​हाजीपुर-सुगौली रेलमार्ग पर गेटमैन की लापरवाही ने दांव पर लगाई सैकड़ों जानें, लोको पायलट ने खुद फाटक बंद कर टाला हादसा

हाजीपुर/वैशाली। भारतीय रेलवे जहाँ एक ओर आधुनिकता और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों की आत्मघाती लापरवाही इन दावों की धज्जियां उड़ाती नजर आती है। बिहार के वैशाली जिले के अंतर्गत आने वाले हाजीपुर-सुगौली रेलखंड पर रविवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी, जिसने न केवल यात्रियों की सांसें अटका दीं, बल्कि रेलवे के सुरक्षा तंत्र को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। घटारो हॉल्ट और लालगंज स्टेशन के बीच स्थित रेलवे फाटक नंबर 8C पर एक गेटमैन अपनी ड्यूटी को ‘भगवान भरोसे’ छोड़कर फरार हो गया। सुबह के शांत वातावरण में जब एक पैसेंजर ट्रेन तेजी से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी, तब यह खुला फाटक किसी बड़े कत्लेआम का इंतजार कर रहा था। गनीमत यह रही कि ट्रेन के लोको पायलट ने समय रहते खतरे को भांप लिया और अपनी सूझबूझ से एक बड़े रेल हादसे को टाल दिया। 5 अप्रैल 2026 की यह घटना रेलवे के इतिहास में एक कड़वे सबक के रूप में दर्ज हो गई है।

6:00 AM: सन्नाटे को चीरती हॉर्न की आवाज और खुलता ‘मौत का द्वार’

​घटनाक्रम की शुरुआत रविवार सुबह करीब छह बजे हुई। हाजीपुर-सुगौली रेलमार्ग पर वैशाली से कोडरमा जाने वाली पैसेंजर ट्रेन अपनी निर्धारित गति से दौड़ रही थी। ट्रेन जैसे ही घटारो हॉल्ट और लालगंज स्टेशन के बीच नामीडीह से करताहां जाने वाली सड़क पर स्थित रेलवे फाटक नंबर 8C के पास पहुँची, लोको पायलट के होश उड़ गए। सामने का रेलवे फाटक पूरी तरह खुला हुआ था और सड़क मार्ग पर वाहनों की आवाजाही की संभावना बनी हुई थी। नियमानुसार, ट्रेन के पहुँचने से काफी पहले गेटमैन को फाटक बंद कर देना चाहिए था और ट्रेन को ‘ग्रीन सिग्नल’ देना था।

​लेकिन यहाँ नजारा बिल्कुल उल्टा था। लोको पायलट ने दूर से ही खुले फाटक को देखकर इमरजेंसी ब्रेक का इस्तेमाल किया और ट्रेन को फाटक से कुछ ही दूरी पर रोक दिया। इसके बाद ट्रेन लगातार हॉर्न देती रही ताकि अगर कोई गेटमैन आसपास हो, तो वह दौड़कर आए और फाटक बंद करे। करीब 10 मिनट तक ट्रेन खड़ी रही और इंजन का हॉर्न गूँजता रहा, लेकिन मौके पर कोई भी रेलकर्मी मौजूद नहीं था। ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों और आसपास के ग्रामीणों में इस असामान्य देरी और लगातार बजते हॉर्न के कारण अफरा-तफरी मच गई। लोगों को अंदेशा होने लगा कि कहीं कोई तकनीकी खराबी या बड़ी गड़बड़ी तो नहीं हो गई है।

लोको पायलट की जांबाजी: जब ‘ड्राइवर’ बना ‘गेटमैन’

​10 मिनट के इंतजार के बाद जब यह साफ हो गया कि गेटमैन अपनी ड्यूटी छोड़कर कहीं गायब हो गया है और वहां कोई दूसरा विकल्प नहीं है, तब ट्रेन के लोको पायलट ने एक ऐतिहासिक और साहसी निर्णय लिया। लोको पायलट स्वयं ट्रेन के इंजन से नीचे उतरे और पैदल चलकर फाटक तक पहुँचे। उन्होंने अपनी सुरक्षा और जिम्मेदारी को ऊपर रखते हुए खुद ही लोहे के भारी फाटक को बंद किया और उसे सुरक्षित रूप से लॉक किया।

