
पूर्णिया में सांसद ने शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। पूर्णिया कोर्ट स्टेशन परिसर में एटीएम टिकट मशीन, महिला प्रतीक्षालय और पुरुष प्रतीक्षालय के उद्घाटन के अवसर पर पहुंचे सांसद पप्पू यादव ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और हाल के एनकाउंटर मामलों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनके बयान ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
पूर्णिया कोर्ट स्टेशन परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सांसद पप्पू यादव ने नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एटीएम टिकट मशीन तथा अलग महिला और पुरुष प्रतीक्षालय की शुरुआत की गई। इस पहल को यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा जा रहा है। उद्घाटन समारोह के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं का विस्तार आम लोगों के जीवन को आसान बनाता है और ऐसी सुविधाओं का हर सार्वजनिक स्थल पर विस्तार होना चाहिए।
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में सांसद ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा के अधीक्षक पर की गई कार्रवाई की सराहना की। पप्पू यादव ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए सकारात्मक संदेश है।
उन्होंने कहा कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। अस्पतालों में संसाधनों की कमी, प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं आम लोगों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के कई उच्च अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं हैं और भ्रष्टाचार व्यवस्था की जड़ तक पहुंच चुका है।
पप्पू यादव ने अपने बयान में कहा कि लगभग 90 प्रतिशत प्रिंसिपल और अधीक्षक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि जिन लोगों पर स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी है, वही व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। उनके अनुसार सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा के पीछे प्रशासनिक भ्रष्टाचार एक बड़ा कारण है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्रवाई होती है, तब कुछ संस्थाएं आरोपियों के बचाव में सामने आ जाती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने (IMA) का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाओं का भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे लोगों के बचाव में आना उनकी मानसिकता को भी उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था को सुधारना है तो पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
सांसद पप्पू यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता का बुनियादी अधिकार हैं और इस क्षेत्र में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करने के लिए कठोर प्रशासनिक सुधारों की जरूरत है।
मीडिया बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी जाति आधारित राजनीति का असर प्रशासनिक फैसलों में दिखाई देने लगा है। उनके बयान का केंद्र कथित जातीय पक्षपात और कानून-व्यवस्था की कार्यशैली पर रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुन-चुन कर ब्राह्मण समाज के लोगों का एनकाउंटर किया जा रहा है। पप्पू यादव ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि कानून व्यवस्था जातीय सोच से प्रभावित होगी, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरनाक संकेत होगा।
सांसद ने कहा कि बिहार में मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अब तक सात एनकाउंटर हो चुके हैं। उन्होंने इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। पप्पू यादव ने कहा कि प्रत्येक एनकाउंटर की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं होनी चाहिए, चाहे वह अपराधी हो या कानून लागू करने वाली एजेंसी। यदि पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं होगी, तो जनता का भरोसा कमजोर पड़ेगा। उनके अनुसार निष्पक्ष जांच ही ऐसे मामलों में विश्वास बहाल कर सकती है।
पप्पू यादव ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को अपराधी घोषित करने का अंतिम अधिकार न्यायपालिका के पास है। इसलिए किसी भी एनकाउंटर मामले में जांच अनिवार्य होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कार्रवाई कानूनी दायरे में हुई या नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पप्पू यादव के ये बयान आने वाले समय में बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन सकते हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था में भ्रष्टाचार और एनकाउंटर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उनकी खुली प्रतिक्रिया विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।
पूर्णिया में उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान दिया गया उनका बयान केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की व्यापक प्रशासनिक और राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े करता नजर आया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि चाहे स्वास्थ्य व्यवस्था का मामला हो या कानून-व्यवस्था का, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
कुल मिलाकर पूर्णिया दौरे के दौरान सांसद पप्पू यादव ने विकास कार्यों के साथ-साथ कई संवेदनशील मुद्दों को उठाकर राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके द्वारा उठाए गए सवालों पर सरकार और संबंधित विभाग किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं।


