​पूर्णिया में विश्वास का ‘सौदा’ और 13 महीने का नरक: गुलाब बाग के रसूखदार मक्का व्यवसायी ने 2 लाख में खरीदी थी ‘प्रेमिका’, रूह कंपा देने वाली दास्ताँ

पूर्णिया/भवानीपुर। बिहार के सीमांचल का हृदय कहे जाने वाले पूर्णिया जिले से मानवता को शर्मसार और रिश्तों की पवित्रता को लहूलुहान करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने समाज के सामूहिक विवेक को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी एक ऐसे धोखे की है जहाँ ‘प्रेम’ की आड़ में एक युवती की नीलामी कर दी गई और उसे महज दो लाख रुपये की खातिर एक वस्तु की तरह बेच दिया गया। जिस युवक की बांहों में युवती ने सुरक्षित भविष्य का सपना देखा था, उसी ने उसे 13 महीनों के लिए एक अंधेरे कमरे की कालकोठरी में धकेल दिया। रविवार, 5 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट उस खौफनाक मंजर का खुलासा करती है जिसे एक युवती ने पिछले 400 से अधिक दिनों तक झेला है। पुलिस की मुस्तैदी और एक इत्तेफाक ने उसे मौत के मुँह से बाहर निकाला है, लेकिन उसके मन पर लगे घाव शायद कभी नहीं भर पाएंगे।

प्रेम का छलावा और दो लाख की ‘कीमत’

​घटना की शुरुआत लगभग 14 महीने पहले पूर्णिया के भवानीपुर थाना क्षेत्र से हुई थी। पीड़ित युवती को नूर नामक एक युवक से प्रेम हो गया था। नूर ने बड़ी चालाकी से युवती को अपनी बातों के जाल में फंसाया और उसे शादी के सुनहरे सपने दिखाए। अपने माता-पिता के प्यार और घर की दहलीज को छोड़कर युवती नूर के साथ भाग खड़ी हुई, उसे लगा कि वह अपनी एक नई दुनिया बसाने जा रही है। लेकिन नूर कोई प्रेमी नहीं, बल्कि एक शातिर मानव तस्कर था।

​नूर युवती को लेकर गुलाब बाग के गुंडा चौक पहुँचा। यहाँ उसने पहले से तय सौदे के अनुसार क्षेत्र के एक रसूखदार मक्का व्यवसायी प्रहलाद कुमार जायसवाल से मुलाकात की। नूर ने अपनी ही प्रेमिका का सौदा महज दो लाख रुपये में प्रहलाद जायसवाल से कर दिया। पैसे हाथ में आते ही नूर मौके से फरार हो गया और युवती को एक ऐसे नरक में छोड़ गया जहाँ से वापसी की कोई राह नजर नहीं आ रही थी।

गुलाब बाग की वह अंधेरी कोठरी: 13 महीने की कैद और दरिंदगी

​मक्का व्यवसायी प्रहलाद कुमार जायसवाल ने युवती को खरीदने के बाद उसे अपने घर के एक एकांत कमरे में बंद कर दिया। पिछले 13 महीनों तक युवती ने जो झेला, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। पुलिस को दी गई अपनी आपबीती में युवती ने बताया कि उसे जानवरों से भी बदतर स्थिति में रखा गया था।

दरिंदगी की मुख्य बातें:

  1. संपूर्ण कैद: 13 महीनों तक उसे कमरे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। खिड़की से बाहर झांकना भी मना था। उसे सूरज की रोशनी तक नसीब नहीं हुई।
  2. शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना: आरोपी व्यवसायी प्रहलाद जायसवाल उसके साथ लगातार मारपीट करता था। युवती का आरोप है कि उसके साथ हर दिन जबरन दुष्कर्म किया गया।
  3. धमकी का साया: विरोध करने पर प्रहलाद जायसवाल उसे और उसके भवानीपुर स्थित परिवार को जान से मारने की धमकी देता था। रसूखदार होने के कारण व्यवसायी को कानून का कोई डर नहीं था।