​एक लोको पायलट का काम ट्रेन का संचालन करना होता है, न कि फाटक बंद करना, लेकिन उस समय सैकड़ों यात्रियों की जान बचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। फाटक बंद करने के बाद वे वापस इंजन पर सवार हुए और अत्यंत सावधानी के साथ ट्रेन को उस रेलखंड से पार कराया। लोको पायलट की इस तत्परता ने साबित कर दिया कि अगर सही समय पर सही फैसला न लिया गया होता, तो कोई भी भारी वाहन उस खुले फाटक के बीच आ सकता था और एक बड़ी टक्कर (Collision) निश्चित थी।

डिजिटल साक्ष्य: प्रत्यक्षदर्शी आदित्य राज का वायरल वीडियो (विशेष विश्लेषण)

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, इस घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई जब मौके पर मौजूद एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी, आदित्य राज ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।

  1. लापरवाही का प्रमाण: वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रेल गुमटी पर कोई कर्मचारी नहीं है और ट्रेन खड़ी होकर हॉर्न बजा रही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन की खूब किरकिरी हो रही है।
  2. सच्चाई आई सामने: अक्सर ऐसी घटनाओं में कर्मचारी बहानेबाजी करते हैं, लेकिन आदित्य राज द्वारा बनाए गए इस वीडियो ने गेटमैन की अनुपस्थिति और लोको पायलट के प्रयासों को सार्वजनिक कर दिया।
  3. जनता का आक्रोश: वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों ने रेल मंत्रालय और पूर्व मध्य रेलवे (ECR) से सवाल पूछा है कि क्या यात्रियों की जान इतनी सस्ती है कि एक संवेदनशील फाटक को बिना किसी कर्मचारी के छोड़ दिया जाए?

प्रशासनिक कोड़ा: गेटमैन निलंबित, जांच के आदेश

​हाजीपुर-सुगौली रेलखंड पर हुई इस गंभीर चूक की जानकारी जैसे ही रेलवे के वरीय अधिकारियों तक पहुँची, विभाग में खलबली मच गई। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि गेटमैन ने बिना किसी सूचना के और बिना किसी रिलीवर के आए अपनी पोस्ट छोड़ दी थी। यह न केवल ड्यूटी में लापरवाही है, बल्कि आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।

​पूर्व मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी और अन्य वरीय अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित गेटमैन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई है जो यह पता लगाएगी कि गेटमैन के फरार होने के पीछे क्या कारण थे और क्या उस समय स्टेशन मास्टर या कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी थी। लोको पायलट के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उनकी सूझबूझ की विभागीय स्तर पर सराहना भी की जा रही है। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि क्या केवल एक कर्मचारी को सस्पेंड करना पर्याप्त है?

सुरक्षा पर सवाल: राम भरोसे बिहार की रेल गुमटियाँ?

​एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो यह घटना भारतीय रेलवे के ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है।

  • तकनीकी विफलता: आजकल कई फाटकों को ‘इंटरलॉक्ड’ करने की बात की जाती है, जहाँ फाटक बंद न होने तक सिग्नल हरा नहीं होता। यहाँ ऐसा क्यों नहीं था?
  • स्टाफ की कमी या मनमानी: क्या रेलवे में कर्मचारियों पर काम का दबाव इतना अधिक है कि वे ड्यूटी छोड़ रहे हैं, या फिर यह पूरी तरह से व्यक्तिगत अनुशासनहीनता का मामला है?
  • ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा: हाजीपुर और लालगंज जैसे क्षेत्रों में कई ऐसे फाटक हैं जहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। नामीडीह से करताहां जाने वाली यह सड़क काफी व्यस्त रहती है, ऐसे में यहाँ की सुरक्षा को ताक पर रखना समझ से परे है।

निष्कर्ष: समाधान की दिशा में लोको पायलट का ‘सबक’

​5 अप्रैल 2026 की यह सुबह हाजीपुर के लिए एक चेतावनी लेकर आई है। अगर आदित्य राज ने वीडियो न बनाया होता और लोको पायलट ने हिम्मत न दिखाई होती, तो आज हेडलाइन कुछ और ही होती। लोको पायलट द्वारा खुद फाटक बंद करना यह दर्शाता है कि व्यवस्था में ‘गैप’ कितना बड़ा है। गेटमैन का निलंबन तो एक प्रक्रिया है, लेकिन असली समाधान तब होगा जब रेलवे अपने फाटकों को पूरी तरह से आधुनिक और मानवीय भूलों से मुक्त (Fail-Safe) बनाएगा।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम लोको पायलट के इस निस्वार्थ कार्य को सलाम करती है और रेल प्रशासन से मांग करती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल, हाजीपुर-सुगौली रेलमार्ग पर परिचालन सामान्य है, लेकिन गुमटी नंबर 8C अब सुरक्षा समीक्षा का केंद्र बन गई है।

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