 अप्रैल 2026 होगा। इस दिन चयनित लाभार्थियों के बीच तैयार किए गए कृत्रिम अंगों का वितरण किया जाएगा। वितरण के दौरान विशेषज्ञों की टीम यह भी सुनिश्चित करेगी कि लाभार्थी उन अंगों का उपयोग कैसे करें और उन्हें पहनने के बाद चलने-फिरने का अभ्यास कैसे करें। यह वितरण समारोह दिव्यांगजनों के जीवन में एक नया मोड़ लेकर आएगा, जहां वे बैसाखियों या दूसरों के सहारे के बजाय अपने कृत्रिम अंगों की मदद से आत्मनिर्भर बन सकेंगे। रोटरी क्लब का मानना है कि एक कृत्रिम अंग केवल प्लास्टिक या फाइबर का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह व्यक्ति का आत्मविश्वास और उसकी खोई हुई आजादी होती है।
सामूहिक सहभागिता और समर्पण: रोटरी क्लब की सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण
इस भव्य और मानवीय आयोजन की सफलता के पीछे रोटरी क्लब ऑफ भागलपुर की पूरी टीम का अथक परिश्रम है। शिविर के दौरान क्लब की अध्यक्ष अनूपमा कुमार और सचिव शशिकला ठाकुर स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं। उनके साथ कोषाध्यक्ष कमल मोहन ठाकुर, नितेश सांथालिया और प्रेरणा सांथालिया ने भी रजिस्ट्रेशन और अन्य प्रबंधकीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
शिविर के पहले दिन उपस्थित रहने वाले सदस्यों में रूप कुमार, प्रेमेन्द्र मोहन ठाकुर, पूजा ठाकुर, सत्यजीत सहाय, नमिता सहाय, अमिता सिन्हा, राजेश सिन्हा, अंजू अनुपमा, डॉली केजरीवाल, विद्योत्तमा वर्मा, पी.के. सिन्हा, राजेश कुमार एवं आर.के. झा शामिल थे। इन सभी सदस्यों ने मरीजों और उनके परिजनों से बात की और उन्हें इस पहल के लाभों के बारे में जानकारी दी। क्लब के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज का संपन्न वर्ग यदि इस तरह की गतिविधियों में अपना सहयोग दे, तो दिव्यांगता कभी भी किसी की उन्नति में बाधा नहीं बन पाएगी।
जरूरतमंदों के लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार
भागलपुर जैसे शहर में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं मध्यम वर्ग के लिए तो उपलब्ध हैं, लेकिन अत्यंत गरीब और बेसहारा वर्ग के लिए कृत्रिम अंग खरीदना एक सपने जैसा है, वहां रोटरी क्लब का यह प्रयास मील का पत्थर साबित हो रहा है। कृत्रिम अंग मिलने से न केवल व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता दूर होती है, बल्कि उसका मानसिक मनोबल भी बढ़ता है। कई लाभार्थी ऐसे हैं जो मजदूरी या छोटे-मोटे काम करना चाहते हैं, लेकिन पैर न होने के कारण लाचार थे। अब 9 अप्रैल के बाद उनकी यह लाचारी दूर होने की उम्मीद है।
रोटरी क्लब ने अधिक से अधिक दिव्यांगजनों से इस शिविर का लाभ उठाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही क्लब ने शहर के अन्य स्वयंसेवकों से भी इस पुनीत कार्य में सहयोग देने की अपील की है। दीप प्रभा सिनेमा हॉल में चल रहा यह शिविर न केवल भागलपुर, बल्कि पूरे सीमांचल और अंग प्रदेश के लिए सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रहा है। 8 अप्रैल को होने वाले पंजीकरण के लिए भी भारी भीड़ जुटने की संभावना है, जिसे लेकर प्रशासन और आयोजक पूरी तरह सतर्क हैं। रोटरी क्लब का यह मानवीय प्रयास निश्चित रूप से भागलपुर के सामाजिक इतिहास में एक सराहनीय कदम के रूप में याद किया जाएगा।


