बिहार की खेल प्रतिभाओं को मिलेगा ‘एकलव्य’ का साथ: भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में भविष्य के चैंपियंस का महाकुंभ; 5 जिलों के 150 खिलाड़ियों ने दिखाया दम, 9 अप्रैल को वॉलीबॉल के लिए मचेगा घमासान

  • ​बिहार सरकार के खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की संयुक्त पहल ‘एकलव्य राज्य आवासीय प्रशिक्षण केंद्र’ में नामांकन के लिए भागलपुर जिले में चयन ट्रायल की प्रक्रिया भव्य स्तर पर प्रारंभ हो गई है।
  • ​चयन प्रक्रिया के प्रथम चरण में सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को भागलपुर सहित बांका, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया के करीब 150 उभरते खिलाड़ियों ने अपनी शारीरिक दक्षता और तकनीकी कौशल का परिचय दिया।
  • ​सैंडिस कंपाउंड के बास्केटबॉल कोर्ट, बैडमिंटन इंडोर हॉल और साहू उच्च विद्यालय परबत्ता में आयोजित इस ट्रायल में 12 से 14 वर्ष के बालक-बालिकाओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
  • ​जिला खेल पदाधिकारी जयनारायण कुमार ने स्पष्ट किया कि इस प्रशिक्षण केंद्र का उद्देश्य प्रतिभावान खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग देकर उन्हें वैश्विक मंचों पर पदक जीतने के योग्य बनाना है।
  • ​9 अप्रैल 2026 को वॉलीबॉल विधा के लिए विशेष ट्रायल आयोजित किया जाएगा, जिसमें चयनित खिलाड़ी भविष्य में बिहार की खेल पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।

खेलों के नए क्षितिज की तलाश: जब ‘एकलव्य’ की नजर हुई लक्ष्य पर

बिहार की धरती अब केवल मेधावी छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि जुझारू खिलाड़ियों के लिए भी अवसरों का द्वार खोल रही है। भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड और परबत्ता स्थित साहू उच्च विद्यालय में सोमवार का दिन खेल जगत के लिए बेहद खास रहा। यहाँ प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने हेतु ‘एकलव्य राज्य आवासीय प्रशिक्षण केंद्र’ के नामांकन के लिए चयन ट्रायल का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार के उन बच्चों के सपनों को उड़ान देने का एक माध्यम है जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। जिला खेल पदाधिकारी जयनारायण कुमार के कुशल निर्देशन में शुरू हुई इस प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और मंच मिले, तो बिहार के गांव-गांव से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं।

5 जिलों की प्रतिभाओं का संगम: 150 खिलाड़ियों ने झोंकी अपनी ताकत

चयन ट्रायल के पहले दिन का उत्साह देखते ही बनता था। भागलपुर मंडल के विभिन्न कोनों से आए 150 बालक एवं बालिका खिलाड़ियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसमें भागलपुर के अलावा पड़ोसी जिले बांका, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया के उभरते सितारे शामिल थे। इन सभी खिलाड़ियों की आयु 12 से 14 वर्ष के बीच थी, जो विकास की उस दहलीज पर हैं जहाँ उन्हें सही तकनीक और पेशेवर प्रशिक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। बैडमिंटन, तीरंदाजी और बास्केटबॉल जैसी विधाओं में अपनी किस्मत आजमाने आए इन नन्हे खिलाड़ियों के चेहरे पर जीत का जज्बा और बिहार का नाम रोशन करने की ललक साफ दिखाई दे रही थी।

कठिन शारीरिक परीक्षा: बैटरी टेस्ट और स्किल असेसमेंट

नामांकन की इस प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने के लिए विशेष ‘बैटरी टेस्ट’ का सहारा लिया गया। चयनकर्ताओं ने खिलाड़ियों की गति, शक्ति और सहनशक्ति को परखने के लिए शटल रन, मेडिसिन बॉल थ्रो और 800 मीटर की दौड़ जैसे कठिन मापदंड तय किए थे। इन परीक्षणों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल शारीरिक रूप से सक्षम और अनुशासित खिलाड़ी ही आगे बढ़ सकें। शारीरिक परीक्षा के उपरांत संबंधित खेल विधाओं (बैडमिंटन, तीरंदाजी और बास्केटबॉल) में खिलाड़ियों के तकनीकी कौशल (स्किल टेस्ट) की भी गहन जांच की गई। प्रशिक्षण केंद्र में विशेषज्ञों द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग के लिए इन मूलभूत योग्यताओं का होना अनिवार्य है।