किस्मत का मोड़ और पुलिस की ‘सर्जिकल’ कार्रवाई (विशेष विश्लेषण)

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, इस मामले में ‘संयोग’ ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। 13 महीने बीत जाने के बाद, एक दिन प्रहलाद जायसवाल की लापरवाही से युवती को छत पर जाने का मौका मिल गया। उसी समय गली से उसका एक दूर का रिश्तेदार गुजर रहा था। अपनी जान की बाजी लगाकर युवती ने शोर मचाया। शोर सुनकर जब रिश्तेदार ने ऊपर देखा, तो वह दंग रह गया। उसने तुरंत इसकी सूचना युवती के परिजनों को दी।

​चूंकि भवानीपुर थाने में 14 महीने पहले ही युवती की गुमशुदगी और अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, इसलिए पुलिस पहले से ही इस मामले में संवेदनशील थी। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी स्वीटी सहरावत ने मामले की कमान संभाली। स्वीटी सहरावत ने बिना वक्त गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया और गुलाब बाग स्थित प्रहलाद जायसवाल के ठिकाने पर छापेमारी की। पुलिस ने घेराबंदी कर युवती को उस अंधेरे कमरे से बरामद किया और आरोपी व्यवसायी को मौके पर ही दबोच लिया।

कानूनी कार्रवाई: प्रहलाद जायसवाल जेल में, नूर की तलाश जारी

​पुलिस ने मक्का व्यवसायी प्रहलाद कुमार जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ मानव तस्करी, अवैध रूप से बंधक बनाने और बार-बार दुष्कर्म (मल्टीपल रेप) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

​हालांकि, इस पूरे घिनौने कांड का सूत्रधार ‘नूर’ अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। स्वीटी सहरावत के अनुसार, नूर एक पेशेवर मानव तस्कर हो सकता है जिसके तार अन्य अंतरराज्यीय गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस की कई टीमें नूर की तलाश में अररिया, कटिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि नूर की गिरफ्तारी के बाद सीमांचल में चल रहे ‘शादी के नाम पर सौदा’ करने वाले बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है।

संतुलित नजरिया: समाज और सुरक्षा पर उठते सवाल

​एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो यह घटना पूर्णिया के गुलाब बाग जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है। 13 महीने तक एक मोहल्ले में एक लड़की को बंधक बनाकर रखा गया और किसी को भनक तक नहीं लगी, यह पड़ोसियों की उदासीनता को भी दर्शाता है।

  • मानव तस्करी का नया चेहरा: यह केस साबित करता है कि अब तस्कर बाहरी नहीं, बल्कि ‘प्रेमी’ के रूप में घर के भीतर तक पहुँच बना चुके हैं।
  • पुलिस की भूमिका: भवानीपुर पुलिस और स्वीटी सहरावत की त्वरित कार्रवाई की सराहना होनी चाहिए कि उन्होंने सूचना मिलते ही बिना किसी रसूख के दबाव में आए आरोपी को गिरफ्तार किया।

निष्कर्ष: समाधान और पुनर्वास की चुनौती

​5 अप्रैल 2026 की यह घटना पूर्णिया के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। युवती भले ही दरिंदे के चंगुल से बाहर आ गई है, लेकिन समाज में उसकी वापसी और मानसिक पुनर्वास एक बड़ी चुनौती है। प्रहलाद जायसवाल जैसे अपराधियों को ऐसी कड़ी सजा मिलनी चाहिए जो दूसरों के लिए मिसाल बने।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पीड़ित युवती के साहस को सलाम करती है और प्रशासन से मांग करती है कि उसे उचित सुरक्षा और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। फिलहाल, पुलिस की फाइल में ‘नूर’ का नाम सबसे ऊपर है और उसकी गिरफ्तारी ही इस न्याय की प्रक्रिया को पूर्ण करेगी।

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