
भागलपुर में राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइया फ्रंट की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार, 5 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में रसोइयों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में रसोइयों की ज्वलंत समस्याओं, मानदेय वृद्धि, कार्यस्थल पर सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत रसोइयों की स्थिति आज भी दयनीय बनी हुई है। उन्हें बेहद कम मानदेय में काम करना पड़ता है, जबकि काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं, जिससे रसोइयों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रसोइयों ने एक स्वर में केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि उनका मानदेय बढ़ाकर सम्मानजनक स्तर पर किया जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए। वक्ताओं ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा अप्रैल महीने से 20,000 रुपये मानदेय लागू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन इसका लाभ अब तक जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचा है। इसको लेकर रसोइयों में गहरी नाराजगी देखी गई।
बैठक में कई रसोइयों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे वर्षों से इस योजना में कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उन्हें न तो स्थायित्व मिला है और न ही पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा। ऐसे में उनके परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो रसोइया फ्रंट बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। इसके तहत पटना और दिल्ली में धरना-प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार की गई है। साथ ही जिला स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाने का फैसला लिया गया, ताकि अधिक से अधिक रसोइयों को इस आंदोलन से जोड़ा जा सके।
बैठक में जिला संयोजक सहित कई पदाधिकारियों ने संगठन की मजबूती और एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक सभी रसोइया एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।
अंत में सभी उपस्थित रसोइयों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया और सरकार से जल्द से जल्द सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई।