मेधा सूची और चयन की अगली प्रक्रिया

चयन ट्रायल के समापन के बाद, प्रदर्शन के आधार पर एक मेधा सूची (Merit List) तैयार की जा रही है। जिला खेल पदाधिकारी ने बताया कि इस सूची को अंतिम अनुमोदन के लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, पटना भेजा जाएगा। राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे सभी चयन ट्रायल के डेटा को एकीकृत करने के बाद, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की एक ‘फाइनल लिस्ट’ जारी की जाएगी। जिन खिलाड़ियों का नाम इस सूची में शामिल होगा, उन्हें एकलव्य राज्य आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों (Coaches) की देखरेख में रहकर अपनी खेल प्रतिभा को निखारने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यहाँ उन्हें न केवल खेल की बारीकियां सिखाई जाएंगी, बल्कि उनके आहार और स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

वॉलीबॉल ट्रायल: 9 अप्रैल को फिर सजेगा मैदान

बैडमिंटन और बास्केटबॉल के सफल ट्रायल के बाद अब सबकी नजरें 9 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं। इस दिन सैंडिस कंपाउंड स्थित वॉलीबॉल कोर्ट में बालक एवं बालिका वर्ग के लिए वॉलीबॉल चयन ट्रायल आयोजित किया जाएगा। इस ट्रायल में शामिल होने वाले खिलाड़ियों की आयु सीमा 12 से 14 वर्ष निर्धारित की गई है। विशिष्ट रूप से जिनका जन्म 1 जनवरी 2012 से 1 जनवरी 2014 के बीच हुआ है, वे इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। जिला खेल कार्यालय ने उन खिलाड़ियों के लिए एक विशेष प्रावधान भी रखा है जिन्होंने पहले ही आधिकारिक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीता है या सहभागिता की है—ऐसे मेधावी एथलीटों को आयु सीमा में अधिकतम 2 वर्ष की छूट प्रदान की जा सकती है।

अनिवार्य दस्तावेज और प्रशासनिक तैयारी

चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की जांच बेहद कड़ी रखी गई है। ट्रायल में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी के पास आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, विद्यालय प्रमाण पत्र और खेल प्रमाण पत्र का होना अनिवार्य है। जिला खेल पदाधिकारी जयनारायण कुमार ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से भी संपर्क साधा है। विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों तक पत्राचार के माध्यम से यह जानकारी प्रेषित की गई है ताकि कोई भी योग्य खिलाड़ी सूचना के अभाव में इस अवसर से वंचित न रह जाए। इच्छुक खिलाड़ी किसी भी तकनीकी सहायता या जानकारी के लिए सीधे जिला खेल कार्यालय, भागलपुर से संपर्क कर सकते हैं।

चयनकर्ताओं और शिक्षकों का सामूहिक योगदान

इस पूरी चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और त्रुटिहीन बनाने में विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम जुटी हुई है। चयनकर्ता के रूप में चंदन कुमार सिंह, शिवम् कुमार भगत, विनेश हेंब्रम, आशुतोष कुमार, रूपेश राज, शशि प्रताप सिंह, भानु प्रताप, कुंदन कुमार और निशांत कुमार ने अपनी भूमिका का निर्वहन किया। वहीं, बैटरी टेस्ट के दौरान तकनीकी बारीकियों को समझने में नीरज कुमार, अशोक कुमार, रविकांत रंजन, गोपाल कुमार, संजीव कुमार, अंजन कुमार, चंद्रभूषण कुमार, किरण कुमारी, कुंदन कुमार, विक्की कुमार और मृणाल किशोर जैसे शारीरिक शिक्षकों ने अपना अहम योगदान दिया। इन सभी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आवासीय केंद्रों से बिहार भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाने में सफल होगा।

ओलंपिक के सपनों को खाद-पानी देता बिहार

‘एकलव्य राज्य आवासीय प्रशिक्षण केंद्र’ की यह पहल बिहार के खेल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। जहाँ एक समय में सरकारी उपेक्षा के कारण खिलाड़ी पलायन को मजबूर थे, वहीं अब उनके घर के पास ही विश्वस्तरीय सुविधाओं का ढांचा तैयार किया जा रहा है। भागलपुर में आयोजित यह चयन ट्रायल केवल खिलाड़ियों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह बिहार के उन भावी चैंपियन की खोज है जो आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराएंगे। जिला खेल पदाधिकारी जयनारायण कुमार द्वारा दी गई यह जानकारी प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए एक नई आशा की किरण लेकर आई है।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार के दो स्टार क्रिकेटरों को मिलेगा DSP पद! मुकेश कुमार और आकाश दीप की सीधी नियुक्ति की सिफारिश

    Share Add as a preferred…

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर RJD के पूर्व विधायक मुकेश रौशन को धमकी! SSP से लगाई सुरक्षा की गुहार

    Share Add as a preferred…